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जिस जज ने 6 महीने में 23 दोषियों को सुनाई मौत की सजा, उनका अब फैमिली कोर्ट में कर दिया गया तबादला

जज दिवाकर ने अगस्त में अपनी कोर्ट से हत्या और अन्य गंभीर अपराधों के 97 मामलों को प्रशासनिक आदेशों के जरिए हटाए जाने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने एक फैसले में न्यायिक स्वतंत्रता और मामलों के स्थानांतरण में अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई थी।

जज रवि कुमार दिवाकर- India TV Hindi
Image Source : X@BARANDBENCH जज रवि कुमार दिवाकर

छह महीने में 11 मामलों में 23 लोगों को मौत की सजा सुनाने वाले अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) रवि कुमार दिवाकर का तबादला कर दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें मुजफ्फरनगर के परिवार न्यायालय में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

अब ये संभालेंगी कार्यभार

रवि कुमार दिवाकर अब तक त्वरित अदालत में मामलों की सुनवाई कर रहे थे। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, शिव कुमारी त्वरित अदालत में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश का कार्यभार संभालेंगी। दिवाकर का तबादला ऐसे समय हुआ है, जब उन्होंने हाल ही में अदालत से मामलों को हटाए जाने की प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

6 महीने में 11 मामलों में 23 लोगों को मौत की सजा

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रवि कुमार दिवाकर ने इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच 11 मामलों में 23 लोगों को मृत्युदंड सुनाया था। उनके फैसलों और न्यायिक कार्यवाही को लेकर चर्चा उस समय भी हुई, जब उन्होंने अपनी अदालत से हत्या और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े 97 मामलों को हटाए जाने पर आपत्ति जताई थी।

बताया गया कि तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश बी.के. सिंह के प्रशासनिक आदेशों के जरिए ये मामले दिवाकर की अदालत से दूसरी अदालतों में स्थानांतरित किए गए थे। दिवाकर ने अगस्त में इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जिन मामलों में सुनवाई शुरू हो चुकी है, उन्हें प्रशासनिक आदेशों के जरिए हटाने की प्रक्रिया पर कानूनी दृष्टि से विचार किया जाना चाहिए।

न्यायिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक शक्तियों पर उठाए थे सवाल

करीब 10 साल पुराने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम से जुड़े एक मामले में आरोपी को बरी करते हुए दिवाकर ने 35 पन्नों का फैसला सुनाया था। इस फैसले में उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या किसी मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद उसे कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रशासनिक आदेश के जरिए दूसरी अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है।

उन्होंने न्यायिक स्वतंत्रता और जिला न्यायाधीशों की प्रशासनिक शक्तियों की सीमाओं को लेकर भी चिंता जताई थी। फिलहाल, अधिकारियों के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के तहत रवि कुमार दिवाकर को परिवार न्यायालय में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। (भाषा के इनपुट के साथ)

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