Shani Kavach Path Benefits: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता माना गया है, जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। जब शनि प्रसन्न होते हैं तो जीवन में स्थिरता, सफलता और सुख आता है, लेकिन शनि के अशुभ होने पर परेशानियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में शनि देव की कृपा पाने के लिए शनि कवच का पाठ बेहद लाभकारी माना जाता है।
शनि कवच का पाठ क्यों है जरूरी?
जिन जातकों की कुंडली में शनि ग्रह कमजोर, वक्री या अशुभ स्थिति में होता है, उनके जीवन में रुकावटें, तनाव और अस्थिरता बनी रहती है। ऐसे लोग अक्सर धन, स्वास्थ्य और करियर से जुड़ी परेशानियों से घिरे रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से गुजर रहे जातकों को शनि कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। माना जाता है कि इसके प्रभाव से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के दुख, संकट व बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
शनि कवच पाठ (Shani Kavach Stotra Path)
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, शनैश्चरो देवता, शीं शक्तिः,
शूं कीलकम्, शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः
नीलाम्बरो नीलवपु: किरीटी गृध्रस्थितत्रासकरो धनुष्मान्।
चतुर्भुज: सूर्यसुत: प्रसन्न: सदा मम स्याद्वरद: प्रशान्त:।।
श्रृणुध्वमृषय: सर्वे शनिपीडाहरं महंत्।
कवचं शनिराजस्य सौरेरिदमनुत्तमम्।।
कवचं देवतावासं वज्रपंजरसंज्ञकम्।
शनैश्चरप्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम्।।
ऊँ श्रीशनैश्चर: पातु भालं मे सूर्यनंदन:।
नेत्रे छायात्मज: पातु कर्णो यमानुज:।।
नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा।
स्निग्धकण्ठश्च मे कण्ठ भुजौ पातु महाभुज:।।
स्कन्धौ पातु शनिश्चैव करौ पातु शुभप्रद:।
वक्ष: पातु यमभ्राता कुक्षिं पात्वसितस्थता।।
नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा।
ऊरू ममाSन्तक: पातु यमो जानुयुगं तथा।।
पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल:।
अंगोपांगानि सर्वाणि रक्षेन् मे सूर्यनन्दन:।।
इत्येतत् कवचं दिव्यं पठेत् सूर्यसुतस्य य:।
न तस्य जायते पीडा प्रीतो भवन्ति सूर्यज:।।
व्ययजन्मद्वितीयस्थो मृत्युस्थानगतोSपि वा।
कलत्रस्थो गतोवाSपि सुप्रीतस्तु सदा शनि:।।
अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्मद्वितीयगे।
कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्।।
इत्येतत् कवचं दिव्यं सौरेर्यन्निर्मितं पुरा।
जन्मलग्नस्थितान्दोषान् सर्वान्नाशयते प्रभु:।।
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