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Surya Rahu Yuti: कुंडली में एक साथ बैठे सूर्य और राहु बनते हैं असफलता और शोक का कारण, इन उपायों से मिलेंगे सकारात्मक परिणाम

Surya Rahu Yuti: कुंडली में सूर्य-राहु युति बनने पर आत्मबल की कमी, सरकारी कार्यों में बाधा और पिता से संबंधों में तनाव देखने को मिलता है। लाल किताब में बताए गए कुछ सरल उपाय से इस दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

Surya Rahu Yuti- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK सूर्य और राहु बनते हैं असफलता और शोक का कारण

Surya Rahu Yuti: कुंडली में ग्रहों की स्थिति हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य और राहु एक साथ बैठ जाते हैं, तो इसे सूर्य-राहु युति या सूर्य ग्रहण दोष कहा जाता है। कहते हैं कि यह योग जीवन में रुकावटें, असफलता और मानसिक तनाव का कारण बन सकता है। चलिए जानते हैं कुंडली में कमजोर सूर्य की स्थिति को मजबूत करने के उपाय। 

क्या है सूर्य राहु युति?

जब किसी जातक की कुंडली में सूर्य और राहु एक ही भाव में स्थित होते हैं, तो सूर्य और राहु की युति बनती है। इसे ज्योतिष में सूर्य ग्रहण दोष भी कहा जाता है। कुछ जानकारों के अनुसार, अगर लग्न भाव में राहु स्थित हो और सूर्य कुंडली के किसी भी भाव में हो, तब भी ग्रहण जैसा प्रभाव देखने को मिल सकता है। यह स्थिति व्यक्ति के आत्मविश्वास, सम्मान और निर्णय क्षमता पर असर डाल सकती है।

कमजोर सूर्य का प्रभाव

सूर्य को ग्रहों का राजा और आत्मा का कारक माना गया है। अगर कुंडली में सूर्य कमजोर हो जाए या राहु के प्रभाव में आ जाए, तो व्यक्ति को सरकारी क्षेत्र में सफलता पाने में कठिनाई आ सकती है। पिता के साथ संबंधों में तनाव, मान-सम्मान में कमी और आत्मबल की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। कई बार मेहनत के बावजूद सफलता देर से मिलती है।

सूर्य को अर्पित करें जल

लाल किताब के अनुसार प्रतिदिन प्रातः सूर्य को जल अर्पित करना बेहद लाभकारी माना गया है। तांबे के लोटे से जल चढ़ाते समय सूर्य मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और ग्रहण दोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।

सूर्य बीज मंत्र और आदित्य हृदय स्तोत्र

सूर्य के बीज मंत्र-"ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" का नियमित जाप लाभकारी माना गया है। इसके साथ ही आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है। किसी एक निश्चित समय पर श्रद्धा के साथ इसका पाठ करने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।

सूर्य मजबूत करने के उपाय

  • रविवार या एकादशी का व्रत रखने से भी सूर्य के अशुभ प्रभावों में कमी आती है। सूर्य से संबंधित वस्तुएं जैसे तांबा, गेहूं और गुड़ का दान करना शुभ माना गया है। विशेष रूप से सूर्य ग्रहण के दिन किया गया दान ज्यादा फलदायी माना जाता है।
  • एक अन्य उपाय के रूप में छह नारियल लेकर उन्हें सिर से वारकर बहते जल में प्रवाहित करने की परंपरा भी बताई गई है। मान्यता है कि इससे ग्रहण दोष का नकारात्मक प्रभाव कम होता है।

उपाय करने से मिलने वाले लाभ

  1. इन उपायों को नियमित रूप से करने पर आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
  2. सरकारी कार्यों में आ रही बाधाएं कम हो सकती हैं और पिता के साथ संबंधों में सुधार आता है। 
  3. बिगड़े कार्य बनने लगते हैं और जीवन में सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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