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IND vs ENG: रोहित शर्मा और फिर सहवाग, ऐसा करते ही ऋषभ पंत मैनचेस्टर में रच देंगे इतिहास

ऋषभ पंत की निगाहें मैनचेस्टर में खेले जाने वाले चौथे टेस्ट मैच में बल्ले से कमाल करने पर लगी हैं। इस मैच में पंत के पास इतिहास रचने का मौका होगा।

Rishabh Pant - India TV Hindi
Image Source : GETTY ऋषभ पंत

Rishabh Pant: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट में मैदान पर उतरते ही पंत के पास टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए सबसे ज्यादा छक्के जड़ने वाले बल्लेबाज बनने का शानदार मौका होगा। फिलहाल पंत के नाम 46 टेस्ट मैचों की 81 पारियों में 88 छक्के दर्ज हैं। वह इस लिस्ट में भारत के सीमित ओवरों के कप्तान रोहित शर्मा के साथ बराबरी पर हैं, जिन्होंने भी टेस्ट क्रिकेट में 88 छक्के लगाए हैं।

रोहित के साथ बराबरी के बाद पंत का अगला निशाना होंगे भारत के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग, जिनके नाम टेस्ट क्रिकेट में कुल 91 छक्के दर्ज हैं। यानी कि अगर ऋषभ पंत मैनचेस्टर टेस्ट में कम से कम 4 छक्के लगा देते हैं, तो वह वीरू को पीछे छोड़कर भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे।

छोटे करियर में बड़ी उपलब्धि

यहां गौर करने वाली बात यह है कि पंत ने ये मुकाम केवल 46 टेस्ट मैचों में ही हासिल कर लिया है, जबकि रोहित और सहवाग ने ये आंकड़े कहीं ज्यादा मैचों में छुए थे। अगर पंत यह रिकॉर्ड अपने नाम करते हैं तो वह एक ऐसा कीर्तिमान बना लेंगे जिसे तोड़ना आने वाले कई सालों में भी किसी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होगा। टेस्ट क्रिकेट में छक्कों के इस आंकड़े तक इतनी जल्दी पहुंचना, और वो भी एक विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में, खुद में एक बड़ी उपलब्धि है।

टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा छक्के जड़ने वाले भारतीय बल्लेबाज

  • वीरेंद्र सहवाग - 91 (104 टेस्ट) 
  • ऋषभ पंत - 88 (46 टेस्ट)
  • रोहित शर्मा - 88 (67 टेस्ट)
  • एमएस धोनी - 78 (90 टेस्ट)
  • रवींद्र जडेजा - 74 (83 टेस्ट)

लॉर्ड्स टेस्ट की दूसरी पारी में हुए फेल

इसमें कोई शक नहीं है कि ऋषभ पंत की आक्रामक शैली और दबाव में खेलने की काबिलियत उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। खासकर विदेशी जमीन पर उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से कई बार भारत को संकट से बाहर निकाला है। हालांकि, लॉर्ड्स टेस्ट मैच की पहली पारी में 74 रन बनाने के बाद वह दूसरी पारी में बल्ले से कुछ खास नहीं कर सके। नतीजा ये हुआ कि रन बनाने का सारा दारोमदार रवींद्र जडेजा पर आ गया और उन्हें दूसरे छोर के किसी और बल्लेबाज का साथ नहीं मिल सका। 

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