Saraswati Puja Aarti 2026 Live: जय सरस्वती माता मैया जय सरस्वती माता...बसंत पंचमी पर देखें मां सरस्वती की आरती
Saraswati Mata ki Aarti (सरस्वती माता की आरती) Live: बसंत पंचमी सनातन धर्म का एक अत्यंत शुभ और पावन पर्व है जो हर साल माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल ये त्योहार 23 जनवरी को मनाया जा रहा है। यहां आप देखेंगे सरस्वती माता की आरती, भजन, मंत्र और वंदना।

Saraswati Puja 2026 Aarti Lyrics In Hindi Live (सरस्वती माता की आरती pdf): आज बसंत पंचमी का पावन पर्व है जो मां सरस्वती को समर्पित है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं अनुसार ये वही पावन दिन है जब मां सरस्वती का अवतरण हुआ था। कहते हैं मां सरस्वती के प्रकट होने से ही इस संसार में वाणी, ज्ञान और सृजन का संचार हुआ था इसलिए इस दिन को प्रकाश का पर्व माना जाता है। इसके साथ ही ये दिन वसंत के आगमन का भी प्रतीक होता है। इस दिन शुभ मुहूर्त में मां सरस्वती की विधि विधान पूजा करनी चाहिए। साथ ही उनकी आरती जरूर करनी चाहिए। यहां आप देखेंगे सरस्वती माता की आरती, मंत्र, श्लोक, भजन, गीत और वंदना।
सरस्वती माता की आरती (Saraswati Mata Ki Aarti, Basant Panchami 2026)
- जय सरस्वती माता,
- मैया जय सरस्वती माता ।
- सदगुण वैभव शालिनी,
- त्रिभुवन विख्याता ॥
- जय जय सरस्वती माता...॥
- चन्द्रवदनि पद्मासिनि,
- द्युति मंगलकारी ।
- सोहे शुभ हंस सवारी,
- अतुल तेजधारी ॥
- जय जय सरस्वती माता...॥
- बाएं कर में वीणा,
- दाएं कर माला ।
- शीश मुकुट मणि सोहे,
- गल मोतियन माला ॥
- जय जय सरस्वती माता...॥
- देवी शरण जो आए,
- उनका उद्धार किया ।
- पैठी मंथरा दासी,
- रावण संहार किया ॥
- जय जय सरस्वती माता...॥
- विद्या ज्ञान प्रदायिनि,
- ज्ञान प्रकाश भरो ।
- मोह अज्ञान और तिमिर का,
- जग से नाश करो ॥
- जय जय सरस्वती माता...॥
- धूप दीप फल मेवा,
- माँ स्वीकार करो ।
- ज्ञानचक्षु दे माता,
- जग निस्तार करो ॥
- ॥ जय सरस्वती माता...॥
- माँ सरस्वती की आरती,
- जो कोई जन गावे ।
- हितकारी सुखकारी,
- ज्ञान भक्ति पावे ॥
- जय जय सरस्वती माता...॥
- जय सरस्वती माता,
- जय जय सरस्वती माता ।
- सदगुण वैभव शालिनी,
- त्रिभुवन विख्याता ॥
Saraswati Mata Ki Aarti Download PDF
Live updates : Saraswati Mata ki Aarti Live
-
January 23, 2026 10:21 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
हे शारदे मां भजन लिरिक्स
- हे शारदे मां, हे शारदे मां
- हे शारदे मां, हे शारदे मां
- अज्ञानता से हमें तारदे मां
- हे शारदे मां, हे शारदे मां
- हे शारदे मां, हे शारदे मां
- अज्ञानता से हमें तारदे मां
- हे शारदे मां..
