सनातन धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनकर्ता माना जाता है। मान्यता है कि जब भी संसार में धर्म पर संकट आता है, तब श्रीहरि किसी न किसी अवतार में पृथ्वी पर आकर धर्म की रक्षा करते हैं। यही वजह है कि देशभर में भगवान विष्णु के कई प्राचीन मंदिर हैं, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। आज हम आपको भगवान विष्णु के 5 सबसे प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद है।
बद्रीनाथ मंदिर
बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। इसे भगवान विष्णु के सबसे प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है। यह चार धाम यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां भगवान बद्रीनाथ की ध्यानमग्न प्रतिमा श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऊंचे हिमालय के बीच स्थित यह मंदिर हर साल सीमित समय के लिए खुलता है, जबकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण इसके कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
द्वारकाधीश मंदिर
गुजरात के द्वारका शहर में स्थित द्वारकाधीश मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है, जिन्हें विष्णु जी का आठवां अवतार माना जाता है। समुद्र तट पर बना यह भव्य मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इसका निर्माण भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने कराया था। चार धाम यात्रा में भी इस मंदिर का विशेष स्थान है।
पद्मनाभस्वामी मंदिर
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर भगवान विष्णु के प्रमुख धामों में शामिल है। यहां श्रीहरि शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। यह मंदिर अपनी भव्यता, प्राचीन परंपराओं और विशाल खजाने के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
श्रीनाथजी मंदिर
राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा में स्थित श्रीनाथजी मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को समर्पित है। यहां ठाकुरजी की सेवा और पूजा विशेष परंपरा के अनुसार की जाती है। दिनभर में होने वाले आठ अलग-अलग दर्शनों का धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि श्रीनाथजी की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी, जिससे इस मंदिर की आस्था और भी बढ़ जाती है।
विट्ठल रुक्मिणी मंदिर
महाराष्ट्र के पंढरपुर में चंद्रभागा नदी के किनारे स्थित विट्ठल रुक्मिणी मंदिर भगवान विष्णु के विठोबा स्वरूप को समर्पित है। वारकरी संप्रदाय के लिए यह सबसे प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। यहां भगवान विट्ठल और देवी रुक्मिणी के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। आषाढ़ और कार्तिक माह में यहां विशेष धार्मिक उत्सवों का आयोजन होता है।
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