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वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाएगी? नोट करें तारीख और भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा के साथ चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। जानिए वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी किस दिन मनाई जाएगी, इस दिन पूजा करने का शुभ समय क्या रहेगा और गणपति बप्पा के पूजन की विधि क्या है।

Vakratunda Sankashti Chaturthi 2026, वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी 2026

भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी का व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है। अक्टूबर में वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। आइए जानते हैं इसकी सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और व्रत विधि। यहां जानिए कार्तिक माह के व्रत-त्योहारों की लिस्ट। 

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 1 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और उसी दिन रात 10 बजकर 9 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन व्रती सुख-शांति और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हुए गणेश की जी पूजा करेंगे।

गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा के लिए शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 58 मिनट तक का समय बताया गया है। भक्त इस अवधि में गणपति बप्पा को दूर्वा, फूल और लड्डू अर्पित कर सकते हैं। पूजा के दौरान भगवान गणेश का ध्यान करके परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

कब होगा चंद्रोदय?

पंचांग के अनुसार, 29 अक्टूबर को चंद्रोदय रात करीब 8 बजकर 17 मिनट पर होने की संभावना है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने वाले भक्त चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य देते हैं और फिर व्रत का पारण करते हैं। चंद्रोदय का वास्तविक समय स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर के साथ पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। देसी घी का दीपक जलाएं और गणपति को हल्दी का तिलक लगाकर माला, दूर्वा और लड्डू अर्पित करें। फल, विशेषकर केला, और मीठा पान चढ़ाएं। पास में पानी से भरा कलश रखें। इसके बाद संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें या सुनें और भगवान गणेश के मंत्र का 108 बार जाप करें। रात में चंद्रमा के दर्शन करके अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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