- तू स्वर की देवी, ये संगीत तुझसे
- हर शब्द तेरा है, हर गीत तुझसे
- हम है अकेले, हम है अधूरे
- तेरी शरण हम, हमें प्यार दे मां
- हे शारदे मां, हे शारदे मां
- अज्ञानता से हमें तारदे मां
- मुनियों ने समझी, गुनियों ने जानी
- वेदोंकी भाषा, पुराणों की बानी
- हम भी तो समझे, हम भी तो जाने
- विद्या का हमको अधिकार दे मां
- हे शारदे मां, हे शारदे मां
- अज्ञानता से हमें तारदे मां
- तू श्वेतवर्णी, कमल पर विराजे
- हाथों में वीणा, मुकुट सर पे साजे
- मनसे हमारे मिटाके अंधेरे,
- हमको उजालों का संसार दे मां
- हे शारदे मां, हे शारदे मां
- अज्ञानता से हमें तारदे मां
- हे शारदे मां, हे शारदे मां
- अज्ञानता से हमें तारदे मां
- हे शारदे मां, हे शारदे मां
- हे शारदे मां, हे शारदे मां
-
January 23, 2026 10:05 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Saraswati Mata Ke Shlok In Sanskrit: सरस्वती माता के श्लोक
नमस्ते शारदे देवी, काश्मीरपुर वासिनी,
त्वामहं प्रार्थये नित्यं, विद्या दानं च देहि में,
कंबू कंठी सुताम्रोष्ठी सर्वाभरणंभूषिता,
महासरस्वती देवी, जिव्हाग्रे सन्नी विश्यताम् ।।
शारदायै नमस्तुभ्यं , मम ह्रदय प्रवेशिनी,
परीक्षायां समुत्तीर्णं, सर्व विषय नाम यथा।। -
January 23, 2026 9:42 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa)
॥ दोहा ॥
जनक जननि पद्मरज,
निज मस्तक पर धरि ।
बन्दौं मातु सरस्वती,
बुद्धि बल दे दातारि ॥पूर्ण जगत में व्याप्त तव,
महिमा अमित अनंतु।
दुष्जनों के पाप को,
मातु तु ही अब हन्तु ॥॥ चालीसा ॥
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी ।
जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ॥जय जय जय वीणाकर धारी ।
करती सदा सुहंस सवारी ॥रूप चतुर्भुज धारी माता ।
सकल विश्व अन्दर विख्याता ॥4जग में पाप बुद्धि जब होती ।
तब ही धर्म की फीकी ज्योति ॥तब ही मातु का निज अवतारी ।
पाप हीन करती महतारी ॥वाल्मीकिजी थे हत्यारा ।
तव प्रसाद जानै संसारा ॥रामचरित जो रचे बनाई ।
आदि कवि की पदवी पाई ॥8कालिदास जो भये विख्याता ।
तेरी कृपा दृष्टि से माता ॥तुलसी सूर आदि विद्वाना ।
भये और जो ज्ञानी नाना ॥तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा ।
केव कृपा आपकी अम्बा ॥करहु कृपा सोइ मातु भवानी ।
दुखित दीन निज दासहि जानी ॥12पुत्र करहिं अपराध बहूता ।
तेहि न धरई चित माता ॥राखु लाज जननि अब मेरी ।
विनय करउं भांति बहु तेरी ॥मैं अनाथ तेरी अवलंबा ।
कृपा करउ जय जय जगदंबा ॥मधुकैटभ जो अति बलवाना ।
बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना ॥16समर हजार पाँच में घोरा ।
फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा ॥मातु सहाय कीन्ह तेहि काला ।
बुद्धि विपरीत भई खलहाला ॥तेहि ते मृत्यु भई खल केरी ।
पुरवहु मातु मनोरथ मेरी ॥चंड मुण्ड जो थे विख्याता ।
क्षण महु संहारे उन माता ॥20रक्त बीज से समरथ पापी ।
सुरमुनि हदय धरा सब काँपी ॥काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा ।
बारबार बिन वउं जगदंबा ॥जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा ।
क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा ॥भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई ।
रामचन्द्र बनवास कराई ॥24एहिविधि रावण वध तू कीन्हा ।
सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा ॥को समरथ तव यश गुन गाना ।
निगम अनादि अनंत बखाना ॥विष्णु रुद्र जस कहिन मारी ।
जिनकी हो तुम रक्षाकारी ॥रक्त दन्तिका और शताक्षी ।
नाम अपार है दानव भक्षी ॥28दुर्गम काज धरा पर कीन्हा ।
दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा ॥दुर्ग आदि हरनी तू माता ।
कृपा करहु जब जब सुखदाता ॥नृप कोपित को मारन चाहे ।
कानन में घेरे मृग नाहे ॥सागर मध्य पोत के भंजे ।
अति तूफान नहिं कोऊ संगे ॥32भूत प्रेत बाधा या दुःख में ।
हो दरिद्र अथवा संकट में ॥नाम जपे मंगल सब होई ।
संशय इसमें करई न कोई ॥पुत्रहीन जो आतुर भाई ।
सबै छांड़ि पूजें एहि भाई ॥करै पाठ नित यह चालीसा ।
होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा ॥36धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै ।
संकट रहित अवश्य हो जावै ॥भक्ति मातु की करैं हमेशा ।
निकट न आवै ताहि कलेशा ॥बंदी पाठ करें सत बारा ।
बंदी पाश दूर हो सारा ॥रामसागर बाँधि हेतु भवानी ।
कीजै कृपा दास निज जानी ॥40॥दोहा॥
मातु सूर्य कान्ति तव,
अन्धकार मम रूप ।
डूबन से रक्षा करहु,
परूँ न मैं भव कूप ॥बलबुद्धि विद्या देहु मोहि,
सुनहु सरस्वती मातु ।
राम सागर अधम को,
आश्रय तू ही देदातु ॥ -
January 23, 2026 9:02 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti)
- जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
- माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।
- जय गणेश जय गणेश…
- एकदंत दयावंत चार भुजा धारी।
- माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।।
- जय गणेश जय गणेश…
- पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
- लड्डू के भोग लगे संत करें सेवा।।
- जय गणेश जय गणेश…
- अंधे को आंख देत कोढिन को काया।
- बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया।।
- जय गणेश जय गणेश…
- ‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
- माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।
- जय गणेश जय गणेश…
-
January 23, 2026 8:39 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Lo Phir Basant Ayi Lyrics: लो फिर बसंत आई लिरिक्स
- लो फिर बसन्त आई
- फूलों पे रंग लाई
- चलो बे दरंग
- लबे आबे गंग
- बजे जलतरंग
- मन पर उमंग छाई
- लो फिर बसन्त आई
- आफत गई खिज़ां की
- किस्मत फिरी जहाँ की
- चले मै गुसार
- सूये लाला जार
- मै पर्दादार
- शीशे के दर से झाँकी
- आफत गई खिज़ां की
- खैतों हर चरिंदा
- बागों क हर परिंदा
- कोइ गर्म खेज़
- कोइ नगमा रेज़
- सुब को और तेज़
- फिर हो गया है ज़िन्दा
- बागों का हर परिंदा
- खैतों का हर चरिंदा
- धर्ति के बेल बूटे
- अन्दाज़े नौ से फूटे
- हुआ बख्त सब्ज़
- हुआ रख्त सब्ज़
- हैं दरख्त सब्ज़
- बन बन के सब्ज़ निक्ले
- धर्ति के बेल बूटे
- अन्दाज़े नौ से फूटे
- है इश्क भी जुनूं भी
- मस्ती भी जोशे खूँ भी
- कहीं दिल में दर्द
- कहीं आह सर्द
- कहीं रंग ज़र्द
- है यूँ भी और यूँ भी
- मस्ती भी जोशे खूँ भी
- फूली हुई है सर्सों
- भूली हुई है सर्सों
- नहीं कुछ भी याद
- यूँ ही बामुराद
- यूँ ही शाद शाद
- गोया रहे कि बरसों
- फूली हुई है सर्सों
- इक नाज़्नीं ने पहने
- फूलों के ज़र्द गहने
- है मगर उदास
- नही पी के पास
- घमो रंजो यास
- दिल को पडे हैं सहने
- इक नाज़्नीं ने पेहने ...
- लो फिर बसन्त आई
-
January 23, 2026 8:31 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Saraswati Om Jai Veene Wali: आरती सरस्वती जी की
- ओइम् जय वीणे वाली,
- मैया जय वीणे वाली
- ऋद्धि-सिद्धि की रहती,
- हाथ तेरे ताली
- ऋषि मुनियों की बुद्धि को,
- शुद्ध तू ही करती
- स्वर्ण की भाँति शुद्ध,
- तू ही माँ करती॥ 1 ॥
- ज्ञान पिता को देती,
- गगन शब्द से तू
- विश्व को उत्पन्न करती,
- आदि शक्ति से तू॥ 2 ॥
