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क्रिकेट प्रेमियों के लिए बुरी ख़बर, तरस जाएंगे छक्के देखने के लिए, जानें क्यों

वनडे और टी20 अपनी लोकप्रियता के चरम पर है और इसकी ख़ास वजह है मैदान के ऊपर आसमान पर होने वाली छक्कों की बरसात। लेकिन अब ये मौसम बदलने जा रहा है।

Billy Bowden- India TV Hindi
Billy Bowden

लंदन: क्रिकेट खेल का एक वो भी दौर था जब ज़मीन से सटे शॉट पर चौक्का लगता देख दर्शक वाह वाह कर उठते थे। ये वही दौर है जब छक्के बमुश्किल देखने को मिलते थे क्योंकि खेल के जानकरों के मुताबिक गेंद का हवा में रहना तब तकनीकि रुप से ख़राब शॉट माना जाता है। वक़्त के साथ खेल बदला और क्लाइव लॉयड, विवियन रिचर्ड और भारत के सलीम दुर्रानी ने छक्के लगाकर दर्शकों का मनोरंजन करना शुरु किया। आज ये हालात हैं फटाफट क्रिकेट यानी वनडे और टी20 अपनी लोकप्रियता के चरम पर है और इसकी ख़ास वजह है मैदान के ऊपर आसमान पर होने वाली छक्कों की बरसात। लेकिन अब ये मौसम बदलने जा रहा है।

दरअसल ब्रिटेन में बसे एक भारतीय सर्जन ने क्रिकेट के बल्ले की डिजाइन पर शोध किया जिसका लक्ष्य गेंद और बल्ले के बीच संतुलन बनाना था और अब इस साल एक अक्तूबर से यह इस्तेमाल में लिया जायेगा। 

खेल चोटों के विशेषग्य आर्थोपीडिक सर्जन चिन्मय गुप्ते ने लंदन के इम्पीरिल कालेज की टीम की अगुवाई की जो क्रिकेट के बल्लों पर शोध कर रही थी। 

cricket bat

मेरिलबोन क्रिकेट क्लब इस शोध के नतीजे को लागू करने जा रहा है। गुप्ते ने कहा कि पिछले 30 साल में क्रिकेट में छक्कों की संख्या बढ गई है । बल्लों के डिज़ाइन ही इस तरह के हैं कि गेंद की बजाय बल्ले का दबदबा है। यह नया डिजाइन संतुलन लायेगा। 

नये नियम के तहत बल्ले के किनारे की मोटाई 40 मिलीमीटर से कम होगी और उसकी कुल गहराई 67 मिमी से ज़्यादा नहीं हो सकती। 

पुणे में जन्मे गुप्ते महाराष्ट्र के क्रिकेटर मधुकर शंकर के बेटे हैं और पेशेवर क्रिकेटर हैं जो मिडिलसेक्स और ग्लूसेस्टर के लिये खेल चुके हैं। 

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