हिंदू धर्म में व्रत-उपवास का विशेष महत्व माना जाता है। व्रत के दौरान लोग खान-पान से जुड़े विशेष नियमों का पालन करते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है साधारण नमक की जगह केवल सेंधा नमक का इस्तेमाल करना। अधिकतर लोग इस परंपरा का पालन तो करते हैं, लेकिन इसके पीछे का कारण नहीं जानते। तो चलिए जानते हैं कि व्रत के भोजन में इस नमक को विशेष स्थान क्यों दिया गया है।
जानिए क्या है सेंधा नमक
सेंधा नमक को रॉक सॉल्ट कहा जाता है, यह प्राकृतिक रूप से चट्टानों से प्राप्त होता है। दरअसल, इस नमक तैयार करने में किसी तरह की रासायनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं होता। यही कारण है कि इसे शुद्ध नमक माना जाता है। इसका रंग हल्का गुलाबी या सफेद होता है और इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन और जिंक जैसे कई प्राकृतिक खनिज पाए जाते हैं।
व्रत में क्यों होता है इस्तेमाल?
सामान्य नमक को औद्योगिक प्रक्रिया से तैयार किया जाता है, वास्तविक रूप देने के लिए इसे कई तरह के कैमिकल टेस्ट से गुजारा जाता है। जबकि सेंधा नमक प्राकृतिक रूप में मिलता है। सनातन परंपरा में व्रत का उद्देश्य केवल भोजन त्यागना नहीं, बल्कि शरीर और मन की शुद्धि से होता है। इसलिए व्रत के दौरान सात्विक भोजन किया जाता है। सेंधा नमक प्राकृतिक और सात्विक होता है, इसलिए इसे व्रत के भोजन में उपयाग करते हैं।
सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद
सेंधा नमक को सेहत के नजरिए से भी लाभकारी होता है। इसमें मौजूद नेचुरल मिनरल्स शरीर को ऊर्जा देते हैं। यह बेहतर पाचन क्रिया, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बनाए रखने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में सहायक है। सामान्य नमक की तुलना में यह शरीर में पानी कम रोकता है, जिससे पेट फूलने (ब्लोटिंग) और भारीपन जैसी समस्याएं कम होती हैं।
परंपरा और स्वास्थ्य का संतुलन
सेंधा नमक का उपयोग वर्षों से सनातन परंपरा का हिस्सा रहा है। व्रत के दौरान साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन, फलाहार, दही, रायता, आलू की सब्जी, मूंगफली और मखाने जैसी चीजों में सेंधा नमक डाला जाता है। इसके पीछे आस्था के साथ सेहत संबंधी कारण भी हैं। इससे खाने का स्वाद बढ़ता है और शरीर को जरूरी खनिज भी मिलते हैं। यही वजह है कि व्रत के दौरान सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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