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ओलंपिक चैम्पियन कैस्टर सेमेन्या आईएएएफ से हारी अपनी लड़ाई, अब कम करनी होगी टेस्टोस्टेरोन की मात्रा

सेमेन्या अभी 800 मीटर में मौजूदा ओलम्पिक, विश्व और राष्ट्रमंडल चैम्पियन हैं। कोर्ट ऑफ आर्बिटेशन ऑफ स्पोर्ट (सीएएस) ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

कैस्टर सेमेन्या- India TV Hindi
Image Source : GETTY IMAGE कैस्टर सेमेन्या, दक्षिण अफ़्रीकी एथलीट 

नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका की एथलीट कैस्टर सेमेन्या टेस्टोस्टेरोन मामले में अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ (आईएएएफ) के खिलाफ जारी अपनी कानूनी लड़ाई हार गई हैं।
इस फैसले का मतलब यह है कि अब अगर कैस्टर अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में हिस्सा लेना चाहती हैं तो उन्हें अपने शरीर में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कम करने के लिए दवाइयां लेनी होंगी।

सेमेन्या अभी 800 मीटर में मौजूदा ओलम्पिक, विश्व और राष्ट्रमंडल चैम्पियन हैं। कोर्ट ऑफ आर्बिटेशन ऑफ स्पोर्ट (सीएएस) ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

इस फैसले पर कैस्टर ने कहा, "कभी-कभी ऐसे मामलों को लेकर चुप रहना बेहतर होता है।"

कैस्टर की टीम में शामिल सीएएस के वैज्ञानिक रॉस टकर मानते हैं कि अगर सैमेन्या को अब 800 मीटर में दौड़ना है तो उन्हें अपनी रफ्तार सात सेकेंड कम करनी होगी।

बता दें कि कैस्टर सेमेन्या लंदन और रियो ओलम्पिक में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। जिसके बाद साल 2018 में अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ (आईएएएफ) ने अपने नियमों में बदलाव किया। इसमें कहा गया कि जिस भी महिला एथलीट में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा 5nmol/L से अधिक होगी। उसे महिलाओं की कैटेगरी में भाग लेने नहीं दिया जायेगा। 

इसके जवाब में कैस्टर के अंदर टेस्टोस्टेरोन की मात्रा 5nmol/L से लगभग तीन गुना अधिक है। इस तरह आईएएएफ ने उनके अन्तराष्ट्रीय स्तर में भाग लेने पर प्रतिबन्ध लगाया था। जिसके बाद उन्होंने अपना केस लड़ने की ठानी मगर उनके हाथ निराशा लगी। अब सेमेन्या तभी भाग सकेंगी जब वो दवाइयों के चलते अपने टेस्टोस्टेरोन की मात्र को कम करेंगी। हालाँकि सेमेन्या के जैसी कई एथलीट का मानना है की यह जन्मजात होता है और इसको कम करना काफी मुश्किल होता है।