हथेली पर त्रिशूल, क्रॉस, तारे, कमल, ध्वज समेत कई आकृतियां अपने आप बन जाती हैं। लेकिन हाथ में बनने वाला मछली का चिन्ह बेहद खास माना जाता है। हस्तरेखा विज्ञान अनुसार यह चिन्ह अच्छे भाग्य, लंबी आयु और धन वृद्धि का संकेत देता है। लेकिन यह तभी पूरा फल देता है जब यह शुभ स्थानों पर बना हो, साथ ही स्पष्ट रूप से दिखाई दे और मछली की दिशा हथेली के ऊपर की तरफ यानी उंगलियों की तरफ हो। चलिए जानते हैं हाथ में मछली का निशान कहां बनना सबसे शुभ होता है और ये भविष्य से जुड़े क्या संकेत देता है।
Image Source : canvaहथेली में मछली का निशान बनना कहां होता है शुभ?
मछली का निशान कहां होता है शुभ?
- हस्तरेखा विज्ञान अनुसार जिन लोगों के हाथ में जीवन रेखा पर ये शुभ चिन्ह बना होता है, ऐसे लोग लाइफ में खूब तरक्की करते हैं। इन्हें दीर्घायु की प्राप्ति होती है। साथ ही इनके जीवन में धन-संपत्ति की कभी कमी नहीं होती। यह शुभ चिन्ह जीवन रेखा और मणिबंध रेखा से मिलकर बनता है।
- हाथ के बुध पर्वत पर इस निशान का बनना बेहद शुभ माना जाता है। बुध पर्वत हाथ की छोटी उंगली के ठीक नीचे होता है। कहते हैं यहां बनने वाला मछली का निशान बड़ा व्यापारी बनने का संकेत देता है। ऐसे लोगों की वाणी काफी प्रभावशाली होती है। ये लोग अपनी इसी खूबी के दम पर अपार सफलता और प्रसिद्धि हासिल करते हैं।
- भाग्य रेखा पर भी इस निशान का बनना बेहद शुभ माना जाता है। भाग्य रेखा मणिबंध से शुरू होकर हाथ की बीच वाली उंगली के नीचे शनि पर्वत तक पहुंचती है। यहां मछली का चिन्ह बनना कार्यों के बिना किसी रुकावट के पूरा होने का संकेत देता है।
Image Source : india tvहथेली के पर्वत
- सूर्य पर्वत पर यह शुभ निशान होना सर्वोच्च पद मिलने का संकेत देता है। तो वहीं गुरु पर्वत पर इस निशान का होना ज्ञान और बुद्धि के दम पर दुनिया पर राज करने का संकेत देता है। चंद्र पर्वत पर यह निशान होने का अर्थ है कि जातक क्रिएटिव काम जैसे आर्ट, कला और संस्कृति के माध्यम से खूब धन अर्जित करेगा। जबकि शुक्र पर्वत पर मछली का निशान यह दर्शाता है कि जातक अभिनय, नाटक, कला और फिल्म आदि के क्षेत्र में प्रसिद्धि पाएगा।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें:
क्या आपके अंगूठे पर भी है यव का चिन्ह? जानिए हस्तरेखा में क्यों माना जाता है इसे राजयोग