इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि धार्मिक आस्था के अनुसार अंतिम संस्कार करने के हक समेत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, एक समुदाय को कब्रिस्तान बनाने के लिए स्थानीय निकाय की जमीन पर दावा करने का हकदार नहीं बनाता है। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से दायर रिट याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी ने खटखटाया HC का दरवाजा
क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी ने गाजियाबाद में एक ऊसर जमीन के एक टुकड़े को कब्रिस्तान में तब्दील करने के उसकी अपील को ठुकराए जाने को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सोमवार को अपने फैसले में कहा, 'ग्राम सभा या स्थानीय निकाय की भूमि को एक कब्रिस्तान में तब्दील करने के लिए एक कार्यकारी निर्णय जरूरी है जिसमें तमाम कारकों और आकस्मिक स्थितियों पर विचार करना होता है।'
जिला मजिस्ट्रेट ठुकरा चुके हैं जमीन की प्रकृति की मांग बदलने की मांग
हाईकोर्ट ने कहा, 'किसी खास गैर सार्वजनिक उपयोग वाली जमीन को सार्वजनिक इस्तेमाल वाली भूमि में बदलने की मांग करने का कोई ऐसा अधिकार किसी के पास नहीं है जिसे कोर्ट में लागू कराया जा सके।' गाजियाबाद के मोदी नगर की क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी ने गाजियाबाद के जिला मजिस्ट्रेट के 7 जनवरी, 2026 के ऑर्डर पर सवाल खड़ा किया था जिसमें जिला मजिस्ट्रेट ने मोदी नगर तहसील के गांव विसोखर में स्थित 0.3420 हेक्टेयर जमीन की प्रकृति बदलकर उसे ईसाई कब्रिस्तान करने का प्रपोजल ठुकरा दिया था।
जमीन की कमी होती तो बात अलग थी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर वास्तव में जमीन की कमी हो तो यह एक अलग बात होगी। ऐसे में अधिकारी उस क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार के अनुरोध पर विचार कर सकते हैं। Societies Registration Act, 1860 के तहत रजिस्टर्ड इस सोसाइटी ने अपने अध्यक्ष विनय कुमार पॉल के माध्यम से हाईकोर्ट से संपर्क किया था।
क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी ने की दलील
क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी ने दलील दी थी कि आसपास के इलाकों में रहने वाले ईसाई लोगों को अंतिम संस्कार करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बेगमाबाद बुढ़ाना में ईसाई समुदाय के लिए मौजूद कब्रिस्तान में जगह कम पड़ रही है। इससे पहले, ओल्ड पेंशन स्कीम पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के रिटायर्ड कर्मचारियों को बड़ी राहत देने का फैसला किया था।
(इनपुट- भाषा)
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