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Parama Ekadashi Puja Vidhi: परम एकादशी की पूजा कैसे करते हैं? जानिए स्टेप बाय स्टेप पूरी विधि

Parama Ekadashi Puja Vidhi: अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परम एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी 3 साल में एक बार आती है, जिसका फल कई गुना मिलने की मान्यता है। चलिए जानते हैं परम एकादशी की पूजा कैसे की जाती है।

Parama Ekadashi Puja Vidhi- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV परम एकादशी की पूजा कैसे करते हैं?

Parama Ekadashi Puja Vidhi: अधिकमास में आने वाली एकादशी तिथि बहुत महत्व रखती है। इस पावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परम एकादशी कहा जाता है। इस साल यह व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। परम एकादशी का व्रत 3 साल में एक बार पड़ता है, जिसके कारण इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्रती के जीवन में सुख-समृद्धि और पॉजिटिविटी आती है। चलिए जानते हैं परम एकादशी की पूजा करने की संपूर्ण विधि क्या है। 

एकादशी व्रत और पूजा विधि

  • एकादशी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ (संभव हो तो पीले रंग के) वकपड़े पहनें।
  • इसके बाद पूजा घर में शांत मन से बैठें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। 
  • अब एक छोटी चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और इस पर भगवान विष्णु-मां लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर रखें।
  • भगवान जी को स्नान कराएं। इसके लिए पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें और पीले चंदन का तिलक लगाएं। 
  • अब प्रभु को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें। (एकादशी पर तुलसी के पत्ते तोड़ना निषेध है, ऐसे में एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें)
  • पूजन के समय भगवान श्री विष्णु के इस मंत्र का उच्चारण करें- एकादश्यां निराहार: स्थित्वाहमपरेअहनि, भोक्ष्यामि पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत
  • धूप-दीप जलाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। 
  • इसके बाद मां लक्ष्मी और विष्णु जी की आरती करें।
  • पूरा दिन उपवास रखें और केवल एक समय फलाहार ग्रहण करें। 
  • इस एकादशी तिथि पर सोना नहीं चाहिए। भजन, विष्णु सहस्रनाम, विष्णु मंत्रों और चालीसा का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करें।

द्वादशी तिथि पर करें व्रत का पारण

  • अगले दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर विष्णु का दूध से अभिषेक करें। 
  • इसके बाद हाथ जोड़कर इस मंत्र "अज्ञानतिमि रान्धस्य व्रतेनानेन केशव, प्रसीद सुमुखो भूत्वा ज्ञानदृष्टिप्रदो भव" का जाप करें। 
  • सूर्यदेव को जल चढ़ाएं।
  • ब्राह्मणों या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और उन्हें सामर्थ्य अनुसार धन और अनाज का दान दें।
  • इसके बाद भोजन ग्रहण एकादशी का व्रत खोलें।

एकादशी व्रत के जरूरी नियम

  • एकादशी व्रत का नियम दशमी तिथि से ही लागू हो जाता है। दशमी की रात को सात्विक और हल्का भोजन करें।
  •  एकादशी के दिन घर में चावल ना बनाएं। व्रती के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस दिन चावल नहीं खाने चाहिए।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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