सपा के दबदबे वाले किठौर में BJP के सामने सीट वापस जीतने की चुनौती? समझिए UP चुनाव 2027 का सियासी समीकरण
मेरठ जिले की मुस्लिम बहुल विधानसभा सीट किठौर में यूपी चुनाव 2027 में एक बार फिर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। यहां 4 बार के सपा विधायक शाहिद मंजूर की साख दांव पर है। किठौर के सियासी इतिहास से समझिए 2027 के चुनाव में यहां क्या राजनीतिक समीकरण बनने वाला है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की किठौर विधानसभा भी यूपी की हॉट सीटों में शुमार है। पिछले तीन दशकों का सियासी इतिहास देखें तो किठौर सीट पर चुनावी मुकाबला हर बार बेहद कड़ी टक्कर हुआ है। किठौर में 1993 से लेकर अब तक 4 बार सपा, 2 बार बीजेपी और 1 बार भारतीय किसान कामगार पार्टी का प्रत्याशी विधायक बना है। सपा के सबसे ज्यादा बार विजेता रहने के बावजूद यह समाजवादी पार्टी की पक्की सीट नहीं कही जा सकती है क्योंकि यहां जीत-हार कम वोटों के अंतर से ही तय होती है। किठौर मुस्लिम बहुल सीट है और इसका विधानसभा नंबर 46 है। आइए किठौर के चुनावी इतिहास से समझते हैं कि यहां का सियासी मिजाज क्या है और 2027 में किठौर में क्या समीकरण रहने वाला है।
अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद किठौर में जीती BJP
बात करें 1993 के विधानसभा चुनाव की तो इसमें BJP के रामकृष्ण वर्मा के सामने थे जनता दल के परवेज हलीम खान और कांग्रेस के मंजूर अहमद। यह चुनाव अयोध्या में विवादित ढांचा गिरने के बाद हो रहा था। रिजल्ट आया तो रामकृष्ण वर्मा ने परवेज हलीम खान को 7 हजार 248 वोटों के अंतर से हरा दिया था। रामकृष्ण वर्मा को 43 हजार 11 वोट मिले थे, जबकि परवेज हलीम खान 35 हजार 763 वोटों पर सिमट गए थे। कांग्रेस प्रत्याशी मंजूर अहमद तीसरे नंबर पर रहे थे और 27 हजार 123 वोट ही हासिल कर पाए थे। 1993 के चुनाव में बीएसपी और सपा ने संयुक्त प्रत्याशी के रूप में किठौर में सरदार सिंह को उतारा था, जिन्हें महज 3 हजार 333 वोटों के साथ संतोष करना पड़ा था। बीएसपी यहां 5वें नंबर पर रही थी।
1996 में परवेज हलीम खान ने लिया हार का बदला
लेकिन 1996 के चुनाव में किठौर की बाजी पलट गई। परवेज हलीम खान इस बार अजित सिंह के दल भारतीय किसान कामगार पार्टी से उम्मीदवार बने। ये वही पार्टी थी जो आगे चलकर RLD बन गई। इस चुनाव में भारतीय किसान कामगार पार्टी का सपा के साथ भी गठबंधन था। इसी का फायदा परवेज हलीम खान को मिलता है और वह 45 हजार 380 वोट पाकर बीजेपी के रामकृष्ण वर्मा को 6 हजार 444 वोटों के करीबी अंतर से हरा देते हैं। रामकृष्ण वर्मा 38 हजार 936 वोट ही हासिल कर पाते हैं। तीसरे नंबर पर BSP के संतोष रहे थे। संतोष की पारी 30 हजार 787 वोटों पर सिमट गई थी।
2002 के चुनाव में सपा ने पहली बार जीती किठौर
