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Parama Ekadashi Bhajan: परमा एकादशी की सुबह घर में बजाएं विष्णु जी के ये 5 जादुई भजन, खिंची चली आएंगी मां लक्ष्मी!

Parama Ekadashi Bhajan: एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु के भजन सुनने का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इससे मानसिक शांति मिलने के साथ-साथ घर में सकारात्मक ऊर्जा का भी वास होता है। ऐसे में हम आपके लिए लेकर आए हैं भगवान विष्णु के 5 सबसे लोकप्रिय भजन।

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Image Source : INDIA TV परम एकादशी भजन

Parama Ekadashi Bhajan: 11 जून को परम एकादशी मनाई जाएगी। बता दें इस एकादशी का शुभ संयोग तीन साल में एक ही बार बनता है। ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान पूजा जरूर करें। साथ ही उनके लोकप्रिय भजनों का गान भी जरूर करना चाहिए। शास्त्रों अनुसार जो भी भक्त परमा एकादशी के दिन सुबह-शाम श्रीहरि विष्णु भगवान के भजन गाता या सुनता है उसके जीवन में सुख-शांति का सदैव वास बना रहता है। तो चलिए आपको बताते हैं कि एकादशी पर आपको किन भजनों को जरूर सुनना चाहिए।

1. अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम (Achyutam Keshvam Bajan)

यह भगवान विष्णु के सबसे लोकप्रिय भजनों में से एक है। सुबह-सुबह इस भजन को सुनने या गुनगुनाने से घर का माहौल खुशनुमा हो जाता है।

  • अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
  • राम नारायणं जानकी बल्लभम।
  • कौन कहता हे भगवान आते नहीं,
  • तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं।
  • अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
  • राम नारायणं जानकी बल्लभम।
  • कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
  • बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं।
  • अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
  • राम नारायणं जानकी बल्लभम।
  • कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
  • माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं।
  • अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
  • राम नारायणं जानकी बल्लभम।
  • कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
  • गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं।
  • अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
  • राम नारायणं जानकी बल्लभम।
  • नाम जपते चलो काम करते चलो,
  • हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो।
  • अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
  • राम नारायणं जानकी बल्लभम।
  • याद आएगी उनको कभी ना कभी,
  • कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी।
  • अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
  • राम नारायणं जानकी बल्लभम।

2. विष्णु सहस्रनाम (Vishnu Sahasranamam)

3. श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि 

  • श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी
  • श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी 
  • तेरी लीला सबसे न्यारी न्यारी हरी हरी
  • तेरी लीला सबसे न्यारी न्यारी हरी हरी 
  • भजमन नारायण नारायण हरी हरी 
  • जय जय नारायण नारायण हरी हरी 
  • श्रीमान नारायण नारायण हरी हरी 
  • हरी ॐ नमो नारायणा ॐ नमो नारायणा
  • हरी ॐ नमो नारायणा ॐ नमो नारायणा 
  • लक्ष्मी नारायण नारायण हरी हरी 
  • बोलो नारायण नारायण हरी हरी 
  • भजो नारायण नारायण हरी हरी 
  • जय जय नारायण नारायण हरी हरी 
  • श्रीमान नारायण नारायण हरी हरी 
  • तेरी लीला सबसे न्यारी न्यारी हरी हरी
  • श्रीमान नारायण नारायण हरी हरी 
  • हरी ॐ नमो नारायणा ॐ नमो नारायणा
  • हरी ॐ नमो नारायणा ॐ नमो नारायणा 
  • सत्य नारायण नारायण हरी हरी 
  • जपो नारायण नारायण हरी हरी 
  • भजो नारायण नारायण हरी हरी
  • जय जय नारायण नारायण हरी हरी 
  • श्रीमान नारायण नारायण हरी हरी 
  • तेरी लीला सबसे न्यारी न्यारी हरी हरी
  • श्रीमान नारायण नारायण हरी हरी
  • हरी ॐ नमो नारायणा ॐ नमो नारायणा
  • हरी ॐ नमो नारायणा ॐ नमो नारायणा 
  • बोलो नारायण नारायण हरी हरी 
  • भजमन नारायण नारायण हरी हरी 
  • जय जय नारायण नारायण हरी हरी
  • श्रीमान नारायण नारायण हरी हरी 
  • तेरी लीला सबसे न्यारी न्यारी हरी हरी 
  • श्रीमान नारायण नारायण हरी हरी
  • हरी ॐ नमो नारायणा ॐ नमो नारायणा
  • हरी ॐ नमो नारायणा ॐ नमो नारायणा 

4. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

5. अधरं मधुरं वदनं मधुरं 

  • अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं ।
  • हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥१॥
  • वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरं ।
  • चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥२॥
  • वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
  • नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥३॥
  • गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरं ।
  • रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥४॥
  • करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरं ।
  • वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥५॥
  • गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।
  • सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥६॥
  • गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरं।
  • दृष्टं मधुरं सृष्टं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥७॥
  • गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।
  • दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥८॥

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