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सावन 2026 की A to Z जानकारी: सावन सोमवार व्रत की तिथियों से लेकर पूजा-व्रत के नियम तक... जानें सब कुछ!

30 जुलाई 2026 से सावन महीना शुरू हो रहा है जो 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस महीने को लेकर आपके मन में कई तरह के सवाल होंगे - जैसे सावन सोमवार व्रत के नियम क्या हैं, सावन व्रत में क्या खा सकते हैं, पूजा विधि क्या है, पूरे महीने शिवलिंग पर क्या चढाएं...इत्यादि। यहां हम आपको इन सभी सवालों के जवाब देंगे अपने इस खास ब्लॉग में।

sawan 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV सावन 30 जुलाई 2026 से शुरू

Sawan 2026: सावन 2026 का पावन महीना 30 जुलाई 2026, गुरुवार से शुरू हो रहा है। ये पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति और कृपा पाने का सबसे उत्तम समय होता है। इस महीने में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और शिवलिंग की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं ये महीना कावड़ यात्रा के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रावण मास शुरू होते ही 'बोल बम के जयकारों' के साथ कावड़िए कावड़ यात्रा पर निकल जाते हैं और पवित्र तीर्थस्थलों से गंगाजल लाकर अपने क्षेत्र के शिव मंदिर में जलाभिषेक करते हैं। कावड़ जल चढ़ाने के लिए सावन शिवरात्रि का दिन सबसे शुभ माना जाता है। 

बता दें सावन में व्रत रखने का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई श्रद्धालु पूरे सावन व्रत रहते हैं तो कई सिर्फ सावन सोमवार और सावन शिवरात्रि पर ही व्रत रखते हैं। सावन को लेकर लोगों के मन में अक्सर कई तरह के सवाल भी रहते हैं जैसे सावन व्रत के नियम क्या हैं, सोमवारी व्रत में क्या खा सकते हैं, शिवलिंग की पूजा की विधि क्या है या कावड़ जल कब चढ़ेगा...इत्यादि। आइए जानते हैं सावन 2026 से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी हमारे इस खास ब्लॉग में।

सावन सोमवार व्रत 2026 लिस्ट

सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026
सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026
सावन का तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026
सावन का चौथा सोमवार 24 अगस्त 2026

सावन को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Sawan 2026 FAQ)

सावन 2026 कब से कब तक रहेगा?

सावन 2026, 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक रहेगा।

सावन में कावड़ जल कब चढ़ेगा?

वैसे तो सावन में आप कभी भी कावड़ जल चढ़ा सकते हैं। लेकिन, सावन शिवरात्रि का दिन जल चढ़ाने के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

सावन व्रत में क्या खा सकते हैं?

सावन व्रत में आप फलाहारी चीजें जैसे साबूदाना, फल, दूध से बने पदार्थ, आलू इत्यादि चीजों का सेवन कर सकते हैं।

क्या सावन में पीरियड्स के दौरान व्रत रख सकते हैं?

अगर व्रत का संकल्प लेने के बाद आपको पीरियड्स आ जाते हैं, तो ऐसी स्थिति में आपको व्रत बीच में नहीं छोड़ना है। आप जैसे व्रत रह रहे हैं, रहें। बस पूजा न करें। लेकिन अगर आपको व्रत से पहले ही पीरियड्स आ गए हैं तो ऐसे में आप व्रत न रखें।

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  • 12:06 AM (IST) Posted by Arti Azad

    सावन के जरूरी नियम कौन से हैं?

