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असीम अरुण की सीट कन्नौज पर फिर होगा कांटे का मुकाबला! समझिए यूपी चुनाव 2027 के सियासी समीकरण

SC वर्ग के लिए आरक्षित विधानसभा सीट Kannuaj पर अभी BJP का कब्जा है लेकिन सपा भी इसे लगातार 4 बार जीत चुकी है। समझिए विधानसभा चुनाव 2027 में कन्नौज सीट पर क्या सियासी समीकरण बन रहे हैं।

Kannauj Election History- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV पढ़िए कन्नौज विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास।

कन्नौज विधानसभा सीट का सियासी इतिहास टक्कर के मुकाबलों और लंबे राजनीतिक वर्चस्व की कहानी है। कन्नौज SC वर्ग के लिए यूपी की एक आरक्षित सीट है। 1991 से लेकर 2022 तक हुए 8 विधानसभा चुनावों की बात करें तो उनमें 4 बार सपा और 4 बार बीजेपी को जीत मिली है। दिलचस्प है कि कन्नौज में बीजेपी लगातार तीन बार और सपा लगातार चार बार चुनाव जीत चुकी है। विधानसभा चुनाव 2022 में बीजेपी के असीम अरुण ने सपा के विजय रथ को रोक दिया था। विधायक असीम अरुण अभी समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। असीम अरुण IPS अधिकारी थे और पुलिस विभाग छोड़कर राजनीति में आए हैं। कन्नौज में पिछले तीन दशकों में कांग्रेस और बीएसपी को एक बार भी जीत नसीब नहीं हुई है। जानिए कन्नौज का सियासी इतिहास क्या है और विधानसभा चुनाव 2027 में कन्नौज सीट पर क्या राजनीतिक समीकरण बनने वाले हैं।

1991 की राम लहर में महज 47 वोटों से जीती बीजेपी

कन्नौज विधानसभा सीट पर 1991 का चुनाव बेहद कांटे का रहा था। इस चुनाव में बीजेपी के बनवारी लाल दोहरे ने 23,169 वोट हासिल करके जनता दल के कल्याण सिंह दोहरे को महज 47 वोटों के अंतर से हरा दिया था। कल्याण सिंह दोहरे 23,122 वोट ही पा सके थे। 1991 से लेकर 2022 तक हुए 8 सामान्य चुनावों में जीत का यह अंतर सबसे छोटा था। जनता पार्टी के प्रत्याशी रामदास दोहरे 16,332 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे, जबकि कांग्रेस के विहारी लाल दोहरे को 13,883 वोटों के साथ चौथे नंबर से संतोष करना पड़ा था।

1993 में बीजेपी ने कन्नौज में बरकरार रखी बढ़त

बनवारी लाल दोहरे ने 1993 में बीजेपी के प्रत्याशी के रूप में लगातार दूसरी जीत अपने नाम की। उन्हें 50,130 वोट मिले थे, जबकि सपा के अनिल कुमार दोहरे 38,769 वोटों पर सिमट गए थे। बीजेपी ने यह चुनाव 11,361 वोटों से जीत लिया था। इस चुनाव में जनता दल के कल्याण सिंह दोहरे तीसरे नंबर पर रहे थे। उन्हें 24,226 वोट मिले थे। वहीं, कांग्रेस के विश्वनाथ 3,391 वोट ही हासिल कर पाए थे। वह चुनाव में चौथे नंबर पर रहे थे।

1996 में फिर करीबी मुकाबले में जीते बीजेपी के बनवारी लाल दोहरे

बीजेपी के बनवारी लाल दोहरे ने विधानसभा चुनाव 1996 में जीत की हैट्रिक लगा दी। लेकिन इस बार मुकाबला कठिन था। बनवारी लाल दोहरे ने 42,788 वोट पाकर सपा के कल्याण सिंह दोहरे को महज 878 वोटों के अंतर से मात दे दी थी। कल्याण सिंह दोहरे इस चुनाव में 41,910 वोटों पर सिमट गए थे। बीएसपी ने भी इस चुनाव में मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई थी। बीएसपी के प्रत्याशी गिरीश भान तीसरे नंबर पर रहे थे और उन्हें 34,239 वोट मिले थे।

2002 में सपा के कल्याण सिंह दोहरे ने पलट दी बाजी

विधानसभा चुनाव 2002 में सपा के प्रत्याशी कल्याण सिंह दोहरे ने चुनावी बाजी को पलट दिया था। कल्याण सिंह दोहरे ने 38,482 वोट हासिल किए थे, जबकि बीजेपी के बनवारी लाल दोहरे को 36,680 वोटों के साथ संतोष करना पड़ा था। सपा ने कन्नौज का ये चुनाव 1,802 वोटों के अंतर से जीत लिया था। इस हार के साथ बनवारी लाल दोहरे का विजय रथ रुक गया था। बीएसपी एक बार फिर तीसरे नंबर पर रही थी और उसके प्रत्याशी झामलाल अहिरवार को 35,530 वोट मिले थे। वहीं, कल्याण सिंह की पार्टी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के उम्मीदवार जसवंत सिंह उर्फ सामंतलाल वाल्मीकी को 12,667 वोट मिले थे और वह चौथे नंबर पर रहे थे।

