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Sharad Purnima 2026 Live Updates: आज शरद पूर्णिमा पर बरसेगा अमृत, जानें पूजा विधि, कथा, खीर रखने का समय, चंद्र दर्शन और हर बड़ी अपडेट

Sharad Purnima 2026 Live Updates: जानिए शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा के दर्शन, खीर रखने का सही समय, मां लक्ष्मी की पूजा और इस दिन किस कथा का पाठ करना चाहिए।

शरद पूर्णिमा 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV शरद पूर्णिमा 2026

शरद पूर्णिमा को हिंदू धर्म में बेहद खास दिन माना जाता है। साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जा रही है। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सुबह 11 बजकर 57 मिनट से होगी। रात्रि के समय पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को ही है इसलिए व्रत इस दिन रखा जाएगा और रात्रि के समय माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा की जाएगी। ऐसे में आइए जान लेते हैं शरद पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि, कथा, खीर रखने का समय आदि। 

शरद पूर्णिमा के दिन पूजा की विधि 

  • शरद पूर्णिमा की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। 
  • पूजा स्थल की सफाई करें और यहां चौकी रखें या घर के ईशान कोण में भी आप चौकी रख सकते हैं। 
  • चौकी पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर रखें। 
  • पूजा के लिए रोली, चंदन, पीले/लाल फूल, अक्षत, दीप, पान, सुपारी, फल आदि भी आपको रखने चाहिए। 
  • सबसे पहले गणेश जी की वंदना करें। इसके बाद माता लक्ष्मी के मंत्रों का जप करें। 
  • माता लक्ष्मी के भोग के लिए इस दिन खीर अवश्य बनाएं। 
  • अब शरद पूर्णिमा की कथा का पाठ करें। 
  • अंत में माता लक्ष्मी की आरती भी आपको अवश्य पढ़नी चाहिए। 
  • इसके बाद खीर को प्रसाद के रूप में वितरित आप कर सकते हैं। 
  • शरद पूर्णिमा की मुख्य पूजा सूर्यास्त के बाद की जाती है, हालांकि आप सुबह और शाम दोनों समय पूजा कर सकते हैं। 

शरद पूर्णिमा शुभ पूजन मुहूर्त 

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:56 मिनट से 05:46 मिनट तक
  • सायाह्न सन्ध्या मुहूर्त: शाम 06:09 मिनट से 07:24 मिनट तक
  • अमृत काल : शाम 05:05 मिनट से 06:36 मिनट तक
  • निशीथ काल में माता लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त: रात 11:40 बजे से रात 12:31 बजे तक

शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

भारत के कुछ राज्यों में शरद पूर्णिमा को कोजागर या कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। खासकर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा-आराधना भक्तों के द्वारा की जाती है। कोजागरी का अर्थ होता है- कौन जाग रहा है? मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में माता लक्ष्मी संसार में भ्रमण हेतु निकलती हैं और जो भी भक्त उन्हें जागता हुआ मिलता है देवी मां उसको शुभ फल प्रदान करती है और धन-धान्य से भक्त को संपन्न करती हैं। रात्रिकाल में जागरण करने के कारण ही इस शरद पूर्णिमा का नाम कोजगारी पूर्णिमा भी है। 

Live updates : Sharad Purnima 2026 Live Updates: शरद पूर्णिमा आज, जानें पूजा विधि, कथा, खीर रखने का समय

  • 2:57 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा व्रत की कथा

    एक व्यापारी की दो बेटियां थीं। दोनों बहनें धार्मिक स्वभाव की थी, लेकिन बड़ी वाली बेटी धार्मिक रीति-रिवाजों में बहुत आगे थी। दोनों रोज भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करती थीं और पूर्णिमा का उपवास भी रखती थीं। 

    शादी के बाद भी दोनों ने पूर्णिमा की व्रत जारी रखा, लेकिन छोटी बेटी के व्रत पूरा नहीं रखती थी। जिसकी वजह से उसे पूरी तरह से व्रत का पुण्य फल नहीं मिल पाता था। बड़ी बेटी ने अपनी पूरी श्रद्धा से व्रत पूर्ण किया, जिससे उसे पुत्र की प्राप्ति हुई। हालांकि, नियम से पूर्णिमा के व्रत करने के कारण छोटी बेटी ने भी संतान की सुख पाया, लेकिन उसकी संतान दीर्घायु नहीं होती थी और जन्म के कुछ दिन बाद उसकी संतान की मृत्यु हो जाया करती थी।  

    अपने इस दुख का कारण जानने के लिए उसने एक महात्मा से बात की। महात्मा ने उसे बताया तुम्हारा मन पूरी तरह से ईश्वर भक्ति में नहीं लगता है, जिसके कारण तुम्हें तकलीफ भोगनी पड़ रही है। इस दुख का निवारण पूछने पर महात्मा ने उसे शरद पूर्णिमा का व्रत पूरे विधि विधान के साथ करने के लिए कहा। महात्मा की बात सुनकर छोटी बहन ने पूर्णिमा का व्रत पूरे विधि-विधान के साथ पूरा किया, लेकिन उसकी संतान जीवित नहीं बची। जब वह पुत्र को खोने का संताप कर रही थी, तभी उसकी बड़ी बहन आई। 

