भारत भले ही रियो ओलंपिक में गोल्ड मेडल न जीता पाया हो लेकिन 100 साल की एक भारतीय एथलीट ने सात समंदर पार अमेरिका में अपने 78 साल के बेटे को हराकर न सिर्फ गोल्ड मेडल जीता बल्कि भारत का नाम भी रौशन कर दिया। भारतीय धावक मान कौर ने सोमवार को अमेरिकन मास्टर्स गेम्स में अपने 78 साल के बेटे को हराकर अपनी एज कैटेगरी में ये कारनामा कर दिखाया।
मान कौर ने वैंकूवर शहर में तालियों की गडहड़ाहट के बीच ये प्रतियोगिता जीती। यहां तक कि उनके प्रतिद्वंदियों ने भी उनका लोहा माना जो 70-80 वर्ष की उम्र के बीच की थीं। उन्होंने 100 मीटर की इस रेस को एक मिनट 21 सेकंड में पूरा किया। इस प्रतियोगिता में मान कौर के 78 वर्षीय बेटे गुरुदेव सिंह भी हिस्सा ले रहे थे। मान कौर जैसे ही इवेंट में हिस्सा लेने आईं, वैसे ही वहां मौजूद लोग उनके लिए तालियां बजाने लगे। सभी उनकी एनर्जी और लड़ने की इच्छाशक्ति से प्रेरित हो रहे थे।
अमेरिकन मास्टर्स गेम्स विशेष तौर पर 30 वर्ष से अधिक उम्र वाले एथलीटों के लिए आयोजित किया जाता है।
1600 मीटर की रिले में 1984 ओलंपिक का सिल्वर मेडल अपने नाम करने वाली कारमेन क्रुक्स ने मान कौर की प्रतिभा की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मान हम सभी की प्रेरणस्त्रोत हैं। दुनियाभर के मास्टर्स खेलों में मान कौर अब तक 20 मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। विश्व मास्टर्स गेम्स हर 4 साल में आयोजित होते हैं।
मान कौर ने 93 वर्ष की उम्र से दौड़ना शुरू किया और इसके लिए उनके बेटे गुरुदेव सिंह ने उन्हें मनाया। उसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और बुजुर्ग महिलाओं के लिए मिसाल बनी हुई हैं।