- हंस-वाहिनी दीज,
- भिक्षा दर्शन की
- मेरे मन में केवल,
- इच्छा तेरे दर्शन की॥ 3 ॥
- ज्योति जगा कर नित्य,
- यह आरती जो गावे
- भवसागर के दुख में,
- गोता न कभी खावे॥ 4 ॥
-
January 23, 2026 8:14 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Basant Panchami Sanskrit Shlok: बसंत पंचमी पर इन श्लोकों का जरूर करें जाप, मां सरस्वती की बरसेगी खूब कृपा
1. सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृदेवताम् ।
देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जना:
2. ओउम या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता ,
या वीणावरदण्डमण्डित करा या श्वेत पद्मासना ।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता ,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।
-
January 23, 2026 7:50 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Saraswati Ashtottara Shatnam Namavali: मां सरस्वती अष्टोत्तर-शतनाम-नामावली
॥ श्रीसरस्वती अष्टोत्तरनामावली ॥
- ॐ सरस्वत्यै नमः ।
- ॐ महाभद्रायै नमः ।
- ॐ महामायायै नमः ।
- ॐ वरप्रदायै नमः ।
- ॐ श्रीप्रदायै नमः ।
- ॐ पद्मनिलयायै नमः ।
- ॐ पद्माक्ष्यै नमः ।
- ॐ पद्मवक्त्रायै नमः ।
- ॐ शिवानुजायै नमः ।
- ॐ पुस्तकभृते नमः॥ १० ॥
- ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः ।
- ॐ रमायै नमः ।
- ॐ परायै नमः ।
- ॐ कामरूपायै नमः ।
- ॐ महाविद्यायै नमः ।
- ॐ महापातक नाशिन्यै नमः ।
- ॐ महाश्रयायै नमः ।
- ॐ मालिन्यै नमः ।
- ॐ महाभोगायै नमः ।
- ॐ महाभुजायै नमः॥ २० ॥
- ॐ महाभागायै नमः ।
- ॐ महोत्साहायै नमः ।
- ॐ दिव्याङ्गायै नमः ।
- ॐ सुरवन्दितायै नमः ।
- ॐ महाकाल्यै नमः ।
- ॐ महापाशायै नमः ।
- ॐ महाकारायै नमः ।
- ॐ महांकुशायै नमः ।
- ॐ पीतायै नमः ।
- ॐ विमलायै नमः॥ ३० ॥
- ॐ विश्वायै नमः ।
- ॐ विद्युन्मालायै नमः ।
- ॐ वैष्णव्यै नमः ।
- ॐ चन्द्रिकायै नमः ।
- ॐ चन्द्रवदनायै नमः ।
- ॐ चन्द्रलेखाविभूषितायै नमः ।
- ॐ सावित्र्यै नमः ।
- ॐ सुरसायै नमः ।
- ॐ देव्यै नमः ।
- ॐ दिव्यालंकारभूषितायै नमः॥ ४० ॥
- ॐ वाग्देव्यै नमः ।
- ॐ वसुधायै नमः ।
- ॐ तीव्रायै नमः ।
- ॐ महाभद्रायै नमः ।
- ॐ महाबलायै नमः ।
- ॐ भोगदायै नमः ।
- ॐ भारत्यै नमः ।
- ॐ भामायै नमः ।
- ॐ गोविन्दायै नमः ।
- ॐ गोमत्यै नमः॥ ५० ॥
- ॐ शिवायै नमः ।
- ॐ जटिलायै नमः ।
- ॐ विन्ध्यावासायै नमः ।
- ॐ विन्ध्याचलविराजितायै नमः ।
- ॐ चण्डिकायै नमः ।
- ॐ वैष्णव्यै नमः ।
- ॐ ब्राह्मयै नमः ।
- ॐ ब्रह्मज्ञानैकसाधनायै नमः ।
- ॐ सौदामिन्यै नमः ।
- ॐ सुधामूर्त्यै नमः॥ ६० ॥
- ॐ सुभद्रायै नमः ।
- ॐ सुरपूजितायै नमः ।
- ॐ सुवासिन्यै नमः ।
- ॐ सुनासायै नमः ।
- ॐ विनिद्रायै नमः ।
- ॐ पद्मलोचनायै नमः ।
- ॐ विद्यारूपायै नमः ।
- ॐ विशालाक्ष्यै नमः ।
- ॐ ब्रह्मजायायै नमः ।
- ॐ महाफलायै नमः॥ ७० ॥
- ॐ त्रयीमूर्त्यै नमः ।
- ॐ त्रिकालज्ञायै नमः ।
- ॐ त्रिगुणायै नमः ।
- ॐ शास्त्ररूपिण्यै नमः ।
- ॐ शुम्भासुरप्रमथिन्यै नमः ।
- ॐ शुभदायै नमः ।
- ॐ स्वरात्मिकायै नमः ।
- ॐ रक्तबीजनिहन्त्र्यै नमः ।
- ॐ चामुण्डायै नमः ।
- ॐ अम्बिकायै नमः॥ ८० ॥
- ॐ मुण्डकायप्रहरणायै नमः ।
- ॐ धूम्रलोचनमर्दनायै नमः ।
- ॐ सर्वदेवस्तुतायै नमः ।
- ॐ सौम्यायै नमः ।
- ॐ सुरासुर नमस्कृतायै नमः ।
- ॐ कालरात्र्यै नमः ।
- ॐ कलाधारायै नमः ।
- ॐ रूपसौभाग्यदायिन्यै नमः ।
- ॐ वाग्देव्यै नमः ।
- ॐ वरारोहायै नमः॥ ९० ॥
- ॐ वाराह्यै नमः ।
- ॐ वारिजासनायै नमः ।
- ॐ चित्राम्बरायै नमः ।
- ॐ चित्रगन्धायै नमः ।
