Om Jai Jagdish Hare, Vishnu Ji Ki Aarti: भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना जाता है। कहते हैं इनकी पूजा से जीवन में सुख-समद्धि का वास होता है। इसलिए हर हिंदू घर में सुबह-शाम की पूजा में भगवान विष्णु की आरती जरूर गाई जाती है। कहते हैं जो भक्त सच्चे मन से श्री हरि विष्णु भगवान की ओम जय जगदीश हरे आरती को गाता है उसके जीवन के समस्त दुख दूर हो जाते हैं। खासतौर से एकादशी के दिन तो जरूर ही इस आरती को करना चाहिए। आज देवउठनी एकादशी है ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु को जगाने के बाद Om Jai Jagdish Hare आरती को जरूर करें। चलिए आपको बताते हैं एकादशी की आरती के लिरिक्स।
विष्णु जी की आरती (Vishnu Ji Ki Aarti)
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
Image Source : india tvओम जय जगदीश हरे आरती
इस आरती को करने से पहले भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जरूर जलाएं। फिर एक हाथ में घंटी और दूसरे हाथ में पूजा की थाली लेकर इस आरती को गाएं। आरती करने के बाद शंख बजाना न भूलें। अगर आप इस तरह से आरती करेंगे तो आपके घर में कभी भी नकारात्मक ऊर्जा का वास नहीं होगा।
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