ज्योतिष में शनि को कर्म और न्याय का ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि शनि की साढ़ेसाती का दौर करीब साढ़े सात साल तक चलता है और इस दौरान व्यक्ति को अपने कर्मों के परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। शनि की गति धीमी होने के कारण इस अवधि में काम बनने में देरी और कई तरह की परीक्षाओं का सामना करने की बात कही जाती है। ऐसे समय में कुछ गलत आदतों से बचने की सलाह दी जाती है।
ये आदतें बढ़ा सकती हैं शनि का प्रकोप
कमजोर को न सताएं: साढ़ेसाती के दौरान गरीब, मजदूर, असहाय और कमजोर लोगों के साथ गलत व्यवहार करने से बचने की सलाह दी जाती है। सनातन धर्म और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, किसी जरूरतमंद का अपमान या उसे नुकसान पहुंचाना शनि के प्रतिकूल प्रभाव को बढ़ा सकता है।
घमंड से बचें: धन, पद, ज्ञान या सफलता मिलने पर दूसरों को छोटा समझना भी इस अवधि में अच्छा नहीं माना जाता। ज्योतिषीय मान्यता के मुताबिक शनिदेव व्यक्ति के अहंकार को सबक सिखाते हैं।
गलत कामों से दूरी: चोरी, जुआ, शराब और अनैतिक संबंधों जैसी बुरी आदतों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इसी तरह किसी के साथ धोखाधड़ी, छल या बेईमानी करना भी शनि की साढ़ेसाती में नुकसानदायक माना जाता है।
आलस्य छोड़ें: साढ़ेसाती के दौरान काम टालना और मेहनत से बचना भी परेशानी बढ़ाने वाली आदत मानी जाती है। अपने लक्ष्य के प्रति लगातार प्रयास और अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
नियमों का पालन: कानून और सामाजिक नियमों की अनदेखी करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इस अवधि में गलत तरीके से किए गए कामों के परिणाम अधिक परेशान कर सकते हैं।
गुस्सा न करें: बात-बात पर विवाद करना, क्रोध करना और दूसरों से दुर्व्यवहार करना मानसिक तनाव बढ़ा सकता है। इसलिए धैर्य रखने और अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है।
कैसे पाएं शनिदेव की कृपा?
साढ़ेसाती के दौरान गरीबों, मजदूरों, सफाई कर्मचारियों, मरीजों और जरूरतमंदों की मदद करना शुभ माना जाता है। जरूरत के अनुसार अन्न, कपड़े, दवाइयां, फल या जूते-चप्पल का दान किया जा सकता है। साथ ही ईमानदारी से काम करना, अनुशासित रहना और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना भी जरूरी माना जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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