2007 में BSP लहर के बावजूद कन्नौज में सपा जीती

2007 के विधानसभा चुनाव में सपा के प्रत्याशी अनिल कुमार दोहरे ने पहली जीत अपने नाम की। सपा के लिए यह लगातार दूसरी जीत थी। अनिल कुमार दोहरे ने 49,740 वोट हासिल करके बीएसपी के कल्याण सिंह दोहरे को 8,413 वोटों के अंतर से हरा दिया था। तत्कालीन विधायक कल्याण सिंह दोहरे चुनाव चिह्न बदलने के बावजूद यह सीट नहीं जीत पाए थे। कल्याण सिंह दोहरे 41,327 वोट ही पा सके थे। बीजेपी के बनवारी लाल दोहरे इस चुनाव में तीसरे नंबर पर खिसक गए थे। उन्हें जनता ने 38,188 वोट दिए थे।

2012 में सपा के अनिल कुमार दोहरे लगातार दूसरी बार जीते

2012 में सपा ने कन्नौज सीट पर जीत की हैट्रिक लगा दी थी। वहीं, सपा प्रत्याशी अनिल कुमार दोहरे लगातार दूसरी बार जीत गए थे। अनिल कुमार दोहरे ने 95,702 वोट पाकर बीएसपी के महेंद्र नीम दोहरे को 45,682 वोटों के बड़े अंतर से मात दे दी थी। महेंद्र नीम दोहरे 50,020 वोट पाकर रनरअप रहे थे। 1991 से लेकर 2022 तक हुए 8 विधानसभा चुनावों में यह जीत का अंतर सबसे बड़ा था। बीजेपी के बनवारी लाल दोहरे एक बार फिर तीसरे नंबर पर रहे थे और उन्हें 42,211 वोट मिले थे।

वर्ष विजेता पार्टी वोट रनरअप पार्टी वोट जीत का अंतर
1991 बनवारी लाल दोहरे बीजेपी 23,169 कल्याण सिंह दोहरे जनता दल 23,122 47
1993 बनवारी लाल दोहरे बीजेपी 50,130 अनिल कुमार दोहरे सपा 38,769 11,361
1996 बनवारी लाल दोहरे बीजेपी 42,788 कल्याण सिंह दोहरे सपा 41,910 878
2002 कल्याण सिंह दोहरे सपा 38,482 बनवारी लाल दोहरे बीजेपी 36,680 1,802
2007 अनिल कुमार दोहरे सपा 49,740 कल्याण सिंह दोहरे बीएसपी 41,327 8,413
2012 अनिल कुमार दोहरे सपा 95,702 महेंद्र नीम दोहरे बीएसपी 50,020 45,682
2017 अनिल कुमार दोहरे सपा 99,635 बनवारी लाल दोहरे बीजेपी 97,181 2,454
2022 असीम अरुण बीजेपी 1,20,876 अनिल कुमार दोहरे सपा 1,14,786 6,090

(Source- Election Commission Of India)

2017 में अनिल कुमार दोहरे ने लगाई जीत की हैट्रिक

विधानसभा चुनाव 2017 में कन्नौज सीट पर कब्जा करके सपा के अनिल कुमार दोहरे ने जीत की हैट्रिक लगा दी थी। उन्हें जनता ने 99,635 वोट दिए थे, जबकि बीजेपी के बनवारी लाल दोहरे 97,181 वोट हासिल कर पाए थे। अनिल कुमार दोहरे ने 2,454 वोटों से अपनी सीट बचा ली थी। बीएसपी इस बार तीसरे नंबर पर खिसक गई थी। उसके प्रत्याशी अनुराग सिंह को 44,182 वोट मिले थे।

असीम अरुण ने 2022 में कराई बीजेपी की वापसी

2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की वापसी असीम अरुण ने करा दी थी। उन्होंने 1,20,876 वोट पाकर सपा के अनिल कुमार दोहरे को 6,090 वोटों के अंतर से हरा दिया था। अनिल कुमार दोहरे की पारी 1,14,786 वोटों पर सिमट गई थी। इस तरह बीजेपी ने 1996 के बाद कन्नौज विधानसभा सीट पर फिर जीत हासिल कर ली थी। बीएसपी का प्रदर्शन इस चुनाव में और खराब हो गया था। बीएसपी के उम्मीदवार समरजीत दोहरे को 26,239 वोट मिले थे। इस चुनाव में AIMIM के सुनील कुमार चौथे स्थान पर रहे थे, जबकि कांग्रेस की विनीता देवी को 5वां स्थान मिला था। सुनील कुमार को 4,482 वोट मिले थे, जबकि विनीता देवी 1,786 मत हासिल कर पाई थीं।

विधानसभा चुनाव 2027 के लिए कन्नौज सीट के सियासी समीकरण

कन्नौज विधानसभा सीट का सामाजिक समीकरण देखें तो यहां SC वर्ग के वोटर्स की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, कन्नौज सीट पर मुस्लिम, यादव, ब्राह्मण, कुशवाहा/शाक्य और लोधी समाज के मतदाता भी निर्णायक संख्या में हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव में जहां BJP के सामने कन्नौज सीट बचाने की चुनौती है तो वहीं इस सीट को लगातार चार बार जीतने वाली सपा दोबारा इसे हासिल करना चाहती है। बीएसपी का प्रदर्शन पूरे प्रदेश के साथ ही कन्नौज सीट पर पिछले 2 चुनावों में फीका रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव में एक तरफ BJP गठबंधन होगा और उसे सपा-कांग्रेस के अलायंस से चुनौती मिल सकती है। कन्नौज सीट पर मुकाबले कई बार बेहद करीबी हुए हैं। आगामी चुनाव में कन्नौज सीट का नतीजा बहुत हद तक उम्मीदवारों के चयन और जातीय गोलबंदी पर निर्भर कर सकता है।

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