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हनुमान जयंती पर ये विशेष पाठ कर लिया तो बदल सकती है किस्मत, बजरंगबली का ये चमत्कारी स्तोत्र देता है हजार गुना फल!

Shri Hanumat Pancharatnam Path: हनुमान जयंती 2026 के अवसर पर 'श्रीहनुमत पंचरत्नम' का पाठ करना बेहद फलदायी माना गया है। यह स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित है, जिसे सही विधि से पढ़ने पर संकट दूर होते हैं और हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

श्रीहनुमत पंचरत्नम स्तोत्र- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV आदि शंकराचार्य रचित श्रीहनुमत पंचरत्नम स्तोत्र

Shri Hanumat Pancharatnam Path: हनुमान जयंती का दिन मारुति नंदन की कृपा पाने के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करके हनुमान जी से जीवन के कष्टों को दूर करने की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन कुछ विशेष मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ किया जाए, तो बजरंगबली शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। ऐसा ही एक चमत्कारी स्तोत्र है 'श्रीहनुमत पंचरत्नम', जिसका पाठ करने से न केवल हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिलते हैं।    

'श्रीहनुमत पंचरत्नम' पाठ करने की सही विधि

हनुमान जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ व लाल कपड़े पहनें। इसके बाद किसी शांत स्थान पर पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। अपने सामने हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और घी का दीपक जलाएं। पूजा के दौरान लाल फूल अर्पित करें और गुड़ या लड्डू का भोग लगाएं। 
अब मन को शांत रखते हुए अपनी मनोकामना का ध्यान करके 'श्रीहनुमत पंचरत्नम स्तोत्र का पाठ शुरू करें। आप अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार इस स्तोत्र का पाठ 1, 3, 7 या 11 बार कर सकते हैं। अंत में हनुमान जी की आरती जरूर करें।

'श्रीहनुमत पंचरत्नम'पाठ का महत्व और लाभ

'श्रीहनुमत पंचरत्नम' एक प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना आदि शंकराचार्य ने की थी। इसमें हनुमान जी के गुणों और महिमा का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि इस स्तोत्र का नियमित और विधिपूर्वक पाठ करने से हनुमान जी की विशेष कृपा होती है। इससे संकट, भय और परेशानियां धीरे-धीरे दूर होती हैं। इस स्तोत्र के जाप से श्रीराम की भी कृपा बढ़ती है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इसका पाठ करने से मंगल और शनि दोष के अशुभ प्रभाव से भी राहत मिल सकती है।

श्रीहनुमत पंचरत्नम (Shri Hanumat Pancharatnam Stotra)

वीताखिल-विषयेच्छं जातानन्दाश्र पुलकमत्यच्छम् ।
सीतापति दूताद्यं वातात्मजमद्य भावये हृद्यम् ॥1॥

तरुणारुण मुख-कमलं करुणा-रसपूर-पूरितापाङ्गम् ।
सञ्जीवनमाशासे मञ्जुल-महिमानमञ्जना-भाग्यम् ॥2॥

शम्बरवैरि-शरातिगमम्बुजदल-विपुल-लोचनोदारम् ।
कम्बुगलमनिलदिष्टम् बिम्ब-ज्वलितोष्ठमेकमवलम्बे ॥3॥

दूरीकृत-सीतार्तिः प्रकटीकृत-रामवैभव-स्फूर्तिः ।
दारित-दशमुख-कीर्तिः पुरतो मम भातु हनुमतो मूर्तिः ॥4॥

वानर-निकराध्यक्षं दानवकुल-कुमुद-रविकर-सदृशम् ।
दीन-जनावन-दीक्षं पवन तपः पाकपुञ्जमद्राक्षम् ॥5॥

एतत्-एतत्पवन-सुतस्य स्तोत्रं यः पठति पञ्चरत्नाख्यम् ।
चिरमिह-निखिलान् भोगान् भुङ्क्त्वा श्रीराम-भक्ति-भाग्-भवति ॥6॥

इति श्रीमच्छंकर-भगवतः
कृतौ हनुमत्-पञ्चरत्नं संपूर्णम् ॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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