प्रदोष व्रत को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत सोम प्रदोष कहलाता है, मंगल को आने वाला यह व्रत भौम प्रदोष, शनिवार का प्रदोष शनि प्रदोष तो वहीं शुक्रवार का प्रदोष व्रत शुक्र प्रदोष कहलाता है। दिन के अनुसार प्रदोष व्रत का महत्व भी अलग-अलग होता है। शुक्रवार का प्रदोष व्रत सौभाग्य और दांपत्य जीवन में खुशहाली के लिए रखा जाता है। 23 अक्टूबर को शुक्र प्रदोष व्रत रखा जाएगा। चलिए आपको बताते हैं इस व्रत में किस कथा का पाठ किया जाता है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
शुक्र प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त 2026
शुक्र प्रदोष व्रत कथा का शुभ मुहूर्त शाम 05:44 से 08:16 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में भगवान शिव की विधिवत् पूजा करें और कथा पढ़ें।
शुक्र प्रदोष व्रत की कथा
शुक्र प्रदोष व्रत की कथा अनुसार एक नगर में 3 मित्र रहते थे राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। तीनों ही मित्र की शादी हो चुकी थी लेकिन धनिक पुत्र का अभी गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों को लेकर चर्चा कर रहे थे। तभी ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि 'नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।' धनिक पुत्र ने जब यह सुना तो उसने तुरंत ही अपनी पत्नी को लाने का निश्चय किया। धनिक पुत्र के माता-पिता ने उसे बहुत समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं होता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी।
जब धनिक पुत्र अपने ससुराल पहुंचा तो उसके सास-ससुर ने भी उसे समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन उसने वहां भी किसी की नहीं सुनी और जबरदस्ती अपनी पत्नी को विदा करा लिया। विदाई के बाद पति-पत्नी अपने घर के लिए निकल पड़े। लेकिन तभी अचानक से उनकी बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। जिससे दोनों गिर गए और उन्हें खूब चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर उन्हें डाकुओं ने घेर लिया। जो उनका सारा धन लूटकर ले गए। दोनों जैसे-तैसे घर पहुंचे ही थे कि वहां धनिक पुत्र को सांप ने डंस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि ये लड़का 3 दिन में मर जाएगा।
जब ब्राह्मण कुमार को इस बात का पता चला तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इसे इसकी पत्नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक पुत्र के माता-पिता ने पूरी श्रद्धा से शुक्र प्रदोष व्रत किया और अपने लड़के को उसके ससुराल वापस भेज दिया। ससुराल वापस पहुंचते ही उसकी हालत ठीक होती गई यानी शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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