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कानपुर में फंसा ‘एडॉप्टेड’ लाइसेंस का पेंच, ओवरस्पीडिंग कार रोकने पर खुला दिव्यांग ड्राइवर के DL का राज

कानपुर में ट्रैफिक पुलिस ने तेज रफ्तार कार को रोका, तो पता चला कि ड्राइवर का बायां हाथ कोहनी के नीचे से नहीं है। इसके बावजूद वह गियर वाली कार चला रहा था। साथ ही कार के शीशों पर काली फिल्म भी लगी हुई थी।

Kanpur DL- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT कानपुर में DL को लेकर फंसा पेंच

उत्तर प्रदेश में कानपुर के जीटी रोड पर तेज रफ्तार कार चलाने के मामले में यातायात पुलिस ने विकास यादव को रोककर कार्रवाई की। जांच के दौरान उनके ड्राइविंग लाइसेंस की कैटेगरी को लेकर सवाल उठे। विकास के बाएं हाथ में कोहनी के नीचे का हिस्सा नहीं है और उनका लाइसेंस एडॉप्टेड व्हीकल कैटेगरी का है। पुलिस का कहना है कि वह इस लाइसेंस के आधार पर गियर वाली कार चलाने के पात्र नहीं थे। पुलिस ने खतरनाक तरीके से वाहन चलाने और कार के शीशों पर काली फिल्म लगाने के आरोप में चालान किया है। साथ ही, लाइसेंस निलंबित करने के लिए आरटीओ को पत्र भेजा है।

वहीं, कानपुर आरटीओ में वर्ष 2022 में आरआई रहे अजीत सिंह का कहना है कि विकास का ड्राइविंग लाइसेंस निर्धारित मानकों के अनुसार जारी किया गया था। उनके मुताबिक, सवाल लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया का नहीं, बल्कि उसके आधार पर गियर वाली कार चलाने की पात्रता का है। ऐसे में मामले में पुलिस की आपत्ति और आरटीओ के पूर्व अधिकारी के पक्ष के बीच स्थिति स्पष्ट करने के लिए लाइसेंस की श्रेणी और उस पर दर्ज शर्तों की जांच अहम होगी।

ओवरस्पीडिंग पर रोका, लाइसेंस की श्रेणी सामने आई

घटना कल्याणपुर में जीटी रोड पर यातायात पुलिस की चेकिंग के दौरान हुई। पुलिस के मुताबिक, चेकिंग के दौरान तेज रफ्तार से जा रही एक कार को बैरिकेडिंग लगाकर रोका गया। कार के शीशों पर काली फिल्म भी लगी थी। चालक ने बातचीत के लिए खिड़की का शीशा नीचे किया तो पुलिसकर्मियों ने देखा कि उसके बाएं हाथ में कोहनी के नीचे का हिस्सा नहीं है। पूछताछ में चालक ने अपना नाम विकास यादव बताया। पुलिसकर्मियों ने उसके ड्राइविंग लाइसेंस की जांच की तो वह ‘एडॉप्टेड व्हीकल’ श्रेणी का मिला। इसके बाद संबंधित लाइसेंस के आधार पर गियर वाली कार चलाने की पात्रता को लेकर सवाल उठे।

पुलिसकर्मियों ने विकास से पूछा कि वर्ष 2001 में हाथ कटने के बाद वर्ष 2022 में उसका ड्राइविंग लाइसेंस कैसे बना। इस पर विकास ने बताया कि उसके पास ऑटोमैटिक कार भी है और उसने उसी आधार पर लाइसेंस बनवाया था। उसने कहा कि ऑटोमैटिक कार में क्लच नहीं होता। विकास के मुताबिक, कार की आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस दोनों उसके नाम पर हैं।

पुलिस ने दो मामलों में किया चालान, आरटीओ को भेजा पत्र

यातायात पुलिस ने चालक के खिलाफ खतरनाक तरीके से वाहन चलाने और कार के शीशों पर काली फिल्म लगाने के आरोप में अलग-अलग चालान किए। डीसीपी ट्रैफिक अभय नाथ त्रिपाठी ने बताया कि खतरनाक तरीके से वाहन चलाने के आरोप में कार्रवाई की गई है। मामले की जानकारी आरटीओ को दे दी गई है। उनके मुताबिक, आरटीओ लाइसेंस निलंबित करने पर निर्णय ले सकता है। पुलिस का कहना है कि चालक संबंधित गियर वाली कार चलाने के लिए पात्र नहीं था। हालांकि, लाइसेंस की वास्तविक श्रेणी और उस पर दर्ज शर्तों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित वाहन चलाने की अनुमति थी या नहीं।

पूर्व आरआई बोले- मानकों के अनुसार जारी हुआ था लाइसेंस

कानपुर आरटीओ में वर्ष 2022 में आरआई रहे अजीत सिंह ने बताया कि विकास का ड्राइविंग लाइसेंस ‘एडॉप्टेड’ श्रेणी में निर्धारित मानकों के अनुसार बनाया गया था। उनके मुताबिक, गलती का सवाल गियर वाली कार चलाने से जुड़ा है। उन्होंने लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में आरटीओ की गलती होने से इनकार किया। इस मामले में पुलिस और आरटीओ के पूर्व अधिकारी की राय अलग-अलग पहलुओं पर केंद्रित है। पुलिस लाइसेंस के आधार पर वाहन चलाने की पात्रता पर सवाल उठा रही है, जबकि पूर्व आरआई का कहना है कि लाइसेंस तय मानकों के अनुसार जारी हुआ था। अब आरटीओ के रिकॉर्ड और लाइसेंस की शर्तों की जांच से मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

क्या होता है एडॉप्टेड व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस?

‘एडॉप्टेड व्हीकल’ श्रेणी का लाइसेंस ऐसे वाहनों के लिए जारी किया जा सकता है, जिन्हें चालक की शारीरिक जरूरतों के अनुरूप बदलाव या सहायक उपकरणों से तैयार किया गया हो। इसका उद्देश्य संबंधित व्यक्ति को उसकी क्षमता और जरूरत के अनुसार वाहन चलाने की सुविधा देना है, उदाहरण के तौर पर, वाहन में जरूरत के मुताबिक नियंत्रण प्रणाली या अन्य सहायक उपकरण लगाए जा सकते हैं। लेकिन इस श्रेणी का लाइसेंस होने मात्र से हर प्रकार का वाहन चलाने की स्वतः अनुमति नहीं मिल जाती। संबंधित वाहन की श्रेणी, लाइसेंस पर दर्ज शर्तें और चालक की वाहन नियंत्रित करने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है।

किसी व्यक्ति का एक हाथ न होना अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि वह गियर वाली कार चलाने के लिए अयोग्य है। इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि विकास यादव के लाइसेंस में किस प्रकार के वाहन की अनुमति दर्ज है और जिस कार को पुलिस ने रोका, वह उस श्रेणी के अंतर्गत आती है या नहीं। इसका स्पष्ट जवाब आरटीओ के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आएगा।

कानपुर से संवाददाता अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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