1. Hindi News
  2. धर्म
  3. पितृ तर्पण में काले तिल का ही क्यों होता है इस्तेमाल? जानें श्राद्ध कर्म में इसका खास महत्व

पितृ तर्पण में काले तिल का ही क्यों होता है इस्तेमाल? जानें श्राद्ध कर्म में इसका खास महत्व

पितृपक्ष में श्राद्ध और तर्पण के दौरान काले तिल का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। इसके पीछे धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। लेकिन तर्पण में काले तिल को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है? जानिए इसके पीछे की मान्यताएं और महत्व।

pitru tarpan- India TV Hindi
Image Source : PTI तर्पण में काले तिल का महत्व

पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और उन्हें याद करने का समय माना जाता है। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म किए जाते हैं, जिसके लिए कुछ तीर्थों का खास महत्व बताया गया है। इन धार्मिक अनुष्ठानों में कई चीजों का इस्तेमाल होता है, लेकिन काले तिल का विशेष स्थान बताया गया है। आखिर पितरों को तर्पण देते समय काले तिल ही क्यों चढ़ाए जाते हैं और इसके पीछे क्या मान्यता है? आइए जानते हैं।

भगवान विष्णु से संबंध

सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार, काले तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई है। इसी वजह से तिल को पवित्र माना गया है। मान्यता है कि पितृ कर्म और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में तिल का प्रयोग करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। तर्पण में काले तिल अर्पित करने को पितरों की तृप्ति और भगवान विष्णु की कृपा से भी जोड़ा जाता है।

नकारात्मक प्रभाव से बचाव

धार्मिक मान्यताओं में काले तिल को नकारात्मक प्रभाव से बचाने वाला माना जाता है। तर्पण के समय जल में काले तिल मिलाकर पितरों को अर्पित किए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे पितृ कर्म में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और श्राद्ध कर्म शांतिपूर्वक संपन्न होता है।

शनि और राहु-केतु से संबंध

ज्योतिष शास्त्र में काले तिल का संबंध शनि के साथ-साथ राहु-केतु से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि काले तिल का दान करने और पितृ कर्म में इसका प्रयोग करने से इन ग्रहों से जुड़े अशुभ प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है।

कैसे अर्पित करें काले तिल?

पितरों के लिए तर्पण करते समय जल में काले तिल मिलाकर उन्हें अर्पित किया जाता है। इसके अलावा हवन के दौरान अग्नि में काले तिल की आहुति देने की भी परंपरा बताई गई है। पितरों के निमित्त काले तिल से बनी मिठाई भी अर्पित की जा सकती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

अर्यमा देव को अर्पित करें तिल

अर्यमा देव को पितरों का देवता माना गया है। ऐसी मान्यता है कि तिल अर्पित करने से अर्यमा देव प्रसन्न होते हैं। यही वजह है कि पितृ कर्म में काले तिल को महत्वपूर्ण सामग्री के रूप में शामिल किया जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें: गया जी के इस मंदिर में लोग जीते-जी करते हैं अपना पिंडदान और श्राद्ध, जानिए इसके पीछे की मान्यताएं