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बनते काम बिगड़ जाते हैं तो आज वैशाख अमावस्या की शाम जरूर करें ये पाठ, पितृ कृपा से खुलेगी तरक्की की राह

Pitru Dosh Nivaran Upay: अमावस्या तिथि को पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन स्नान-दान, तर्पण के साथ पितृ स्तुति और पितृ कवच का पाठ करने से जीवन की बाधाएं दूर होकर सुख-समृद्धि आने की मान्यता है।

Pitru Dosh Nivaran Upay- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK वैशाख अमावस्या के उपाय

Pitru Dosh Nivaran Upay: अगर आपके काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं या बार-बार रुकावटें आती हैं, तो आज 17 अप्रैल को वैशाख अमावस्या की शाम आपके लिए खास अवसर हो सकती है। पितृ पक्ष के अलावा अमावस्या भी पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए एक उत्तम तिथि माना जाता है। इस दिन किए गए कुछ आसान धार्मिक उपाय पितरों की कृपा दिलाकर जीवन में तरक्की के नए रास्ते खोल सकते हैं। साथ ही यह समय नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और सकारात्मकता बढ़ाने के लिए भी बेहद प्रभावी माना जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से किए गए उपाय आपके रुके हुए कार्यों को गति दे सकते हैं।

पितृ कवच (Pitru Kavach)

कृणुष्व पाजः प्रसितिम् न पृथ्वीम् याही राजेव अमवान् इभेन।

तृष्वीम् अनु प्रसितिम् द्रूणानो अस्ता असि विध्य रक्षसः तपिष्ठैः॥

तव भ्रमासऽ आशुया पतन्त्यनु स्पृश धृषता शोशुचानः।

तपूंष्यग्ने जुह्वा पतंगान् सन्दितो विसृज विष्व-गुल्काः॥

प्रति स्पशो विसृज तूर्णितमो भवा पायु-र्विशोऽ अस्या अदब्धः।

यो ना दूरेऽ अघशंसो योऽ अन्त्यग्ने माकिष्टे व्यथिरा दधर्षीत्॥

उदग्ने तिष्ठ प्रत्या-तनुष्व न्यमित्रान् ऽओषतात् तिग्महेते।

यो नोऽ अरातिम् समिधान चक्रे नीचा तं धक्ष्यत सं न शुष्कम्॥

ऊर्ध्वो भव प्रति विध्याधि अस्मत् आविः कृणुष्व दैव्यान्यग्ने।

अव स्थिरा तनुहि यातु-जूनाम् जामिम् अजामिम् प्रमृणीहि शत्रून्।

पितृ स्तोत्र (Pitru Stotra)

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।

नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।

इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।

सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ।।

मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।

तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।

नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।

द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।

देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।

अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।

प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च ।

योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।

स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।

सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।

नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।

अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।

अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।

ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:।

जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।

तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:।

नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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