अमरोहा में 5 बार के विधायक महबूब अली के किले को कैसे भेदेगी BJP? समझिए UP चुनाव 2027 का सियासी समीकरण
Amroha Assembly Seat पर BJP के सामने सीट वापस लेने की चुनौती है और ऐसा 5 बार के विधायक महबूब अली के दबदबे को खत्म किए बिना मुमकिन नहीं है। इस आर्टिकल में समझिए कि UP चुनाव 2027 में अमरोहा सीट पर क्या सियासी समीकरण बनने वाला है।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले की Amroha Assembly Seat वेस्टर्न यूपी की हॉट सीटों में से एक है। अमरोहा में समाजवादी पार्टी के महबूब अली का दबदबा है। महबूब अली, अमरोहा विधानसभा सीट से लगातार 5 बार के विधायक हैं। अमरोहा विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल है। अमरोहा विधानसभा सीट, बीजेपी ने आखिरी बार 30 साल पहले 1996 में आखिरी बार जीती थी। इतना ही नहीं पिछला 2022 का चुनाव बीजेपी अमरोहा विधानसभा में सपा के महबूब अली से 71 हजार 36 वोटों के भारी अंतर से हारी थी। कुल मिलाकर अमरोहा सीट पिछले 5 बार से मौजूदा विधायक महबूब अली के लिए अभेद्य किला बनी हुई है। जबकि बीएसपी, कांग्रेस और RLD को पिछले 3 दशकों में एक बार भी अमरोहा में जीत नसीब नहीं हुई है। अमरोहा विधानसभा सीट का नंबर 41 है। यह अमरोहा लोकसभा सीट का हिस्सा है। आइए पिछले 3 दशकों के चुनावी इतिहास से समझते हैं कि यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में अमरोहा में क्या सियासी समीकरण रहने वाले हैं।
अयोध्या में गोलीकांड के बाद BJP के प्रताप सिंह ने जीती अमरोहा सीट
बात करें 1991 के विधानसभा चुनाव की तो तब अमरोहा सीट पर बीजेपी के प्रताप सिंह के सामने थे जनता दल के प्रत्याशी और मौजूदा विधायक मोहम्मद हयात। यह चुनाव अयोध्या में गोलीकांड के बाद हुआ था। प्रताप सिंह ने 44 हजार 923 वोट पाकर जनता दल के मोहम्मद हयात को 14 हजार 716 से हरा दिया था। मोहम्मद हयात 30 हजार 207 वोट ही हासिल कर पाए। वहीं, जनता पार्टी के अफसर खान 17 हजार 751 वोटों पर सिमट गए थे। यहां समर पाल सिंह के रूप में कांग्रेस ने भी उम्मीदवार उतारा था जो 13 हजार 249 वोट पा सके थे। बीएसपी इस चुनाव में 5वें नंबर पर रही थी। उसके कैंडिडेट कमरुद्दीन 8 हजार 592 वोट ही हासिल कर पाए थे।
मोहम्मद हयात ने फिर छीन ली अमरोहा सीट
अमरोहा का 1993 का चुनाव आया तो बाजी पलट गई। यह चुनाव अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद हुआ था। जनता दल के हाजी मोहम्मद हयात ने 52 हजार 175 वोट लेकर करीबी मुकाबले में बीजेपी के मंगल सिंह सैनी को 2 हजार 596 वोटों से मात दी थी। मंगल सिंह सैनी 49 हजार 579 वोट ही पा सके थे। इसके साथ ही जनता दल ने बीजेपी से अमरोहा सीट छीन ली थी। इस चुनाव में सपा और कांग्रेस क्रमशः तीसरे व चौथे नंबर पर रहे थे। सपा के इशरत अली को 16 हजार 392 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के खुर्शीद अहमद 11 हजार 306 वोटों पर सिमट गए थे।
1996 में महज 908 वोटों से जीते BJP के मंगल सिंह
अमरोहा विधानसभा के 1996 के चुनाव में बीजेपी ने फिर वापसी की। इस चुनाव में बीजेपी के मंगल सिंह महज 908 वोटों के अंतर से बाजी जीत गए थे। मंगल सिंह को 67 हजार 526 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के महबूब अली 66 हजार 618 वोट ही हासिल कर सके थे। इस चुनाव में कांग्रेस के खुर्शीद अहमद भी चुनावी मैदान में थे। उन्हें 29 हजार 553 वोट ही मिल पाए थे।
