Shastra Niyam: भोजन सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, हिंदू शास्त्रों में इसे शरीर और मन को संतुलित रखने का आधार माना गया है। सही आहार से जहां व्यक्ति की सेहत चुस्त-दुरुस्त रहती है। वहीं गलत तरीके से किया गया भोजन न केवल शरीर, बल्कि घर के माहौल पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। यही वजह है कि प्राचीन हिंदू ग्रंथों में भोजन से जुड़े कुछ खास नियम बताए गए हैं।
भोजन और सेहत का गहरा संबंध
शास्त्रों के अनुसार स्वस्थ रहने के लिए संतुलित और स्वच्छ भोजन करना चाहिए। यह तो सभी जानते हैं कि साफ-सफाई और अच्छे मन से बना भोजन न केवल शरीर को ताकत देता है, बल्कि मानसिक स्थिति को भी संतुलित रखता है। वहीं, भोजन करने की कुछ गलत आदतें व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बना सकती हैं। जानें इनके बारे में..
ऐसा भोजन कभी न खाएं
शास्त्रों में कहा गया है कि जिस भोजन में बाल या गंदगी पाई जाए, उसे कभी नहीं खाना चाहिए। माना जाता है कि इससे घर में नकारात्मकता और दरिद्रता बढ़ सकती है।
ठोकर लगा भोजन होता है अशुद्ध
अगर किसी खाने की थाली को पैर से ठोकर लग जाए, तो उसे अशुद्ध माना गया है। शास्त्रों में ऐसे भोजन की तुलना गंदगी से की गई है, इसलिए इसे ग्रहण करने से बचना चाहिए।
लांघा हुआ भोजन न खाएं
भोजन करते समय अगर कोई व्यक्ति आपकी थाली को लांघकर निकल जाए, तो उस भोजन को खाना उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि ऐसा भोजन खाने से सकारात्मक ऊर्जा कम होती है और जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं।
जूठा भोजन करने से बचें
किसी की जूठी थाली में भोजन करना या अपनी जूठी थाली में किसी को खिलाना शास्त्रों में गलत माना गया है। इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है और आयु पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की बात कही गई है। मान्यता है कि किसी की झूठी थाली में भोजन करने से आपकी आयु कम होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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