    • सावन के महीने में भी गलती से भी मांस, मदिरा, अंडे और इनसे निर्मित चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
    • सावन में प्याज और लहसुन का प्रयोग भी उचित नहीं माना जाता है क्योंकि, इसे तामसिक कहा गया है। मन की शांति, शुद्धि और भक्ति में वृद्धि के लिए इनका त्याग करना चाहिए।
    • सावन में दूध, दही आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। वास्तु गुरु मान्यता बताती हैं की श्रावण मास में कच्चे दूध को शिवजी पर अर्पित किया जाता है। ऐसे में इसका सेवन करना वर्जित माना गया है।
    • मानसून के महीने में दही कफ बढ़ाती है और कढ़ी पचने में मुश्किल होती है। ऐसे में कफ और वात दोष होने की आशंका रहती है। यही कारण है की ज्योतिषशास्त्र के साथ-साथ आयुर्वेद में भी सावन के दौरान इनका सेवन उचित नहीं माना जाता है।
    • सावन के महीने मे पालक, मेथी और पत्ता गोभी जैसी पत्तेदारी सब्जियां नहीं खानी चाहिए। क्योंकि बारिश के मौसम में इनमें बैक्टीरिया पाए जाते हैं।
    • श्रावण मास में बैंगन को अशुद्ध माना जाता है और इसे सेहत के लिहाज से भी अच्छा नहीं माना जाता है।
    • तांबे के बर्तन से दूध अर्पित करना शिवलिंग पर दूध चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन ध्यान रहे कि कभी भी तांबे के लोटे या बर्तन से दूध न चढ़ाएं। दूध हमेशा पीतल, चांदी या स्टील के बर्तन से ही अर्पित करें। तांबे के बर्तन से केवल जल ही चढ़ाना चाहिए।
    • शास्त्रों के अनुसार सावन के महीने में शरीर पर तेल लगाना, बाल व नाखून काटना वर्जित माना जाता है। विशेष रूप से रविवार के दिन तेल की मालिश नहीं करनी चाहिए
    • इस पावन महीने में बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटना भी अशुभ माना गया है। सावन के सोमवार का व्रत रख रहे हैं या सामान्य दिनों में भी शिव भक्ति कर रहे हैं, तो सावन के दौरान दिन में सोने से बचना चाहिए।
    • सावन में किसी भी जानवर या जीव-जंतु को न सताएं। विशेष रूप से सांप और सांड को भगाने के लिए डंडा न मारें और न ही उन्हें नुकसान पहुंचाएं, क्योंकि नंदी भगवान शिव के वाहन हैं और नाग देवता उनके आभूषण हैं।
  • 12:02 AM (IST) Posted by Arti Azad

    सावन में भगवान शिव की कौन सी स्तुति करनी चाहिए?

    पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम।
    जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम।1।
     
    महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम्।
    विरूपाक्षमिन्द्वर्कवह्नित्रिनेत्रं सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम्।2।
     
    गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णं गवेन्द्राधिरूढं गुणातीतरूपम्।
    भवं भास्वरं भस्मना भूषिताङ्गं भवानीकलत्रं भजे पञ्चवक्त्रम्।3।
     
    शिवाकान्त शंभो शशाङ्कार्धमौले महेशान शूलिञ्जटाजूटधारिन्।
    त्वमेको जगद्व्यापको विश्वरूप: प्रसीद प्रसीद प्रभो पूर्णरूप।4।
     
    परात्मानमेकं जगद्बीजमाद्यं निरीहं निराकारमोंकारवेद्यम्।
    यतो जायते पाल्यते येन विश्वं तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम्।5।
     
    न भूमिर्नं चापो न वह्निर्न वायुर्न चाकाशमास्ते न तन्द्रा न निद्रा।
    न गृष्मो न शीतं न देशो न वेषो न यस्यास्ति मूर्तिस्त्रिमूर्तिं तमीड।6।
     
    अजं शाश्वतं कारणं कारणानां शिवं केवलं भासकं भासकानाम्।
    तुरीयं तम:पारमाद्यन्तहीनं प्रपद्ये परं पावनं द्वैतहीनम।7।
     
    नमस्ते नमस्ते विभो विश्वमूर्ते नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते।
    नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्।8।
     
    प्रभो शूलपाणे विभो विश्वनाथ महादेव शंभो महेश त्रिनेत्।
    शिवाकान्त शान्त स्मरारे पुरारे त्वदन्यो वरेण्यो न मान्यो न गण्य:।9।
     
    शंभो महेश करुणामय शूलपाणे गौरीपते पशुपते पशुपाशनाशिन्।
    काशीपते करुणया जगदेतदेक-स्त्वंहंसि पासि विदधासि महेश्वरोऽसि।10।
     