2002 में महबूब अली ने अमरोहा सीट पर हासिल की पहली जीत
इस चुनाव में सपा को छोड़कर महबूब अली ने डीपी यादव की पार्टी राष्ट्रीय परिवर्तन दल यानी RPD का दामन थाम लिया था। इसके बावजूद अमरोहा का नतीजा नहीं बदला था। महबूब अली ने 9 हजार 272 वोटों के अंतर से RLD के डॉ. हरि सिंह ढिल्लों को पटखनी दे दी थी। 2002 के चुनाव में RLD और बीजेपी का गठबंधन था, इसलिए बीजेपी ने यहां उम्मीदवार नहीं उतारा था। 2002 के अमरोहा विधानसभा चुनाव में RPD के महबूब अली को 59 हजार 314 वोट मिले थे, जबकि डॉ. हरि सिंह ढिल्लों 50 हजार 42 वोट ही हासिल कर पाए थे। बीएसपी, सपा और कांग्रेस क्रमशः अमरोहा में तीसरे, चौथे और पांचवें नंबर पर रही थी। बीएसपी के खुर्शीद अनवर को 13 हजार 507 वोट, सपा के हाजी मोहम्मद हयात को 7 हजार 573 वोट और कांग्रेस के खुर्शीद अहमद अंसारी को 4 हजार 563 वोट मिले थे।
| वर्ष | विजेता | पार्टी | वोट | रनर-अप | पार्टी | वोट | अंतर |
| 1991 | प्रताप सिंह | BJP | 44,923 | मोहम्मद हयात | JD | 30,207 | 14,716 |
| 1993 | हाजी मोहम्मद हयात | JD | 52,175 | मंगल सिंह सैनी | BJP | 49,579 | 2,596 |
| 1996 | मंगल सिंह | BJP | 67,526 | महबूब अली | SP | 66,618 | 908 |
| 2002 | महबूब अली | RPD | 59,314 | डॉ. हरि सिंह ढिल्लों | RLD | 50,042 | 9,272 |
| 2007 | महबूब अली | SP | 42,115 | मंगल सिंह | BJP | 41,437 | 678 |
| 2012 | महबूब अली | SP | 60,807 | राम सिंह | BJP | 39,002 | 21,805 |
| 2017 | महबूब अली | SP | 74,713 | नौशाद अली | BSP | 59,671 | 15,042 |
| 2022 | महबूब अली | SP | 1,28,735 | राम सिंह | BJP | 57,699 | 71,036 |
(सोर्स- Election Commission Of India)
BSP की लहर में महज 678 वोटों से सीट बचा ले गए महबूब अली
विधानसभा चुनाव 2007 की बात करें तो ये वो इलेक्शन था जब यूपी की जनता ने मायावती की पार्टी बीएसपी को पहली बार पूर्ण बहुमत दे दिया था। लेकिन अमरोहा में बीएसपी पिछले चुनाव के मुकाबले तीसरे से चौथे नंबर पर खिसक गई थी। महबूब अली इस बार सपा के टिकट पर मैदान में थे और उनके सामने फिर से थे बीजेपी के मंगल सिंह। इस चुनाव में महबूब अली ने महज 678 वोटों के अंतर से बीजेपी प्रत्याशी को मात दे दी। दिलचस्प बात ये है कि यह 1991 से 2022 तक हुए सभी विधानसभा चुनावों में अमरोहा का सबसे करीबी मुकाबला था।
महबूब अली ने 42 हजार 115 वोट पाए, जबकि मंगल सिंह की पारी 41 हजार 437 वोटों पर ही सिमट गई। इस चुनाव में RLD प्रत्याशी नदीम अब्बास 17 हजार 251 वोट पाकर तीसरे और BSP के आदिल परवेज 16 हजार 639 वोट पाकर चौथे नंबर पर रहे थे। खुर्शीद अनवर इस बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे और उन्हें महज 6 हजार 3 वोट हासिल हुए थे।
2012 के चुनाव में महबूब अली ने लगाई जीत की हैट्रिक
2008 में परिसीमन के बाद हुआ 2012 का अमरोहा विधानसभा चुनाव सपा के महबूब अली के लिए जीतना आसान था। ऐसा इसलिए था क्योंकि पूरे प्रदेश की जनता ने भी सपा को पहली बार अपने दम पर सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत दे दिया था। महबूब अली ने यह चुनाव 21 हजार 805 वोटों के बड़े अंतर से जीता था। महबूब अली को 60 हजार 807 वोट मिले थे और बीजेपी के राम सिंह 39 हजार 2 वोटों पर सिमट गए थे। इस चुनाव में बीएसपी के शाहिद 32 हजार 886 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे। वहीं, PECP के नौशाद अली को 24 हजार 768 वोट मिले थे। इसके साथ ही महबूब अली ने 2012 के चुनाव में विजय हासिल करके जीत की हैट्रिक लगा दी थी।
