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जैशा के आरोप पर AFI की सफ़ाई, कहा ख़ुद मना किया था एनर्जी ड्रिंक लेने से

नयी दिल्ली: एथलेटिक्स फ़ेडरेशन ऑफ इंडिया ने कहा है कि रियो ओलंपिक 2016 में भाग लेने गई मैराथन धावक ओपी जैशा के ये आरोप बिल्कुल बेबुनियाद हैं कि मैराथन के बाद उन्हें पीने का पानी

O.P. Jaisha- India TV Hindi
O.P. Jaisha

नयी दिल्ली: एथलेटिक्स फ़ेडरेशन ऑफ इंडिया ने कहा है कि रियो ओलंपिक 2016 में भाग लेने गई मैराथन धावक ओपी जैशा के ये आरोप बिल्कुल बेबुनियाद हैं कि मैराथन के बाद उन्हें पीने का पानी तक नहीं मिला और वह तीन घंटे तक बेहोश रहीं। फ़ेडरेशन ने अपनी सफ़ाई में कहा कि जैशा और उनके कोच ने ही रेस के बीच में एनर्जी ड्रिंक लेने वाले विकल्पों के लिए मना कर दिया था।

ग़ौरतलब है कि सोमवार को जैशा ने आरोप लगाया कि फ़ेडरेशन के अधिकारियों ने रेस के दौरान न तो एनर्जी ड्रिंक्स का इंतज़ाम किया था और न ही पानी का जिसकी वजह से वह रेस के बाद तीन घंटे तक बेहोश हो गईं थीं। उन्होंने कहा कि मैराथन में हर देश पानी का इंतज़ाम करके रखता है लेकिन केवल हमारा बोर्ड खाली था और क्या सोचकर पानी नहीं रखा।

जैशा से उनकी पसंदीदा ड्रिंक्स के बारे में पूछा गया था

जैशा के बयान को ख़ारिज करते हुए फ़ेडरेशन ने कहा कि जैशा के कोच ने ही कोई ड्रिंक लेने से मना कर दिया था। हर टीम को उसके बूथ पर ड्रिंक्स रखने की इजाज़त थी। प़ेडरेशन ने कहा कि भारतीय टीम का मैनेजर 16 ख़ाली बोतल लेकर उनके कमरे में गया था। इनमें से 8 जैशा और 8 कविता के लिए थीं। मैनेजर ने उनसे उनकी पसंदीदा ड्रिंक के बारे में पूछा भी ताकि उनकी मौजूदगी में ड्रिंक भरकर बोतलें सील की जा सकें लेकिन जैश और कविता ने मना कर दिया और टीम मैनेजर से कहा कि उन्हें पीने के लिए कुछ भी नहीं चाहिये। उन्होंने ये भी कहा ता कि अगर उन्हें एनर्जी ड्रिंक की ज़रुरत होगी तो वे आयोजकों के बनाए वॉटर बूथ से ले लेंगी।

फ़ेडरेशन ने आगे कहा कि पुरष मैराथन में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों ने एनर्जी ड्रिंक्स मांगी थीजो उन्हें दी गई थी। उसने कहा कि जैशा ने 2015 में पेइचिंग में हुई विश्व चैंपियनशिप में भी एनर्जी ड्रिंक्स लेने से मना किया था। उनके कोच का कहना था कि उन्हें एनर्जी ड्रिंक्स लेने की आदत नही है।

महिला मैराथन स्पर्धा में 89वें नंबर पर आईं जैशा ने आरोप लगाया है कि उन्हें सुबह गर्मी में 9 बजे से दौड़ना था। 8 कि.मी. दौड़ने के बाद उन्हें आयोजकों की तरफ से पानी मिला जो नाकाफी था। हर देश ने हर दो कि.मी. पर स्टॉल लगा रखा था लेकिन हमारा स्टॉल ख़ाली था।