    त्वत्तो जगद्भवति देव भव स्मरारे त्वय्येव तिष्ठति जगन्मृड विश्वनाथ।
    त्वय्येव गच्छति लयं जगदेतदीश लिङ्गात्मके हर चराचरविश्वरूपिन।11।

  • 12:00 AM (IST) Posted by Arti Azad

    भगवान शिव के मंत्र

    हर प्रकार का सुख और वैभव पाने के लिए आपको शिवजी के अघोर मंत्र का नित्य 11 बार जाप करना चाहिए।

    मंत्र है: ऊँ अघोरेभ्यो अथघोरेभ्यो, घोर घोर तरेभ्यः।
    सर्वेभ्यो सर्व शर्वेभ्यो, नमस्ते अस्तु रूद्ररूपेभ्यः।।

    शिक्षा के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए आपको भगवान शिव के इस मंत्र का नित्य 51 बार जप करना चाहिए।

    मंत्र है:  ऊँ शं शंकराय भवोद्भवाय शं ऊँ नमः

    अपने बिजनेस की गति बढ़ाने के लिए साथ ही आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस दूसरे शहरों तक जाये तो सावन महीने के दौरान रोजाना आपको भगवान शिव के इस मंत्र का 216 बार जप करना चाहिए।

    मंत्र है: ऊँ शं शिवाय शं ऊँ नमः

    नौकरी में पदोन्नति के साथ सैलरी में बढ़ोतरी पाना चाहते हैं तो सावन महीने के दौरान आपको भगवान शंकर के इस मंत्र का रोजाना 21 बार जप करना चाहिए।

    मंत्र है: नमामिशमीशान निर्वाण रूपं
    विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद स्वरूपं।।

    अपने स्वास्थ को उत्तम बनाये रखने के लिए या काफी पहले से चली आ रही स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या से छुटकारा पाने के लिए सावन महीने के दौरान आपको शिव जी के त्र्यम्बक मंत्र का नित्य 31 बार जप करना चाहिए।

    मंत्र है: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

    अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए सावन महीने के दौरान आपको भगवान शिव के इस मंत्र का नित्य रूप से 51 बार जप करना चाहिए।

    मंत्र है: ऊँ शं भवोद्भवाय शं ऊँ नमः।।

    मनचाहा वर या वधू पाने के लिए सावन महीने के दौरान आपको शिव जी के इस मंत्र का रोजाना 11 बार जप करना चाहिए।

    मंत्र है: निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं।
    चिदाकाश माकाश वासं भजेऽहं।।

    राजनीति में अपना दबदबा बनाने के लिए या किसी पार्टी में उच्चपद पाने के लिए सावन महीने के दौरान आपको भगवान शिव के इस विशेष मंत्र का रोजाना 2 बार जप करना चाहिए।

    मंत्र है: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं आं शं शंकराय मम सकल जन्मांतरार्जित पाप विध्वंसनाय श्रीमते आयुःप्रदाय, धनदाय,पुत्रदारादि सौख्य प्रदाय महेश्वराय ते नमः।1
    कष्टं घोर भयं वारय वारय पूर्णायुः वितर वितर मध्ये मा खण्डितं कुरु कुरु सर्वान् कामान् पूरय पूरय शं आं क्लीं ह्रीं ऐं ॐसम संख्याम सावित्रीम् जपेत्।2
    ॐ तत्पुरुषाय च विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्र प्रचोदयात।।3

    अपने करियर में एक ऊँचा मुकाम पाने के सावन महीने के दौरान आपको शिव जी के इस मंत्र का रोजाना 111 बार जप करना चाहिए।

    मंत्र है: ऊँ शं विश्वरूपाय अनादि अनामय शं ऊँ

    ऑफिस में बैक बाईटिंग से बचने के लिए सावन महीने के दौरान आपको भगवान शंकर के इस मंत्र का 21 बार रोजाना जप करना चाहिए।

    मंत्र है: ऊँ क्लीं क्लीं क्लीं वृषभारूढ़ाय वामांगे गौरी कृताय क्लीं क्लीं क्लीं ऊँ नमः शिवाय।।

  • 11:56 PM (IST) Posted by Arti Azad

    सावन में कौन-कौन से त्योहार पड़ेंगे?

    • 30 जुलाई (गुरुवार)- सावन का पहला दिन, सावन कृष्ण प्रतिपदा
    • 2 अगस्त (रविवार)- गजानन संकष्टी चतुर्थी (सावन संकष्टी चतुर्थी)
    • 3 अगस्त (सोमवार)- पहला सावन सोमवार व्रत
    • 4 अगस्त (मंगलवार)- पहला मंगला गौरी व्रत
    • 5 अगस्त (बुधवार)- सावन कालाष्टमी व्रत
    • 8 अगस्त (शनिवार)- रोहिणी व्रत
    • 9 अगस्त (रविवार)- कामिका एकादशी
    • 10 अगस्त (सोमवार)- दूसरा सावन सोमवार व्रत, सोम प्रदोष व्रत
    • 11 अगस्त (मंगलवार)- दूसरा मंगला गौरी व्रत, सावन शिवरात्रि
    • 12 अगस्त (बुधवार)- सावन अमावस्या, हरियाली अमावस्या, सूर्य ग्रहण
    • 13 अगस्त (गुरुवार)- सावन शुक्ल प्रतिपदा, श्रावण शुक्ल पक्ष प्रारंभ
    • 15 अगस्त (शनिवार)- हरियाली तीज
    • 16 अगस्त (रविवार)- सावन विनायक चतुर्थी
    • 17 अगस्त (सोमवार)- तीसरा सावन सोमवार, नाग पंचमी, सिंह संक्रांति
    • 18 अगस्त (मंगलवार)- तीसरा मंगला गौरी व्रत, कल्कि जयंती
    • 20 अगस्त (गुरुवार)- सावन मासिक दुर्गाष्टमी
    • 23 अगस्त (रविवार)- श्रावण पुत्रदा एकादशी
    • 24 अगस्त (सोमवार)- चौथा सावन सोमवार
    • 25 अगस्त (मंगलवार)- चौथा मंगला गौरी व्रत
    • 26 अगस्त (बुधवार)- ओणम
    • 27 अगस्त (गुरुवार)- श्रावण पूर्णिमा व्रत
    • 28 अगस्त (शुक्रवार)- श्रावण पूर्णिमा, रक्षाबंधन, चंद्र ग्रहण
  • 11:54 PM (IST) Posted by Arti Azad

    सावन में दही क्यों नहीं खानी चाहिए?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना तप, संयम और सात्विक जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान तामसिक और भारी भोजन से बचने की सलाह दी जाती है। कई परंपराओं में दही, कढ़ी और अधिक खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करने की परंपरा है। माना जाता है कि सावन में भगवान शिव को शीतल और सात्विक पदार्थ अर्पित किए जाते हैं और स्वयं भी हल्का और सुपाच्य भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है।

  • 11:49 PM (IST) Posted by Arti Azad

    सावन में कौन सी तीज आती है?

    सावन में हरियाली तीज आती है। यह सावन माह के शुक्ल पक्ष की हरियाली तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 शाम 6.46 पर शुरू होगी और अगले दिन 15 अगस्त 2026 को शाम 5.28 पर समाप्त होगी। इस दिन शिव, सिद्ध और रवि योग का संयोग बन रहा है। शिव पूजा के लिए शिव योग का बनना बेहद दुर्लभ माना जाता है। इसमें की गई साधना तमाम परेशानियां दूर होगी। 

  • 11:47 PM (IST) Posted by Arti Azad

    कावड़ जल किस दिन चढ़ेगा?

    सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी।इसी दिन हरिद्वार और अन्य तीर्थों से यात्रा कर पहुंचे लाखों श्रद्धालु अपने-अपने क्षेत्रों के प्रसिद्ध शिवधामों में महादेव को गंगाजल अर्पित करेंगे। 11 अगस्त को ही ब्रह्म मुहूर्त से लेकर रात्रि तक शिवजी पर जलाभिषेक का मुख्य अनुष्ठान चलेगा। 

  • 11:11 PM (IST) Posted by Arti Azad

    नागपंचमी कब मनाई जाएगी?

    हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन (श्रावण) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है. 2026 में यह त्योहार 17 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा। 

    • पंचमी तिथि शुरू: 16 अगस्त 2026, शाम 4:52 बजे
    • पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2026, शाम 5:00 बजे
    • पूजा का शुभ मुहूर्त: 17 अगस्त, सुबह 6:04 बजे से 8:39 बजे तक

    इस शुभ समय में पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना जाता है। 

  • 10:34 PM (IST) Posted by Arti Azad

    सावन की शिवरात्रि कब है?

    सावन महीने में शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। कहा जाता है कि शिवरात्रि पर भगवान शिव को जलाभिषेक जरूर करना चाहिए। इस दिन शुभ मुहुर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 12 बजे तक है। इस दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी रहता है। साथ ही भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र समेत पुष्प, दूध, तिल और पंचामृत जरूर अर्पित करना चाहिए।

  • 10:09 PM (IST) Posted by Arti Azad

    शिवलिंग पर क्या-क्या चीजें जरूर अर्पित करनी चाहिए?

    • सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल धीर-धीरे चढ़ाएं। इसके लिए तांबे या पीतल के लोटे का इस्तेमाल करें। जल चढ़ाते समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते रहें।
    • जल चढ़ाने के बाद शिललिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत दही,  घी, शहद और चीनी को मिलाकर बनाया जाता है। इसके बाद फिर से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और शिवलिंग को हल्के हाथों से पोंछें।
    • अगर आप शिवलिंग पर पंचामृत नहीं चढ़ा रहे हैं तो फिर कच्चा दूध चढ़ाएं। शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद गाय का कच्चा दूध चढ़ाएं। दूध चढ़ाने के बाद फिर से शुद्ध जल या गंगा जल चढ़ाएं।
    • जल चढ़ाने के बाद शिवलिंग पर सफेद या पीला चंदन का लेप लगाएं।
    • चंदन के बाद शिवलिंग पर महादेव की प्रिय चीजें बेलपत्र, धतूरा, भांग और मदार के फूल अर्पित करें। इसके साथ ही शमी के पत्ते भी चढ़ा सकते हैं। 
    • इसके बाद शिवलिंग पर अक्षत यानी बिना टूटे हुए चावल चढ़ाएं। फिर भगवान शिव को जनेऊ अर्पित करें।
    • अब शिवलिंग पर पान का पत्ता, सुपारी और इलायची चढ़ाएं। इसके साथ ही भगवान शिव को फल और मिठाई का भोग लगाएं।
    • धूप-दीप जलाकर कपूर से भगवान शिव की आरती करें। आप चाहे तो आरती से पहले शिव चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।
  • 9:37 PM (IST) Posted by Arti Azad

    सावन भजन- कांवड़ लेकर चले शिव के द्वार

    कांवड़ लेकर चले शिव के द्वार,
    मुख पर बम-बम, मन में प्यार।

    पांव में छाले, राह कठिन है,
    साथ हमारे भोलेनाथ।

    गंगा मैया का जल भर लाए,
    शिवलिंग पर श्रद्धा से चढ़ाएं,

    तन थक जाए, मन ना हारे,
    बोल बम के जयकारे लगाएं।

    कांवड़ लेकर चले शिव के द्वार,
    भोले करेंगे बेड़ा पार।

    धूप कभी है, वर्षा भारी,
    फिर भी चलते नर और नारी,

    कंधे पर है कांवड़ प्यारी,
    हृदय में बसते त्रिपुरारी।

    कांवड़ लेकर चले शिव के द्वार,
    मुख पर बम-बम, मन में प्यार।

    कोई छोटा, कोई बड़ा नहीं,
    शिव के दर पर भेद जरा नहीं,

    एक रंग में रंगे हैं सारे,
    भोले से बढ़कर देव कोई नहीं।

    कांवड़ लेकर चले शिव के द्वार,
    भोले करेंगे बेड़ा पार।

  • 9:04 PM (IST) Posted by Arti Azad

    सावन भजन- गौरा के संग झूला झूलें भोले

    गौरा के संग झूला झूलें भोले, सावन में मन के द्वार हैं खोले।

    बूंदें बरसें, पुरवाई डोले, भक्त खुशी से ‘हर-हर’ बोलें।
    गौरा ने मेहंदी हाथ रचाई, सखियों ने मंगल धुन है गाई।

    भोले लेकर प्रेम की माला, कैलाश से धरती पर आए।
    गौरा के संग झूला झूलें भोले, भक्त खुशी से ‘हर-हर’ बोलें।

    हरी चुनरिया धरती ओढ़े,बादल पर्वत से मुख मोड़े।
    रिमझिम वर्षा की बूंदों में, शिव और शक्ति नाता जोड़ें।

    बूंदें बरसें, पुरवाई डोले,सावन में मन के द्वार हैं खोले।
    गौरा जैसी शक्ति पाएं,शिव जैसा विश्वास जगाएं।

    प्रेम और सम्मान से मिलकर,घर को सुंदर धाम बनाएं।
    गौरा के संग झूला झूलें भोले, भक्त खुशी से हर-हर बोलें।

  • 8:50 PM (IST) Posted by Arti Azad

    सावन भजन- बदरिया, आए भोलेनाथ

    बरसे बदरिया, आए भोलेनाथ,
    सावन लेकर आया शिव की सौगात।

    हर हर बोलो, बम बम बोलो,
    भोले रखेंगे भक्तों की लाज।

    बेलपत्र की माला लेकर,
    गंगाजल का कलश सजाकर,

    मन के सारे मैल मिटाएं,
    शिव चरणों में शीश झुकाएं।

    बरसे बदरिया, आए भोलेनाथ,
    सावन लेकर आया शिव की सौगात।

    काली घटाएं झूमकर आईं,
    मोर पपीहे ने धुन है गाई,

    मंदिर में अब दीप जलाकर,
    भोले की महिमा गाएं सारी।

    बरसे बदरिया, आए भोलेनाथ,
    सावन लेकर आया शिव की सौगात।

    जिसने सच्चे मन से ध्याया,
    उसने भोले को है पाया,

    दुख की रात हुई फिर छोटी,
    सुख का नया सवेरा आया।

    बरसे बदरिया, आए भोलेनाथ,
    सावन लेकर आया शिव की सौगात।

  • 7:49 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    सावन में कौन सी चालीसा पढ़नी चाहिए?

    शिव चालीसा (Shiv Chalisa)

    ॥ दोहा ॥

    जय गणेश गिरिजा सुवन,

    मंगल मूल सुजान।
    कहत अयोध्यादास तुम,
    देहु अभय वरदान ॥

    ॥ चौपाई ॥

    जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
    सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

    भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
    कानन कुण्डल नागफनी के ॥

    अंग गौर शिर गंग बहाये ।
    मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

    वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
    छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ 

    मैना मातु की हवे दुलारी ।
    बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

    कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
    करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

    नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
    सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

    कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
    या छवि को कहि जात न काऊ ॥ 

    देवन जबहीं जाय पुकारा ।
    तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

    किया उपद्रव तारक भारी ।
    देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

    तुरत षडानन आप पठायउ ।
    लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

    आप जलंधर असुर संहारा ।
    सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ 

    त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
    सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

    किया तपहिं भागीरथ भारी ।
    पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

    दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
    सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

    वेद नाम महिमा तव गाई।
    अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ 

    प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
    जरत सुरासुर भए विहाला ॥

    कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
    नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

    पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
    जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

    सहस कमल में हो रहे धारी ।
    कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ 

    एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
    कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

    कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
    भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

    जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
    करत कृपा सब के घटवासी ॥

    दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
    भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ 

    त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
    येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

    लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
    संकट से मोहि आन उबारो ॥

    मात-पिता भ्राता सब होई ।
    संकट में पूछत नहिं कोई ॥

    स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
    आय हरहु मम संकट भारी ॥ 

    धन निर्धन को देत सदा हीं ।
    जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

    अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
    क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

    शंकर हो संकट के नाशन ।
    मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

    योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
    शारद नारद शीश नवावैं ॥ 

    नमो नमो जय नमः शिवाय ।
    सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

    जो यह पाठ करे मन लाई ।
    ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

    ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
    पाठ करे सो पावन हारी ॥

    पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
    निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ 

    पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
    ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

    त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
    ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

    धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
    शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

    जन्म जन्म के पाप नसावे ।
    अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ 

    कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
    जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

    ॥ दोहा ॥

    नित्त नेम कर प्रातः ही,
    पाठ करौं चालीसा ।
    तुम मेरी मनोकामना,
    पूर्ण करो जगदीश ॥

    मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
    संवत चौसठ जान ।
    अस्तुति चालीसा शिवहि,
    पूर्ण कीन कल्याण ॥

  • 7:29 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    सावन में कौन सी आरती करनी चाहिए?

    सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है इसलिए इस माह में भोलेनाथ की आरती जरूर करें।

    शिवजी की आरती

    जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा।
    ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव॥

    एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
    हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव॥

    दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
    त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव॥

    अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
    चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव॥

    श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
    सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव॥

    कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
    जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव॥

    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
    प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव॥

    काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
    नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव॥

    त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
    कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव॥

  • 7:00 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    सावन सोमवार व्रत के फायदे?

    हिंदू धर्म में सावन व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। सावन सोमवार यानी सोमवारी का व्रत करने से जहां कुंवारी कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है वहीं विवाहित महिलाओं का दांपत्य जीवन सदैव मधुर और खुशहाल बना रहता है। इसके अलावा सावन सोमवार का व्रत करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और चंद्र दोष भी दूर होता है।

  • 5:20 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    सावन में किन मंत्रों का जाप करना चाहिए?

    1. ॐ नमः शिवाय।
    2. ॐ पार्वतीपतये नमः।
    3. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
    4. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
    5. कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
  • 4:21 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    सावन में क्या नहीं खाना चाहिए?

    सावन माह में तामसिक (लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, अंडा, मछली) चीजों का सेवन न करें। इसके अलावा सावन में हरी पत्तेदार सब्जिया, बैंगन, दूध और दही भी नहीं खाएं।

  • 2:52 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    सावन में शिव को किन चीजों का भोग लगाना चाहिए?

    • पंचामृत
    • ठंडाई और भांग
    • खीर
    • मिठाइयां
    • सूजी का हलवा
    • फल
  • 2:44 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    सावन में कढ़ी क्यों नहीं खाते?

    सावन के महीने में कढ़ी नहीं खाने के पीछे धार्मिक के साथ-साथ स्वास्थ्य कारण भी हैं। धार्मिक मान्यताओं अनुसार, सावन मास में भगवान शिव का अभिषेक कच्चे दूध से किया जाता है। मान्यता है कि इस दौरान दूध या उससे बनी चीजों जिसमें कढ़ी भी शामिल है, का सेवन वर्जित माना जाता है। वहीं स्वास्थ्य दृष्टि से देखें तो सावन में पाचन कमजोर रहता है, इसलिए इस दौरान भारी और खट्टे भोजन का सेवन करने से मना किया जाता है। 

  • 2:21 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    सावन 2026: 30 जुलाई को शिवलिंग पर जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त

    • ब्रह्म मुहूर्त - 04:18 AM से 04:59 AM 
    • प्रातः सन्ध्या - 04:39 AM से 05:41 AM
    • अमृत काल - 06:24 AM से 08:09 AM
    • गोधूलि मुहूर्त - 07:14 PM से 07:34 PM
    • सायाह्न सन्ध्या - 07:14 PM से 08:16 PM

     

  • 1:49 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    क्या सावन में रोजाना मंदिर जाना चाहिए?

