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राज्यसभा टिकट नहीं मिला तो BJP को 'टाटा-बाय-बाय'! पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप की पोस्ट से हलचल

बरेली के पूर्व बीजेपी सांसद धर्मेंद्र कश्यप की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। बीजेपी की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद कश्यप ने फेसबुक पर 'टाटा-बाय-बाय' लिखा।

Dharmendra kashyap- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT धर्मेंद्र कश्यप, बीजेपी के पूर्व सांसद

बरेली: भारतीय जनता पार्टी द्वारा राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी करते ही बरेली के पूर्व बीजेपी सांसद धर्मेंद्र कश्यप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी पारे को चढ़ा दिया है। पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने अपने फेसबुक अकाउंट पर "टाटा बाय-बाय" लिखा, जिसके वायरल होते ही राजनीतिक जगत में हलचल मच गई। ​यह मैसेज सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर उनके आवास तक कुछ समर्थक और कार्यकर्त्ता पहुंचे । उनके फोन लगातार बजने लगे और लोग यह जानकर हैरान रह गए कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो उन्हें इस तरह का कदम उठाना पड़ा।

राज्यसभा के उम्मीदवारों की लिस्ट में नाम न आना 

ऐसी चर्चा है कि लिस्ट आने से दुखी होकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी छोड़ने का मन बना लिया है। और जल्द ही किसी दूसरी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है कि इस मैसेज के पीछे उनका वास्तविक उद्देश्य क्या है। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि वे जल्द ही समाजवादी पार्टी या किसी अन्य प्रमुख दल के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं।

बेटी कीर्ति कश्यप को आगे बढ़ने की कोशिश

​मूल रूप से कंधरापुर के रहने वाले और लंबे समय से राजनीति में सक्रिय धर्मेंद्र कश्यप अपनी बेटी कीर्ति कश्यप को राजनीति में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे थे। चर्चा थी कि वे अपनी बेटी के लिए राज्यसभा टिकट की दावेदारी कर रहे थे और इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत भी की थी। लेकिन राज्यसभा की सूची आते ही निराशा हाथ लगने पर उनके आहत होने की खबर आ रही है। माना जा रहा है कि इसी लिस्ट के जारी होने के बाद उन्होंने यह पोस्ट साझा किया।

Image Source : Reporter Inputधर्मेंद्र कश्यप की पोस्ट

बीएसपी से सपा और फिर बीजेपी में आए धर्मेंद्र कश्यप

​धर्मेंद्र कश्यप पहली बार वर्ष 2002 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2003 में वे समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गए और राज्य मंत्री बने। 2009 के लोकसभा चुनाव में वे आंवला (बरेली) सीट से भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी से मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे। ​इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और वर्ष 2014 तथा 2019 में भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नीरज मौर्य से 15,970 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव हारने के बाद से ही वे अपनी बेटी को राजनीति में स्थापित करने के लिए लगातार सक्रिय थे।

​फेसबुक पर "टाटा बाय-बाय" लिखे जाने के बाद समर्थकों और स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कई समर्थकों ने भाजपा नेतृत्व पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए पोस्ट शेयर किए हैं। एक समर्थक ने लिखा जो पहले से मंत्री हैं, उन्हें फिर से राज्यसभा प्रत्याशी बना दिया गया और जमीनी नेताओं को नजरअंदाज कर दिया गया। अगर यही हाल रहा तो 2027 में बरेली की सभी 9 विधानसभा सीटों पर पार्टी को नुकसान उठाना पड़ेगा।

आंखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा

पूर्व सांसद ने एक शेर सुनाते हुए कहा​-आंखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा, कश्ती के मुसाफिर ने कभी समंदर नहीं देखा। जब से चला हूं मंजिल पर मेरी निगाहें हैं, कभी मील का पत्थर नहीं देखा। ​अब समर्थकों पर तय करते हैं। भारी समर्थकों की संख्या है। मीटिंग बुलाऊंगा उसके बाद जो भी तय होगा वह आपके सामने आ जाएगा  बहुत जल्द मीटिंग बुलाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा से अपना कोई मतलब ही नहीं है। टिकट जहां से चाहेंगे वहां से मिलेगा। समर्थकों की बैठक में तय हो जाएगा।

​उन्होंने कहा कि 2024 का चुनाव लड़ा और जिन लोगों ने खुलकर मेरी खिलाफत की वे अगर अग्रिम पंक्ति में बैठेंगे तो निश्चित तौर पर कष्ट तो होगा। ऐसे लोगों पर पार्टी कोई एक्शन नहीं लेगी, पार्टी कोई चिंता व्यक्त नहीं करेगी, तो हम जैसे व्यक्ति का स्वाभाविक टाटा-बाय-बाय कहना बन जाता है। समर्थकों की बैठक बुलवा रहे हैं, क्योंकि ऐसा नहीं है कि केवल लोकसभा या विधानसभा में ही मेरे समर्थक हैं। पूरे मंडल-जनपद में मेरे समर्थक हैं। तो सबको बुला करके बैठक कर रहा हूं, उनसे राय लूंगा, तब निर्णय लूंगा। बहुत जल्दी सब कुछ आपके सामने आ जाएगा ।

रिपोर्ट- विकास साहनी, बरेली

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