पाकिस्तान के बल्लेबाज़ यूनुस ख़ान ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ हाल ही में दोहरा शतक लगाकर न सिर्फ सिरीज़ 2-2 से बराबर करवा दी बल्कि अपने ढुलमुल करिअर को भी पंख लगा दिये लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उनके ढलते करिअर को नयी ज़िंदगी देने में एक पूर्व भारतीय कप्तान का हाथ है।
यूनुस ने रविवार को इंग्लैंड पर दस विकेट की जीत के बाद राज़ खोला, “मोहम्मद अज़हरुद्दीन का अचानक फ़ोन आया और उन्होंने मेरी बैटिंग तकनीक में बदलाव का सुझाव दिया जो मैंने किया और डबल सेंचुरी लगा दी।''
अज़हरुद्दीन ने पाकिस्तान के जिओ न्यूज़ से कहा कि यूनुस ख़ान को क्रीज़ के बाहर रहकर खेलने में दिक़्क़त पेश आ रही थी। इसीलिए उन्होंने फाइनल टेस्ट के पहले उन्हें फ़ोन करने का सोचा।
अज़हर ने कहा, “इंग्लैंड में क्रीज़ के बाहर रहकर खेलना मुशकिल होता है क्योंकि वहां बॉल स्विंग होती है। तो मैंने उन्हें फ़ोन किया और कहा कि क्रीज़ में रहकर खेलो। इससे उन्हें गैप्स मिल गए और वह आराम से खेलने लगे। ये यूनुस की दरियादिली है कि उसने मेरे कहे मुताबिक अपनी तकनीक में बदलाव किया।”
38 साल की उम्र में डबल सेंचुरी लगाना आसान नहीं
दोहरे शतक के पहले कई एक्सपर्ट ने टीवी पर कहा था कि यूनुस को रिटायर हो जाना चाहिये लेकिन अज़हर को लगता था कि वह अभी दो-तीन साल तक और खेल सकत हैं। “38 साल की उम्र में डबल सेंचुरी लगाना मामूली बात नहीं है। इससे साबित होता है कि यूनुस जब तक चाहें खेल सकते हैं। बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को यूनुस से पूछना चाहिये कि वह अपना आख़िरी मैच कब खेलना चाहते हैं और उस मैच का जश्न मनाया जाना चाहिये।”
अज़हर ने कहा, “मुझे अच्छा नहीं लगता जब लोग यूनुस की बुराई करते हैं। उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट के लिए बहुत कुछ किया है और ख़ूब रन बनाए हैं।”
यूनुस ने अज़हर की सलाह क्यों मानी?
''एक्पर्ट मुझे रिटायर होने को कह रहे थे जबकि अज़हर ने मेरी तकनीक में ख़ामी की तरफ ध्यान खींचा। तो मुझे किसे सुनना चाहिये था?''
यूनुस ने कहा कि अज़हर एक महान बल्लेबाज़ रहे हैं और राहुल द्रविड़, अजय जडेजा और सचिन तेंदुलकर का करिअर संवारने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। “अज़हर के साथ मैंने शरजाह में एक मैच खेला था। मैं जब भी नमाज़ पढ़ने मस्जिद जाता था, अज़हर वहां दिखते थे। हम कम बोलते थे क्योंकि वह बहुत बड़े खिलाड़ी थे। मैं उनका मुरीद था और उनकी तरह का फ़ील्डर बनना चाहता था।”
यूनुस ने इंग्लैंड दौरे के पहले तीन टेस्ट में सिर्फ दो बार 30+ स्कोर किया लेकिन चौथे टेस्ट की पहली पारी में 218 रन बनाकर अपनी टीम की जीत की नींव रख दी। 38 साल के यूनुस ने सात घंटे की बैटिंग के दैरान 31 चौक्के और चार छक्के लगाए।
यूनुस ख़ान के फॉर्म को लेकर उनकी बहुत आलोचना हो रही थी। वह इंग्लैंड के फ़ास्ट और स्विंग विकेट पर उछलते नज़र आ रहे थे।
यूनुस ने कहा कि वह बहुत दबाव में थे और इसीलिए शुरु के गेम में उम्मीद के मुताबिक नहीं खेल पा रहे थे। लॉर्ड्स पर पहले टेस्ट का ज़िक्र करते हुए यूनुस ने कहा, “मैं पहली पारी में आउट हो गया जबकि मुझे लंबी पारी खेलनी चाहिये थी। मुझ पर देश के लिए खेलने का दबाव था। 30 के स्कोर को 50 में तब्दील करना चाहिये था।”
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