2017 में लगातार चौथी बार अमरोहा सीट जीते महबूब अली
अमरोहा विधानसभा के 2017 के चुनाव में महबूब अली ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। यूपी में बीजेपी की प्रचंड लहर के बावजूद सपा के महबूब अली ने 15 हजार 42 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। महबूब अली को 74 हजार 713 वोट मिले थे और बीएसपी के नौशाद अली 59 हजार 671 वोट हासिल कर पाए थे। दिलचस्प बात यह थी कि 2017 के चुनाव में बीजेपी अमरोहा में तीसरे नंबर पर रही थी। उसके उम्मीदवार डॉ. कुंवर सेन सैनी को 45 हजार 420 वोट मिले थे। वहीं, RLD के सलीम खान 14 हजार 132 वोट ही हासिल कर सके थे।
लगातार 5वीं बार जीतकर महबूब अली ने 2022 में बनाया रिकॉर्ड
सपा के महबूब अली ने अमरोहा विधानसभा के 2022 के चुनाव में लगातार 5वीं बार जीत दर्ज करके रिकॉर्ड बना दिया। महबूब अली ने 2022 में अपने सियासी करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। महबूब अली ने 1 लाख 28 हजार 735 वोट पाकर बीजेपी के राम सिंह को 71 हजार 36 वोटों के भारी अंतर से मात दे दी। राम सिंह 57 हजार 699 मत ही हासिल कर पाए थे। इस चुनाव में बीएसपी कैंडिडेट मोहम्मद नवाज तीसरे नंबर पर रहे थे और उन्हें 34 हजार 585 वोटों से संतोष करना पड़ा था।
अमरोहा में विधानसभा 2027 का सियासी समीकरण
1991 से लेकर 2022 तक हुए चुनावों की बात करें तो यहां पिछले 8 आम विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 4, बीजेपी ने 2, जनता दल ने 1 और राष्ट्रीय परिवर्तन दल ने 1 बार चुनाव जीता है। इस दौरान, बीएसपी और कांग्रेस के प्रत्याशी कभी भी अमरोहा सीट पर विजेता नहीं बन पाए। व्यक्तिगत रूप से महबूब अली का प्रदर्शन शानदार रहा। महबूब अली 1996 में रनर-अप रहे और फिर उन्होंने लगातार 5 बार 2002, 2007, 2012, 2017 और 2022 में अमरोहा सीट पर कब्जा जमाया। महबूब अली ने पहली जीत RPD के टिकट पर हासिल की। इसके बाद लगातार चार बार सपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर विधायक बने। 2007 में तो महज 678 वोटों के बेहद करीबी अंतर से महबूब अली ने जीत दर्ज कर ली थी। वहीं, पिछले चुनाव यानी 2022 के चुनाव में महबूब अली ने अपनी सबसे बड़ी जीत 71 हजार 36 वोटों से हासिल की।
2027 के अमरोहा विधानसभा चुनाव के समीकरण की बात करें तो इस सीट को सपा का गढ़ कहा जा सकता है। अमरोहा विधानसभा की डेमोग्राफी भी सपा विधायक महबूब अली का साथ देती है। जनगणना की 2011 के अनुसार, यहां 50 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। इसके अलावा, SC वर्ग के मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं। बीजेपी के लिए अमरोहा में सपा का किला भेद पाना आसान नहीं होगा। 2002 में जब बीजेपी का RLD के साथ गठबंधन था तब बीजेपी ने सीट शेयरिंग में यह सीट RLD को दी थी। देखना होगा कि क्या 2027 में भी बीजेपी ऐसा ही करेगी। वहीं, दूसरे पाले में इस बार सपा और कांग्रेस का गठबंधन चुनौती देता हुआ दिख सकता है। साथ ही, बीएसपी के उम्मीदवार पर भी नजर रहेगी क्योंकि 2017 के चुनाव में बीएसपी के नौशाद अली यहां 59 हजार 671 वोटों के साथ रनर-अप रहे थे।
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