- ॐ चित्रमाल्यविभूषितायै नमः ।
- ॐ कान्तायै नमः ।
- ॐ कामप्रदायै नमः ।
- ॐ वन्द्यायै नमः ।
- ॐ विद्याधरसुपूजितायै नमः ।
- ॐ श्वेताननायै नमः॥ १०० ॥
- ॐ नीलभुजायै नमः ।
- ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः ।
- ॐ चतुरानन साम्राज्यायै नमः ।
- ॐ रक्तमध्यायै नमः ।
- ॐ निरंजनायै नमः ।
- ॐ हंसासनायै नमः ।
- ॐ नीलजङ्घायै नमः ।
- ॐ ब्रह्मविष्णुशिवान्मिकायै नमः॥ १०८ ॥
॥ इति श्री सरस्वति अष्टोत्तरशत नामावलिः ॥
-
January 23, 2026 7:20 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Saraswati Mata Geet (Maa Sharde Kaha Tu Veena Baja Rahi Hain): मां शारदे कहां तू, वीणा बजा रही हैं
श्लोक:
सरस्वती नमस्तुभ्यं, वरदे कामरूपिणी,
विद्यारम्भं करिष्यामि, सिद्धिर्भवतु मे सदा।
माँ शारदे कहाँ तू,
वीणा बजा रही हैं,
किस मंजु ज्ञान से तू,
जग को लुभा रही हैं ॥किस भाव में भवानी,
तू मग्न हो रही है,
विनती नहीं हमारी,
क्यों माँ तू सुन रही है । ..x2
हम दीन बाल कब से,
विनती सुना रहें हैं,
चरणों में तेरे माता,
हम सर झुका रहे हैं,
हम सर झुका रहे हैं ।माँ शारदे कहाँ तू,
वीणा बजा रही हैं,
किस मंजु ज्ञान से तू,
जग को लुभा रही हैं ॥अज्ञान तुम हमारा,
माँ शीघ्र दूर कर दो,
द्रुत ज्ञान शुभ्र हम में,
माँ शारदे तू भर दे । ..x2
बालक सभी जगत के,
सूत मात हैं तुम्हारे,
प्राणों से प्रिय है हम,
तेरे पुत्र सब दुलारे,
तेरे पुत्र सब दुलारे ।माँ शारदे कहाँ तू,
वीणा बजा रही हैं,
किस मंजु ज्ञान से तू,
जग को लुभा रही हैं ॥हमको दयामयी तू,
ले गोद में पढ़ाओ,
अमृत जगत का हमको,
माँ शारदे पिलाओ । .
मातेश्वरी तू सुन ले,
सुंदर विनय हमारी,
करके दया तू हर ले,
बाधा जगत की सारी,
बाधा जगत की सारी ।माँ शारदे कहाँ तू,
वीणा बजा रही हैं,
किस मंजु ज्ञान से तू,
जग को लुभा रही हैं ॥माँ शारदे कहाँ तू,
वीणा बजा रही हैं,
किस मंजु ज्ञान से तू,
जग को लुभा रही हैं ॥ -
January 23, 2026 7:11 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
मां सरस्वती वंदना (Maa Saraswati Vandana)
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥१॥शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् ।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्,
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ॥२॥ -
January 23, 2026 7:03 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Saraswati Mata Ke Bhajan: सरस्वती माता के भजन
- हे सरस्वती माँ ज्ञान की देवी किरपा करो
- देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो
- करुनामई है तू वरदानी कमल तेरे कर साजे है
- आनंद मंगल कर देती है जिस घर मात विराजे है,
- ज्ञान से तेरे सरस्वती माँ अँध्यारो का नाश हुआ
- समृधि आई उस घर माँ जिस घर तेरा वास हुआ
- अपनी महिमा से घर मेरा खुशियों से भरो
- देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो
- सात सुरों की देवी हो तुम सात सुरों में वास तेरा
- सरगम से गूंजे ये धरती सरगम से आकाश तेरा
- तेरी किरपा से सरस्वती माँ मंगल सब हो जाता है
- जिसके कंठ विराजे माता बिगड़ा भग्य बन जाता है
- मेरे भी सारे काज मात तूम पूरण करो
- देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो
- वीणा धारनी विपदा हारनी कितनी पावन हो माता
- देव ऋषि तुम्हे नमन करे माँ दर्शन तेरा मन भाता
- गुनी जनों की हो हित कारी सब को शरण लगाती हु
- जिसकी वाणी में बस जाओ माला माल बनाती हो
- हम दीं हीन पे मात मेरी तुम ध्यान धरो
- देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो