1. Hindi News
  2. धर्म
  3. सावन में जल कब चढ़ेगा? नोट कर लें शिवलिंग पर जल अर्पित करने का सबसे शुभ मुहूर्त

सावन में जल कब चढ़ेगा? नोट कर लें शिवलिंग पर जल अर्पित करने का सबसे शुभ मुहूर्त

सावन में जलाभिषेक करने का विशेष महत्व माना जाता है। खासतौर से सावन शिवरात्रि और सोमवारी व्रत के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है। चलिए जानते हैं इस साल शिवलिंग पर जल चढ़ाने की शुभ तिथियां क्या रहने वाली हैं।

Sawan Jal Date 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV सावन में जल चढ़ाने का मुहूर्त 2026

सावन के पूरे महीने ही शिवलिंग पर जल चढ़ाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। कहते हैं इस महीने जो श्रद्धालु सच्चे मन से शिवलिंग पर जल अर्पित करता है, उसके सारे मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। अगर आप सावन के हर दिन शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ा सकते हैं तो कम से कम सावन सोमवार और शिवरात्रि पर तो जरूर ही जलाभिषेक करें। कहते हैं इससे महादेव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं। चलिए जानते हैं सावन सोमवार और शिवरात्रि की तारीख और इस दिन जल चढ़ाने के मुहूर्त।

सावन में जल कब चढ़ेगा?

वैसे तो सावन का हर दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए शुभ होता है। लेकिन इस महीने की कुछ शुभ तिथियां ऐसी हैं जिन पर जल चढ़ाना अत्यंत ही फलदायी माना जाता है। ये तिथियां इस प्रकार हैं:

  • 10 अगस्त 2026 - सावन का दूसरा सोमवार 
  • 11 अगस्त 2026 - सावन की शिवरात्रि
  • 17 अगस्त 2026 - सावन का तीसरा सोमवार 
  • 24 अगस्त 2026 - सावन का चौथा सोमवार 

सावन में जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त 2026

सावन में जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त सुबह 4 बजे से सुबह 11 बजे तक रहेगा। दरअसल सूर्योदय के बाद और दोपहर से पहले जल चढ़ाना सबसे अच्छा माना जाता है। तो वहीं सूर्यास्त के बाद जल चढ़ाने से बचना चाहिए।

सावन शिवरात्रि जब कब चढ़ेगा 2026

सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जब आप दिन में ही नहीं रात में भी शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते हैं। इस दिन रात्रि के चारों प्रहर में जलाभिषेक करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। कावड़िए भी कावड़ जल शिवरात्रि पर ही चढ़ाते हैं, इसलिए इस दिन शिवालयों में दिन भर शिवलिंग का अभिषेक होता रहता है। 

सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का मुहूर्त 2026

सावन शिवरात्रि के दिन जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त सुबह 4 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर देर रात 01 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। वहीं रात्रि के चारों प्रहर की पूजा का मुहूर्त इस प्रकार रहेगा:

  • प्रथम प्रहर पूजा समय - 11 अगस्त की शाम 07 बजकर 04 मिनट से रात्रि 09 बजकर 45 मिनट तक 
  • द्वितीय प्रहर पूजा समय - 11 अगस्त की रात 09 बजकर 45 मिनट से 12 अगस्त को 12 बजकर 45 मिनट तक 
  • तृतीय प्रहर पूजा समय - 12 अगस्त को 12 बजकर 26 मिनट से 03 बजकर 07 मिनट तक 
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 12 अगस्त को 03 बजकर 07 मिनट से प्रातः 05 बजकर 49 मिनट तक

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें:

सावन में रुद्राभिषेक कराना है? तो जान लें इस पूजा में क्या-क्या सामग्री लगेगी