ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर और इंडियन प्रीमियर लीग में चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए चुके माइकल हसी महेंद्र सिंह धोनी को रिकी पोटिंग से बेहतर कप्तान मानते हैं। हसी का मानना है कि धोनी मैदान पर तकनीकी रूप से पोंटिंग से बेहतर हैं। माइकल हसी एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो सबसे अधिक पोटिंग और धोनी की कप्तानी में क्रिकेट खेले हैं। ऐसे में उन्होंने दोनों को करीब से समझा है और जाना है कि दोनों में क्या समानताएं और क्या अंतर है।
हसी पोंटिंग की कप्तानी में साल 2007 विश्व कप में ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा रह चुके हैं। इसके अलावा वह पोटिंग की कप्तानी में 2006 और 2009 के आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में भी ऑस्ट्रेलिया के लिए खेल चुके हैं।
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रौनक कपूर के साथ वीडियो चैट में हसी ने कहा, ''रिकी पोंटिंग एक बेहतरीन कप्तान रहे हैं। उनमें हर तरह से सिर्फ टीम को आगे रखने की भावना होती थी। वह सिर्फ जीतना चाहते थे। वह क्रिकेट के मैदान के बाहर ड्रेसिंग रूम में भी जब टेबल टेनिस खेलते थे वह सिर्फ जीतने के लिए खेलते थे। अगर आप फील्डिंग ड्रिल कर रहे हैं तो वह उसमें भी अगुआई करना चाहते थे। कुल मिलाकर कहें तो वह टीम के प्रदर्शन को हर संभव बेहतर से बेहतर बनाने पर जोर देते थे।''
हसी ने कहा पोंटिंग के मुकाबले धोनी बिल्कुल ही अगल तरह के कप्तान हैं और दोनों ने अपने अलग-अलग अंदाज में टीम और खिलाड़ियों पर अपना प्रभाव छोड़ा है।
हसी ने कहा, ''अगर टीम के पास प्रैक्टिस के लिए सबसे खराब नेट्स भी तो पोंटिंग सबसे पहले आगे आकर यह भरोसा दिलाते थे कि यह ठीक है। वह खराब हालात में भी टीम के लिए सबसे आगे खड़े रहते थे और साथ ही अपने टीम के खिलाड़ियों के साथ शत प्रतिशत विश्वास करते थे। धोनी के अंदर भी कप्तानी के ठीक ऐसा ही गुण है। यही कारण दोनों कि कप्तानी में कुछ हद तक समानताएं भी है।''
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धोनी की कप्तानी पर हसी ने कहा, ''एमएस बहुत ही शांत स्वभाव के कप्तान हैं। वह परिस्थियों को अच्छी तरह से परखना जानते हैं और वह उसी के आधार पर योजना बनाने में माहिर है। इस मामले में मैं कह सकता हूं कि वह पोंटिंग से कही बेहतर हैं।''
उन्होंने कहा, ''हालांकि पोंटिंग की रणनीति भी बेहतरीन थी लेकिन धोनी मैदान पर जिस तरह की कप्तानी करते हैं उससे मैं कुछ चीजों पर सोचने के लिए मजबूर हो जाता हूं कि वह ऐसा क्यों कर रहा है ? क्या उनकी यह योजना काम कर पाएगी ? उनके दिमाग में यह कैसे आया ? कहीं ना कहीं उन्हें खुद पर भरोसा होता है। यही कारण है कि दो अलग-अलग तरह के कप्तानों ने अपने ही अंदाज में क्रिकेट पर छाप छोड़ी है।
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