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रियो ओलंपिक: निराश न हों, भारत ने यहां किया बेहतर

रियो डी जनेरियो: ब्राजील की मेजबानी में हुए 31वें ओलम्पिक खेलों में भारतीय दल का अभियान समाप्त हो चुका है और पिछले वर्ष के छह पदकों की तुलना में भारतीय दल इस बार सिर्फ दो

Dipa Karmakar, pv Sindhu, Sakshi Malik- India TV Hindi
Dipa Karmakar, pv Sindhu, Sakshi Malik

रियो डी जनेरियो: ब्राजील की मेजबानी में हुए 31वें ओलम्पिक खेलों में भारतीय दल का अभियान समाप्त हो चुका है और पिछले वर्ष के छह पदकों की तुलना में भारतीय दल इस बार सिर्फ दो पदक हासिल कर सका है।

भारतीय खेल प्रेमियों को अपने धुरंधरों से पहले से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी और कई क्षेत्रों में निश्चित पदकों की आशा जग चुकी थी, जिसमें कुश्ती, निशानेबाजी, हॉकी और बैडमिंटन शामिल हैं।

लेकिन जिस तरह रियो में एक के बाद एक भारत के धुरंधर फेल होते गए निश्चित तौर पर इससे भारतीय खेल प्रेमी निराश होंगे, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि भारत को हर ओर से निराशा ही हाथ लगी हो। कई ऐसे खेल रहे जिसमें भारत ने रियो में अपने पूर्व प्रदर्शन से बेहतर किया है।

PV Sindhu

बैडमिंटन : बैडमिंटन में भारत को महिला एकल वर्ग में पी. वी. सिंधु ने रजत पदक दिलाया जो बैडमिंटन में भारत का पहला ओलम्पिक रजत पदक है। इससे पहले बैडमिंटन में भारत का सर्वोच्च प्रदर्शन लंदन ओलम्पिक-2012 में सायना नेहवाल का कांस्य पदक था।

सिंधु ओलम्पिक में रजत पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी भी बनीं। सिंधु ने जैसा खेल दिखाया है उससे भविष्य में भारतीय खेल प्रेमियों की उम्मीद और बढ़ गई है।

Dipa Karmakar

जिम्नास्टिक्स : जिम्नास्टिक्स ऐसा खेल रहा है, जिसमें भारतीय खेल प्रेमी कम ही रूचि रखते हैं और इसे देश में खास लोकप्रियता भी हासिल नहीं है। लेकिन दीपा कर्माकर न सिर्फ 52 वर्षो के बाद ओलम्पिक में क्वालिफाई करने वाली भारत की पहली जिम्नास्ट बनीं बल्कि उन्होंने फाइनल तक का सफर भी तय किया।

दीपा महिलाओं की व्यक्तिगत वॉल्ट स्पर्धा के फाइनल में चौथे स्थान पर रहीं और मामूली अंकों के अंतर से पदक से चूक गईं। वह तीसरे स्थान पर रहीं कांस्य पदक विजेता स्विट्जरलैंड की स्टीग्रबर से मात्र 0.15 अंक पीछे रहीं।

निश्चित तौर पर हम भविष्य में ओलम्पिक में भारत से अधिक संख्या में जिम्नास्टों को खेलता देखेंगे।

Sakshi Malik

कुश्ती : कुश्ती में वैसे तो हम पदक के मामले में पीछे ही रह गए, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी महिला पहलवान ने देश के लिए पदक जीता हो। कुश्ती में हमारा पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन लंदन ओलम्पिक-2012 में रहा था, जहां सुशील कुमार ने रजत पदक हासिल किया था।

रियो में भारत कुश्ती में एकमात्र कांस्य पदक जीत सका है, लेकिन इस बार यह कांस्य पदक किसी पुरुष पहलवान ने नहीं बल्कि महिला पहलवान ने जीता है। साक्षी मलिक ने फ्रीस्टाइल स्पर्धा के 58 किलोग्राम भारवर्ग में यह कारनामा कर दिखाया।

निश्चित तौर पर साक्षी की यह उपलब्धि देश में और महिला पहलवानों को ओलम्पिक की तैयारियों के लिए प्रेरित करेगी।

Marathan

मैराथन : ओलम्पिक की एथलेटिक्स स्पर्धाओं में भारत का प्रदर्शन हमेशा ही कमजोर रहा है और मैराथन में तो अब तक भारत सिर्फ 10 बार हिस्सा ले सका है। भारत की ओर से इस बार रियो में पुरुषों की मैराथन स्पर्धा में सबसे बड़ा तीन धावकों का दल क्वालिफाई करने में सफल रहा।

रियो में पुरुषों की मैराथन स्पर्धा में भारत की ओर से गोपी थनकल, खेता राम और नितेंद्र सिंह रावत उतरे थे, जिनमें से गोपी और खेता राम ने क्रमश: 25वां और 26वां स्थान हासिल किया, जो 1976 के बाद ओलम्पिक में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। मैराथन में भारत का यह ओवरऑल तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

गौरतलब है कि 1980 से 2012 के बीच 32 वर्षो तक ओलम्पिक की मैराथन स्पर्धा में कोई भी भारतीय क्वालिफाई नहीं कर सका।

Dattu Bhokanal

रोइंग : रियो ओलम्पिक में रोइंग स्पर्धा में भारत की ओर से एकमात्र प्रतिभागी दत्तू बबन भोकानाल ने हिस्सा लिया। वह ओलम्पिक खेलों में भारत की ओर से खेलने वाले मात्र नौवें रोवर हैं।

दत्तू रियो में फाइनल में भी प्रवेश नहीं कर पाए, लेकिन विश्व रैंकिंग में 13 से 25वें स्थान के लिए हुई फाइनल-सी में उन्होंने शीर्ष स्थान हासिल किया अर्थात वह 13वीं विश्व वरीयता प्राप्त रोवर हो गए, जो रोइंग में भारत का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।