रियो डी जनेरियो: भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने रविवार को नरसिंह पंचम यादव के खिलाफ 'कथित साजिश' के मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच करवाने की मांग की है। गौरतलब है कि रियो ओलम्पिक से ठीक पहले नरसिंह के खिलाफ उठा डोपिंग का विवाद रियो ओलम्पिक में उनका अभियान शुरू होने के आखिरी घंटों तक चला और खेल पंचाट न्यायालय (सीएएस) द्वारा चार साल के प्रतिबंधित किए जाने के कारण वह रियो ओलम्पिक में हिस्सा नहीं ले सके।
रियो ओलम्पिक से ठीक पहले 25 जून को नरसिंह डोपिंग के दोषी पाए गए थे और उन पर भारत की राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन साजिश का शिकार पाए जाने के बाद नाडा ने उन्हें रियो के लिए क्लीन चिट दे दी थी। लेकिन ओलम्पिक खेलों के दौरान 16 अगस्त को विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने सीएएस में नाडा के फैसले को चुनौती दे दी। नरसिंह 19 अगस्त को पुरुषों की फ्रीस्टाइल स्पर्धा के 74 किलोग्राम भारवर्ग में फ्रांस के जेलिमखान खादजीव के खिलाफ क्वालिफिकेशन राउंड से अपने अभियान की शुरुआत करने वाले थे, लेकिन एक दिन पहले 18 अगस्त को सीएएस ने वाडा की याचिका को मंजूर करते हुए नरसिंह को डोपिंग का दोषी करार दिया और चार वर्ष का प्रतिबंध लगा दिया। डब्ल्यूएफआई की ओर से रविवार को जारी वक्तव्य में खेल संघ के अध्यक्ष ने कहा, "मैं इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करता हूं, ताकि भविष्य में फिर ऐसा न हो सके। मेरा मानना है कि वाडा द्वारा नाडा के फैसले के खिलाफ की गई अपील का समय संदेह के घेरे में है।"
बृजभूषण ने ओलम्पिक में नरसिंह का मुकाबला शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले सीएएस द्वारा सुनवाई शुरू करने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "सीएएस का नोटिस हमें ऐसे समय में मिला कि नरसिंह सुनवाई के दौरान न तो अपने लिए वकील की व्यवस्था कर सकते थे और न ही हमारे पास इस भारवर्ग में स्थानापन्न खिलाड़ी को उतारने का मौका था।" डब्ल्यूएफआई ने रियो ओलम्पिक में कुश्ती स्पर्धाओं की देखरेख करने वाली सर्वोच्च संस्था युनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) को भी एक अगस्त को ही नरसिंह को क्लीन चिट दिए जाने के नाडा के फैसले से अवगत करा दिया था, जिसके बाद नरसिंह को दोबारा भारतीय ओलम्पिक दल में शामिल कर लिया गया। यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने तीन अगस्त को नरसिंह को रियो ओलम्पिक में हिस्सा लेने की इजाजत दे दी थी।