1. Hindi News
  2. उत्तर प्रदेश
  3. 'सपने में बुलाते हैं भाई... मैं भी चला जाऊंगा', 6 महीने में 3 भाइयों की मौत, शाम 7 बजे बंद हो जाते हैं घर के दरवाजे

'सपने में बुलाते हैं भाई... मैं भी चला जाऊंगा', 6 महीने में 3 भाइयों की मौत, शाम 7 बजे बंद हो जाते हैं घर के दरवाजे

एक ही परिवार के 3 भाइयों की आत्महत्या 6 महीने के अंदर हुई है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी है। पीड़ित परिजनों ने घर में झाड़-फूंक कराई। मृतक भाइयों को डॉक्टर को भी दिखाया था।

6 महीने में 3 भाइयों की मौत- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT 6 महीने में 3 भाइयों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक ही परिवार के तीन सगे भाइयों की छह महीने के भीतर एक-एक कर आत्महत्या की है। इन मौतों के पीछे की परिस्थितियों ने पूरे इलाके में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कानपुर के वाजिदपुर में स्थित इस घर को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कोई इसे भूत-प्रेत से जोड़कर देख रहा है तो कोई समझ नहीं पा रहा कि आखिर एक ही परिवार के तीन भाइयों के साथ ऐसा क्या हुआ कि तीनों ने अपनी जान दे दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परिजनों और पड़ोसियों के मुताबिक, कथित तौर पर तीनों में से 2 भाइयों ने मरने से पहले अपने मृत भाइयों के सपने में बुलाने की बात कही थी। हालांकि, इन घटनाओं के पीछे की वास्तविक वजह अब भी स्पष्ट नहीं है।

तीन भाइयों की मौत के बाद परिवार के साथ-साथ आसपास के लोग भी दहशत में हैं। पड़ोसियों का कहना है कि अब शाम होते ही घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं। अगर कोई बाहर से कुंडी खटखटा दे तो भी मन में डर बैठ जाता है। दिन का उजाला होने पर लोग राम शंकर के घर के बाहर बने चबूतरे पर बैठते हैं और इसी घटना की चर्चा करते रहते हैं।

भाई सपने में बुलाते हैं, मैं भी चला जाऊंगा

स्थानीय लोगों के मुताबिक, राम शंकर के सबसे बड़े बेटे विकास निषाद की मौत 10 जुलाई को हुई थी। बताया गया कि विकास ने घर की दूसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले उसके दोनों छोटे भाइयों की भी जान जा चुकी थी। विकास अपनी बहन और पड़ोसियों से कथित तौर पर कहता था कि उसके दोनों मृत भाई सपने में आकर उसे अपने पास बुलाते हैं। वह यह भी कहता था कि घरवाले उसका इलाज करा लें या कुछ भी कर लें, लेकिन वह अपने भाइयों के पास चला जाएगा, विकास की इन बातों ने आसपास के लोगों को भी चिंता में डाल दिया था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि वह बार-बार ऐसी बातें क्यों कर रहा है। परिजन उसकी हालत को लेकर परेशान थे और उसे संभालने की कोशिश कर रहे थे। इसके बावजूद आखिरकार विकास की भी मौत हो गई।

पहले दो छोटे भाइयों की गई थी जान

इस परिवार में मौतों का सिलसिला विकास से पहले शुरू हुआ था। जानकारी के मुताबिक, राम शंकर के छोटे बेटे गोविंद ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जबकि दूसरे बेटे अमन ने पहली मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। इन दोनों घटनाओं के बीच भी परिवार को ऐसे हालात का सामना करना पड़ा, जिनकी वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। बताया जाता है कि गोविंद भी सपने में भूत दिखाई देने की बात कहता था। गोविंद की मौत के बाद अमन ने घरवालों से कहा था कि उसका भाई गोविंद उसे अपने पास बुला रहा है। परिवार के लिए यह बात बेहद परेशान करने वाली थी। कुछ समय बाद अमन ने भी आत्महत्या कर ली। इसके बाद सबसे बड़े भाई विकास की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया।

झाड़-फूंक भी कराई, डॉक्टर को भी दिखाया

पड़ोसियों के मुताबिक, भाइयों की परेशानी सामने आने पर परिवार ने उन्हें संभालने के लिए कई प्रयास किए। उनकी बातों को गंभीरता से लेते हुए झाड़-फूंक भी कराई गई और डॉक्टर को भी दिखाया गया। परिवार को उम्मीद थी कि हालात सामान्य हो जाएंगे, लेकिन छह महीने के भीतर तीनों भाइयों की मौत ने सभी को झकझोर दिया। इलाके में लोग अब भी यही सवाल कर रहे हैं कि आखिर तीनों भाइयों के साथ ऐसा क्या हुआ था। क्या वे किसी मानसिक परेशानी से गुजर रहे थे, क्या उनके व्यवहार में बदलाव के पीछे कोई दूसरी वजह थी या परिवार को समय रहते ऐसी कोई गंभीर समस्या समझ नहीं आ सकी? इन सवालों के जवाब तथ्यों और जांच के आधार पर ही सामने आ सकते हैं। केवल सपनों में मृत भाइयों के बुलाने की बात से किसी अलौकिक कारण की पुष्टि नहीं होती।

शाम सात बजे ही बंद कर लेते हैं दरवाजा

घटना के बाद वाजिदपुर में लोगों के बीच भय और बेचैनी का माहौल है। घर के बाहर बैठे पड़ोसियों ने बताया कि पहले लोग देर शाम तक अपने घरों के बाहर बैठते और सामान्य दिनचर्या में व्यस्त रहते थे, लेकिन अब माहौल बदल गया है। कुछ लोगों का कहना है कि वे शाम सात बजे ही दरवाजे बंद कर लेते हैं। किसी के कुंडी खटखटाने पर भी डर लगने लगता है। पड़ोसियों के मुताबिक, विकास उनसे भी अपने भाइयों के सपने में बुलाने की बात कहता था। वे उसे समझाते थे और इलाज कराने की बात भी सुनते थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि मामला इस हद तक पहुंच जाएगा।

एक ही घर में छह महीने के भीतर तीन भाइयों की मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। भूत-प्रेत की चर्चाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीनों की आत्महत्या के पीछे की असल वजह क्या थी। परिवार के इस दर्दनाक घटनाक्रम की सच्चाई सामने आना जरूरी है, ताकि अटकलों के बजाय तथ्यों के आधार पर घटना को समझा जा सके।

अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट

ये भी पढ़ें: 

यूपी के पीलीभीत में रामलीला मेले में अंधाधुंध फायरिंग, तीन लोगों की मौत से मचा हड़कंप