पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद खास मानी जाती है। इस दिन व्रत और पूजा के साथ दीपदान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी की शाम सूर्यास्त के बाद कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। दीपदान के माध्यम से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। आज पुत्रदा एकादशी पर ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा और शाम को इन 3 जगहों पर दीपक जरूर जलाएं।
एकादशी की शाम को दीपदान के मायने
दीपदान यानी श्रद्धा के साथ दीपक जलाकर भगवान की आराधना करना। इसके लिए मिट्टी के दीपक में शुद्ध घी, सरसों या तिल का तेल इस्तेमाल करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्यास्त के बाद दीपदान का विशेष महत्व होता है। पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ शाम के समय दीपदान करना शुभ माना जाता है।
इन 3 जगहों पर जरूर लगाएं दीया
- तुलसी के पास: पुत्रदा एकादशी के दिन तुलसी के पौधे से जुड़ी कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन तुलसी में जल चढ़ाने और पत्ते तोड़ने से बचना चाहिए। हालांकि, शाम को तुलसी के पौधे के नीचे दीपक जलाया जा सकता है। तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और भगवान विष्णु को भी तुलसी प्रिय है। ऐसे में यहां दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
- मुख्य द्वार पर: घर के मुख्य द्वार को सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है। इसलिए पुत्रदा एकादशी की शाम यहां भी दीपक जलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है। भगवान विष्णु की कृपा से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
- पीपल का पेड़: हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को बेहद पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इसमें देवी-देवताओं का वास होता है। पुत्रदा एकादशी की शाम सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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