माइकल जोर्डन के साथ स्कॉटी पिप्पेन थे , लियोनेल मेस्सी के साथ आंद्रेस इनिएस्ता और इसी तरह महेंद्र सिंह धोनी के साथ कैरियर के तमाम उतार चढाव के साथी रहे सुरेश रैना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के फैसले में भी उनका साथ दिया। अपने पसंदीदा कप्तान और मेंटर धोनी का अनुसरण करते हुए रैना ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की।
धोनी ने अपने इंस्टाग्राम पर अपने लाखों प्रशंसकों के लिए लिखा ‘अब मुझे रिटायर्ड समझा जाए’ जिसके कुछ ही मिनटों बाद रैना ने भी संन्यास की घोषणा कर दी। रैना ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘‘माही (महेंद्र सिंह धोनी) आपके साथ खेलना शानदार रहा। पूरे गर्व के साथ इस यात्रा में मैं आपका साथ देता हूं। धन्यवाद भारत। जय हिंद।’’
33 साल के रैना दुनिया के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने खेल के तीनों प्रारूपों में शतक जड़े हैं। उन्होंने 18 टेस्ट, 226 वनडे और 78 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने टेस्ट में 768, वनडे में 5615 और टी20 में 1605 रन बनाये। उन्होंने वनडे में 36 और टेस्ट तथा टी20 में 13-13 विकेट भी लिये।
रैना ने 2011 विश्व कप में भारत की खिताब जीत के दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नाबाद 34 रन की महत्वपूर्ण नाबाद पारी खेली थी हालांकि युवराज सिंह का ऑलराउंड प्रदर्शन ही लोगों के जेहन में रहा। सेमीफाइनल में उन्होंने नाबाद 36 रन बनाये लेकिन उस मैच में सभी को सचिन तेंदुलकर के 85 रन याद रहे।
अपने कैरियर में रैना अधिकतर सहायक की ही भूमिका में रहे। लखनऊ खेल कॉलेज के इस लड़के में जहां ग्रेग चैपल को प्रतिभा दिखी तो धोनी को पता था कि उसका इस्तेमाल कैसे करना है। उन्हें पता था कि उपमहाद्वीप में रैना जैसा आक्रामक खिलाड़ी उनके लिये ट्रंपकार्ड हो सकता है। चेन्नई सुपर किंग्स के लिये लगातार अच्छा खेलने से वह एक बेहतरीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर भी बने।
विश्व कप 2015 के बाद हालांकि उनके फॉर्म में गिरावट आई और 2017 में वह योयो टेस्ट पास नहीं कर सके। इंग्लैंड के खिलाफ 2018 में उन्होंने सीमित ओवरों की सीरीज खेली और लॉडर्स में 46 रन भी बनाये। उस मैच में उनके 63 गेंद में 46 और धोनी के 59 गेंद में 37 रन चर्चा का विषय रहे।
हमेशा धोनी के विश्वासपात्र रहे रैना को चेन्नई सुपर किंग्स के प्रशंसक ‘चिन्ना थाला ’ कहते हैं जबकि उनके लिये ‘थाला’ धोनी है।
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