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रानी रामपाल, मज़दूर की बेटी से हॉकी की रानी बनने तक का सफ़र

नयी दिल्ली: भारतीय महिला हॉकी इतिहास में महिला हॉकी टीम ने  इस  बार कामयाबी का वो परचम फेरहया है जिसे देश सालो साल याद रखेगा।  महिला हॉकी टीम ने 36 साल बाद एक बार फिर

घोडा गाडी चलाकर अपनी जिंदगी की गुजर बसर चलाने वाले रानी  रामपाल के पिता  के अनुसार  रानी को पांचवीं क्लास से ही हॉकी खेलने का शोक  था। शोक महंगा था और पिता की कमाई बहुत कम, बावजूद इसके रानी के पिता ने अपना पेट काटकर बेटी को हॉकी खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।

इसका नतीजा आज उनके सामने है। रानी के पिता को ख़ुशी है कि उनकी बेटी की तपस्या रंग लायी और आज उसने देश के साथ साथ उनका नाम भी रोशन किया।

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