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पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध-पिंडदान के लिए प्रसिद्ध हैं ये 9 तीर्थ, पितृ तर्पण के लिए शास्त्रों में बताया है खास महत्व

पितृपक्ष के दौरान देश के कई प्रमुख तीर्थों पर पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। गया से लेकर काशी, प्रयागराज और हरिद्वार तक, पितरों के तर्पण के लिए देश के ये 9 तीर्थ खास माने जाते हैं। यहां जानिए इन पवित्र तीर्थों का महत्व।

 Sacred Places for Shraddh- India TV Hindi
Image Source : PTI पितृों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए पवित्र स्थान

पितृपक्ष में पूर्वजों को याद कर उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। भारत में ऐसे कई तीर्थ स्थल हैं, जहां पितरों की शांति और तृप्ति के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। पितृपक्ष में कहां करें श्राद्ध और पिंडदान, पूर्वजों के श्राद्ध के लिए इन तीर्थों को क्यों खास बताया गया है? यहां जानिए 9 पवित्र स्थानों के बारे में।

  1. गया: बिहार का गया पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए प्रमुख तीर्थ माना जाता है। यहां फल्गु नदी के तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितरों के निमित्त कर्मकांड करते हैं। नदी के किनारे कई ऐसे स्थान हैं, जहां ब्राह्मणों द्वारा पिंडदान की रस्म कराई जाती है। पितृपक्ष के दौरान यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रहती है।
  2. वाराणसी: काशी यानी वाराणसी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां गंगा नदी के तट पर पितरों के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। पितृपक्ष में देशभर से श्रद्धालु काशी पहुंचकर पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
  3. प्रयागराज: यहां गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम को त्रिवेणी संगम कहा जाता है। यह स्थान हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थों में शामिल है। पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालु यहां संगम तट पर पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करते हैं।
  4. हरिद्वार: उत्तराखंड का हरिद्वार गंगा तट पर बसा प्रमुख तीर्थ है। पितरों से जुड़े धार्मिक कर्मों के लिए भी इस स्थान का विशेष महत्व माना जाता है। पितृपक्ष में श्रद्धालु यहां पहुंचकर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं।
  5. अवंतिका: उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में क्षिप्रा को पवित्र नदी माना गया है। पितृपक्ष के दौरान यहां नदी किनारे पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है।
  6. अयोध्या: भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या भी पितरों से जुड़े कर्मकांड के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। सरयू नदी के किनारे राम पैड़ी घाट पर दिवंगत पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। यहां श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ पितरों का तर्पण भी करते हैं।
  7. द्वारका: गुजरात की द्वारका नगरी में गोमती नदी के किनारे स्थित गोमती घाट धार्मिक दृष्टि से खास है। यहां दर्शन-पूजन के साथ पितरों के लिए पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं।
  8. जगन्नाथ पुरी: जगन्नाथ धाम भी पितरों के निमित्त कर्मकांड के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां पवित्र नदियों के तट पर श्रद्धालु स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। पितृपक्ष में कई श्रद्धालु यहां पूर्वजों का श्राद्ध करने पहुंचते हैं।
  9. सिद्धपुर: गुजरात का सिद्धपुर भी पिंडदान की परंपरा के लिए जाना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यहां दिवंगत आत्माओं की शांति और पूर्वजों की तृप्ति के लिए पिंडदान की रस्म निभाई जाती है।

पितृपक्ष में इन धामों का महत्व

साल 2026 में पितृपक्ष 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन समाप्त होगा। इस दौरान लोग पूर्वजों की शांति और तृप्ति की कामना से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पवित्र नदियों और तीर्थ स्थलों पर पितरों के निमित्त किए गए कर्मकांड का विशेष महत्व है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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