सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान हरे रंग को प्रकृति, समृद्धि, सौभाग्य और नई ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि महिलाएं सावन और हरियाली तीज पर हरी चूड़ियां पहनकर सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। तो चलिए जानते हैं सावन में हरी चूड़ियां पहनने की सदियों पुरानी परंपरा के पीछे क्या धार्मिक वजह बताई जाती है।
सावन और हरे रंग का कनेक्शन
सावन बरसात और हरियाली का महीना है। बारिश के बाद सूखी धरती पर हरियाली छा जाती है और वातावरण में नई ऊर्जा नजर आती है। इसी कारण हरा रंग जीवन, विकास, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
वहीं, सनातन परंपरा में चूड़ियों को सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में हरी चूड़ियां पहनकर महादेव और मां पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए इस महीने महिलाएं हरे कपड़े, चूड़ियां और मेहंदी को अपने शृंगार का खास हिस्सा बनाती हैं।
हरियाली तीज पर खास महत्व
सावन में आने वाला हरियाली तीज का पर्व भी हरे रंग से खास तौर पर जुड़ा है, जानिए आखिर क्यों मनाई जाती है हरियाली तीज। इस दिन महिलाएं हरे वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी सजाती हैं और हरी चूड़ियां पहनती हैं। इसे माता पार्वती के प्रति श्रद्धा और दांपत्य जीवन में प्रेम व सुख की कामना से जोड़कर देखा जाता है।
शिव-पार्वती की कृपा
भगवान शिव का प्रकृति से गहरा संबंध माना गया है। वहीं, मां पार्वती सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक हैं। सावन में हरे रंग का शृंगार कर महिलाएं शिव-पार्वती की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
बुध ग्रह से भी संबंध
ज्योतिष में हरे रंग को बुध ग्रह से जोड़ा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताएं है कि हरा रंग बुध से संबंधित सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाने वाला होता है। इसे बुद्धि, करियर, व्यापार और तरक्की से जोड़ा जाता है।
परंपरा में बसी हरियाली
सावन की हरी चूड़ियों का संबंध भारतीय संस्कृति, प्रकृति और स्त्री-सौंदर्य से भी है। चूड़ियों की खनक को घर में शुभता और खुशी का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी सावन की रौनक बढ़ाती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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