    मौसी के वस्त्र छूने ने छोटी बहन की संतान जीवित हो उठी।  यह देख छोटी बहन खुश हुई और खुशी से रोने लगी, तब बड़ी बहन ने उसे व्रत की महिमा बताई। इसके बाद छोटी बहन ने पूरे विधि-विधान के साथ शरद पूर्णिमा का व्रत किया और दूसरों को भी व्रत करने की सलाह दी। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा का व्रत करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इससे आपको सभी कार्यों में सफलता हासिल होती है। 

  • 2:37 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा पूजा सामग्री

    लक्ष्मी जी की मूर्ति
    चंदन
    अक्षत
    दीपक
    धूप
    नैवेद्य
    कलश
    रोली
    फूल
    कलश में रखने के लिए पांच तरह के अनाज
    दही, शहद
    गंगाजल
    सिक्के, मौली
    आम का पत्ता, नारियल

     

  • 1:24 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    चंद्र देवता की आरती

    ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
    दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी।
    ॐ जय सोम देवा।।
    रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी।
    दीन दयाल दयानिधि, भव बंधन हारी।
    ॐ जय सोम देवा।। 
    जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
    सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि।
    ॐ जय सोम देवा।। 
    योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें।
    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, संत करें सेवा।
    ॐ जय सोम देवा।।वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।
    प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी।
    ॐ जय सोम देवा।। 
    शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।
    धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे।
    ॐ जय सोम देवा।। 
    विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।
    सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें।
    ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।

  • 12:34 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा के दिन करें माता लक्ष्मी की आरती

     

    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
    उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
    सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपति दाता।
    जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    तुम ही पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
    कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    जिस घर तुम रहती हो, तांहि में हैं सद्गुण आता।
    सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता।
    खान पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता।
    रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
    उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

  • 11:51 AM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा व्रत में क्या खा सकते हैं?

    शरद पूर्णिमा व्रत में फलाहार ले सकते हैं। लेकिन अन्न का सेवन भूलकर भी नहीं करना है। आप दूध, दही, आलू, टमाटर, फल, पनीर इत्यादि चीजों का सेवन कर सकते हैं।

  • 11:25 AM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा पूजा विधि

    • शरद पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
    • फिर एक कलश लें और उसमें पांच तरह के अनाज, थोड़ा गंगाजल, सिक्के, मौली, दही, शहद, आम का पत्ता और नारियल रखें।
    • कलश को जल से भरें और उस पर आम के पत्ते लगाएं।
    • फिर एक लाल वस्त्र पर माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।
    • माता के सामने दीपक जलाएं।
    • इसके बाद माता को फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि अर्पित करें।
    • फिर माता को खीर, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
    • अंत में माता की आरती करें।
    • इसके बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें। फिर खीर को पूरी रात चांद की रोशनी के नीचे रहने दें।
    • अगले दिन खीर को प्रसाद रूप में ग्रहण करें।
  • 10:07 AM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा की खीर खाने के लाभ

    शरद पूर्णिमा की खीर खाने से विशेष रूप से चर्म रोगियों को फायदा होता है। इसके अलावा ये खीर आंखों की रोशनी बढ़ाने का भी काम करती है। ऐसा भी कहा जाता है कि जो कोई प्रसाद रूप में इस खीर का सेवन करता है उसके जीवन में धन की कभी कमी नहीं होती है।

  • 8:59 AM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा के दिन खुले आसमान के नीचे क्यों रखी जाती है खीर?

    मां लक्ष्मी को चावल की खीर बेहद प्रिय है। वहीं, चंद्रमा का सफेद रंग से गहरा संबंध है। इसलिए मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाते हैं। इसके लिए ज्योतिष सफेद रंग की चीजों का दान करने की सलाह देते हैं। शरद पूर्णिमा की रात देवी मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं। इस दौरान मां व्यक्ति विशेष के कर्मों का अवलोकन करती हैं। वहीं, चांद की रोशनी में खीर रखने से खीर अमृत तुल्य हो जाता है। इसे अगले दिन पूजा के समय भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है। इसके बाद सपरिवार खीर को प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति पर देवी मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है। वहीं, मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

  • 8:07 AM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा के दिन 16 कलाओं से युक्त होते हैं चंद्र देव

    हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का खास महत्व बताया गया है। शरद पूर्णिमा के दिन चांद अपनी 16 कलाओं से युक्त होते हैं। इसे कोजागिरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कोजागिरी पूर्णिमा के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की  पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी की विधिवत पूरा और व्रत रखा जाता है। इसके बाद अगले दिन सुबह व्रत का पारण किया जाता है।

  • 8:04 AM (IST) Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा से जुड़ी धार्मिक मान्यता

    शरद पूर्णिमा को कोजागरा या कोजागरी लक्ष्मीन्द्र पूजा के नाम से भी जाना जाता है। ये पूजा मिथिलांचल और बंगाल में अत्यंत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस पूजा को मां लक्ष्मी के संदर्भ में मनाया जाताहै। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर बैठकर आती हैं और जो व्यक्ति इस दिन रात को जागकर मां लक्ष्मी की उपासना करता है, उसके ऊपर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में धन-धान्य की बढ़ोतरी होती है।