रियो डी जनेरियो: लगातर दो हार के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम अपने अगले मुकाबले में गुरुवार को एक और मजबूत टीम अमेरिका के खिलाफ उतरेगी। जहां उसकी कोशिश पिछली हारों को भुला कर जीत की राह पर लौटने की होगी। जापान के खिलाफ ड्रॉ के साथ अभियान शुरू करने वाली भारतीय महिला टीम को इसके बाद ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करारी हार झेलनी पड़ी है।
रियो ओलंपिक 2016 में भारतीय टीम अपने बुरे प्रदर्शन को दोहराने के मूड में नहीं होगी, लेकिन उसके लिए परेशानी कम नहीं है और अगर उसने पिछली मैचों की गलतियों से नहीं सीखा तो एक और हार उससे दूर नहीं है। ब्रिटेन ने भारत को 3-0 से हराया तो आस्ट्रेलिया ने 6-1 से शर्मनाक मात दी। इन दोनों मैचों में एक बात समान थी, भारतीय टीम की खराब रक्षापंक्ति और गेंद अपने पास न रख पाना।
जिस मजबूत रक्षापंक्ति के दम पर इस टीम ने 36 साल बाद ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई किया था उसी ने पिछले दो मैचों में भारत को निराश किया है। वहीं, फॉरवर्ड खिलाड़ी भी विरोधियों के गोलपोस्ट तक पहुंचकर असफल होती रही हैं। ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया के खिलाफ को भारत विपक्षी डी में लगभग न के बराबर दिखाई दिया था। ऐसे में कोच नील हॉगुड की चिंता टीम में समन्वय के साथ-साथ सोच में बदलाव लाने की भी है।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय महिलाएं दूसरे क्वार्टर के बाद लड़ती नजर नहीं आईं। कप्तान सुशीला चानू और कोच को अमेरिका के खिलाफ जीत के लिए नजरिए को बदलने की भी जरूरत है। भारतीय टीम इस समय अंक तालिका में सबसे नीचे है और उसके क्वार्टर फाइनल में पहुंचने की उम्मीदें लगभग न के बराबर हैं। ऐसे में टीम अपने बाकी मैच जीत ओलम्पिक का संतोषजनक अंत जरूर करना चाहेगी।