    ऐसा कोई जरूरी नियम नहीं है। लेकिन धार्मिक दृष्टि से सावन में मंदिर दर्शन करना बेहद शुभ माना जाता है। अगर संभव हो तो सावन में रोजाना मंदिर जाएं, लेकिन अगर किसी कारण ये कर पाना संभव नहीं है तो कम से कम सावन के सोमवार तो मंदिर जरूर ही जाएं और मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें।

  • 1:32 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    सावन व्रत कब से शुरू हैं 2026?

    सावन में भक्त विशेष रूप से सोमवार के व्रत रहते हैं और इस साल सोमवारी व्रत की शुरुआत 3 अगस्त 2026 से हो रही है। लेकिन कई श्रद्धालु सावन के पूरे महीने भी व्रत रहते हैं और इस साल ये व्रत 30 जुलाई से शुरू हो रहा है और इसका समापन 28 अगस्त को होगा। 

    यहां जानिए - सावन के पूरे महीने व्रत रखने की सरल विधि

  • 1:12 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Sawan 2026: शिवलिंग पूजा सामग्री

    शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद, शक्कर, गन्ने का रस। आप चाहें तो सिर्फ जल से भी शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं। इसके अलावा बेलपत्र कम से कम 3 या 11, धतूरा 1 या 2, भांग के पत्ते, शमी के पत्ते, आंकड़े के फूल, सफेद चंदन, भस्म, अक्षत, धूप, दीप,  फल या मिठाई।

  • 12:27 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    कांवड़ यात्रा कब से शुरू है?

    कावड़ यात्रा की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है। वैसे तो ये यात्रा पूरे महीने रहती है। लेकिन ज्यादातर कावड़िए सावन शिवरात्रि पर अपनी यात्रा पूरी कर लेते हैं। इस साल सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी।

  • 11:50 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए?

    • सबसे पहले शुद्ध जल या गंगाजल की पतली धारा से शिवलिंग को स्नान कराएं।
    • इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बारी-बारी से अभिषेक करें।
    • सभी द्रव पदार्थों को अर्पित करने के बाद फिर से शुद्ध जल चढ़ाकर शिवलिंग को साफ करें।
    • इसके बाद शिवलिंग पर चंदन का लेप, त्रिपुंड या भस्म लगाएं।
    • फिर बेलपत्र, शमी पत्र और फूल चढ़ाएं।
    • अंत में भांग, धतूरा, केसर, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
    • फिर धूप-दीप जलाकर आरती करें और शिवलिंग की आधी परिक्रमा करें।
  • 11:28 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    सावन के पूरे महीने व्रत कैसे रहें?

    सावन के पूरे महीने व्रत रखने की विधि बेहद सरल है। आप चाहें तो फलाहारी व्रत भी रह सकते हैं या एक समय भोजन करके भी व्रत रख सकते हैं। अगर फलाहारी व्रत रह रहे हैं तो दिन में एक या दो टाइम व्रत वाला भोजन कर सकते हैं। अगर एक समय भोजन करने वाला व्रत रख रहे हैं तो शाम में भगवान शिव की पूजा करने के बाद ही कुछ खाएं और दिन में फल का सेवन कर सकते हैं।

  • 11:17 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    सावन का पहला सोमवार व्रत कब है?

    सावन का पहला सोमवार व्रत 3 अगस्त 2026 को है। सनातन धर्म में सावन के सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं जो भी श्रद्धालु सावन के सोमवार के व्रत रखता है उसे 16 सोमवार व्रत का फल एक साथ प्राप्त हो जाता है। 

  • 11:13 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    सावन में शिवलिंग पूजा की सरल विधि

    सावन में शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसके लिए आप घर से ही एक साफ लोटे में जल लेकर शिव मंदिर जाएं। साथ में कुछ बेलपत्र, फूल, धतूरा, भांग, एक घी का दीपक और प्रसाद भी लेकर जाएं। सबसे पहले शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। इसके बाद फूल, बेलपत्र, भांग और धूतरा चढ़ाएं। शिवलिंग के सामने दीपक जलाकर रखें। इसके बाद प्रसाद चढ़ाएं। कुछ प्रसाद घर के लिए भी बचा लें। इस सरल विधि से आप पूरे सावन शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं।