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Shani Pradosh Vrat: शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा 14 फरवरी को, नोट कर लें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Shani Pradosh Vrat: शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को होती है। साल 2026 में 14 फरवरी को शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब होगा और पूजा की विधि क्या है।

Shani Pradosh Vrat- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK शनि प्रदोष व्रत

Shani Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग भगवान शिव की पूजा-आराधना करते हैं। साल 2026 के फरवरी महीने में फाल्गुन कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत 14 तारीख को रखा जाएगा। इस दिन शिव जी की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को होती है। आपको बता दें कि फरवरी माह की 14 तारीख को पड़ने वाला प्रदोष व्रत शनिवार के दिन है इसलिए इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। ऐसे में जान लेते हैं प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

शनि प्रदोष व्रत पुजा का शुभ मुहूर्त  

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी को शाम 4 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी। त्रयोदशी तिथि का समापन 15 फरवरी को 5 बजकर 7 मिनट पर होगा। प्रदोष व्रत में पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) की पूजा का ही महत्व है इसलिए प्रदोष व्रत 14 फरवरी को रखा जाएगा। 

  • ब्रह्म मुहूर्त की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त- 14 फरवरी 2026 को सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 17 मिनट तक
  • प्रदोष काल की पूजा का शुभ मुहूर्त- 14 फरवरी 2026 को शाम 6 बजकर 12 मिनट से रात्रि 8 बजकर 46 मिनट तक 
  • निशिता कालीन मुहूर्त-  15 फरवरी 12 बजकर 28 ए.एम से से 1 बजकर 17 ए.एम तक

शनि प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा शाम के समय की जाती है हालांकि व्रत का संकल्प आपको सुबह लेना होता है। इसलिए प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर आपको सबसे पहले स्नान-ध्यान करना चाहिए। 
  • इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें। 
  • गंगाजल से पूजा स्थल को शुद्ध करने के बाद आपको धूप-दीप जलाना चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। 
  • इसके बाद बेलपत्र, फल, फूल आदि भगवान शिव को अर्पित करें। 
  • संभव हो तो इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पित अवश्य करें। 
  • पूजा के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जप करें और साथ ही शिव चालीसा का पाठ करें। 
  • इसी विधि से शाम के समय भी भगवान शिव की पूजा करें। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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