2002 के चुनाव में किठौर में मुख्य मुकाबला सपा और बीएसपी के बीच हो गया था। बीजेपी, RLD के साथ गठबंधन में थी और सीट बंटवारे में किठौर विधानसभा क्षेत्र RLD को मिला था। सपा ने शाहिद मंजूर, बीएसपी ने कादर नाथ और RLD ने परवेज हलीम को उम्मीदवार बनाया था। मत पेटी खुली तो शाहिद मंजूर विजयी घोषित हुए और उन्होंने 14 हजार 169 वोटों के अंतर से कादर नाथ को मात दे दी थी। शाहिद मंजूर ने 44 हजार 682 वोट पाए, जबकि कादर नाथ 30 हजार 513 वोटों तक ही सीमित रह गए। RLD किठौर में तीसरे नंबर पर रही और 28 हजार 755 वोट ही हासिल कर पाए। किठौर में कांग्रेस ने भी संतोष सीना के तौर पर प्रत्याशी मैदान में उतारा था जो महज 11 हजार 790 वोटों पर सिमट गए थे।
यूपी में BSP की लहर के बावजूद जीते शाहिद मंजूर
2007 में सपा के शाहिद मंजूर ने लगातार दूसरी बार किठौर सीट पर जीत दर्ज की। 2007 के चुनाव में सपा के शाहिद मंजूर के सामने थे बीएसपी के विजेंद्र सिंह। बीजेपी ने किठौर में जितेंद्र और RLD ने परवेज हलीम को उतारा था। वोट गिने गए तो शाहिद मंजूर ने विजेंद्र सिंह को कड़े मुकाबले में 3 हजार 425 वोटों के अंतर से धूल चटा दी। शाहिद मंजूर को 43 हजार 701 वोट मिले, जबकि विजेंद्र सिंह 40 हजार 276 वोट ही हासिल कर पाए। किठौर में बीजेपी तीसरे और RLD चौथे नंबर पर रही। बीजेपी के जितेंद्र को 25 हजार 982 वोट और RLD के परवेज हलीम को 15 हजार 243 वोट मिले।
| वर्ष | विजेता | पार्टी | वोट | रनर-अप | पार्टी | वोट | अंतर |
| 1993 | रामकृष्ण वर्मा | BJP | 43,011 | परवेज हलीम खान | JD | 35,763 | 7,248 |
| 1996 | परवेज हलीम खान | BKKGP | 45,380 | रामकृष्ण वर्मा | BJP | 38,936 | 6,444 |
| 2002 | शाहिद मंजूर | SP | 44,682 | कादर नाथ | BSP | 30,513 | 14,169 |
| 2007 | शाहिद मंजूर | SP | 43,701 | विजेंद्र सिंह | BSP | 40,276 | 3,425 |
| 2012 | शाहिद मंजूर | SP | 73,015 | लखीराम नागर | BSP | 61,909 | 11,106 |
| 2017 | सत्यवीर त्यागी | BJP | 90,622 | शाहिद मंजूर | SP | 79,800 | 10,822 |
| 2022 | शाहिद मंजूर | SP | 1,07,104 | सत्यवीर त्यागी | BJP | 1,04,924 | 2,180 |
(सोर्स- Election Commission Of India)
सपा के शाहिद मंजूर ने लगाई जीत की हैट्रिक
2008 में परिसीमन के बाद किठौर विधानसभा का नंबर 46 हो गया। परिसीमन के बाद पहला चुनाव 2012 में हुआ और इसमें मौजूदा विधायक और सपा के शाहिद मंजूर ने जीत की हैट्रिक लगा दी। शाहिद मंजूर ने 73 हजार 15 वोट पाकर बीएसपी के लखीराम नागर को 11 हजार 106 वोटों के अंतर से हरा दिया। लखीराम नागर 61 हजार 909 वोट ही हासिल कर पाए। इस चुनाव में RLD और कांग्रेस का गठबंधन था। किठौर के चुनाव में RLD के सत्यवीर त्यागी तीसरे नंबर पर रहे और 34 हजार 791 वोट हासिल किए। इस चुनाव में BJP चौथे नंबर पर खिसक गई थी और उसके प्रत्याशी जयपाल सिंह 16 हजार 702 वोट ही हासिल कर पाए।
BJP के सत्यवीर त्यागी ने आखिर रोक लिया शाहिद मंजूर का विजय रथ
2017 के विधानसभा चुनाव में पूरे यूपी में BJP की प्रचंड लहर थी। इस लहर में किठौर सीट पर BJP के सत्यवीर त्यागी भी जीत गए, जो पिछले चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे। सत्यवीर त्यागी ने शाहिद मंजूर के विजय रथ को रोक दिया। सत्यवीर त्यागी ने 90 हजार 622 वोट हासिल कर सपा के शाहिद मंजूर को 10 हजार 822 वोटों से मात दे दी। शाहिद मंजूर को 79 हजार 800 वोटों के साथ संतोष करना पड़ा था। बीएसपी ने यहां कैंडिडेट के रूप में गजराज सिंह को उतारा था और उन्होंने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया था। गजराज सिंह ने 62 हजार 503 वोट पाए थे। RLD ने यहां मतलूब गौर को उतारा था जो महज 6 हजार 598 वोट ही हासिल कर सके थे।
किठौर के तीन दशकों के सबसे करीबी मुकाबले में फिर जीते शाहिद मंजूर
किठौर में 2022 का विधानसभा चुनाव आया तो शाहिद मंजूर ने अपनी सीट वापस जीत ली। इस चुनाव में शाहिद मंजूर और सत्यवीर त्यागी के बीच सीधा मुकाबला था। BSP के प्रत्याशी बुरी तरह पिछड़ गए और टक्कर त्रिकोणीय नहीं हो पाई। सपा के शाहिद मंजूर ने 1 लाख 7 हजार 104 वोट हासिल कर बीजेपी के सत्यवीर त्यागी को बेहद करीबी मुकाबले में 2 हजार 180 वोटों के अंतर से हरा दिया। सत्यवीर त्यागी 1 लाख 4 हजार 924 वोट ही पा सके। 1993 से 2022 के चुनावों में यह किठौर विधानसभा का सबसे कड़ा मुकाबला था।
2027 के लिए किठौर विधानसभा का सियासी समीकरण
किठौर विधानसभा में 1993 से 2022 तक हुए 7 विधानसभा चुनावों में सपा ने 4, BJP ने 2 और BKKGP ने 1 बार चुनाव जीता। सपा की तरफ से चारों बार यानी 2002, 2007, 2012 और 2022 में जीत शाहिद मंजूर ने दर्ज की। वहीं, बीजेपी ने किठौर में 1993 और 2017 में दो बार जीत दर्ज की। इसके अलावा, BKKGP को एक बार किठौर में अपना विधायक बनाने का मौका मिला। किठौर में लगातार करीबी मुकाबले ही हुए हैं। आप इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि 1993 से लेकर अभी तक हुए चुनावों में सबसे बड़े अंतर से जीत-हार 2002 में 14 हजार 169 वोटों से हुई और सबसे कम अंतर से जीत-हार का फैसला 2022 में महज 2 हजार 180 मतों से हुआ।
इस तरह किठौर के पिछले 3 दशकों का सियासी इतिहास बताता है कि किठौर में अलग-अलग दौर में बीजेपी और अन्य पार्टियां चुनौती देती रहीं, लेकिन अधिकतर बार जीत समाजवादी पार्टी को ही मिली। उसमें भी शाहिद मंजूर ही सपा की तरफ से हर बार विधायक बने। किठौर के सामाजिक समीकरण की बात करें तो यहां मुस्लिम, गुर्जर, त्यागी और SC वर्ग के मतदाता निर्णायक संख्या में हैं। 2027 के किठौर विधानसभा चुनाव में यहां दिलचस्प मुकाबला हो सकता है क्योंकि एक तरफ सपा-कांग्रेस का गठबंधन और दूसरी तरफ BJP-RLD का अलायंस हो सकता है। चुनाव में जीत-हार इस बात पर भी निर्भर कर सकती है कि BSP का उम्मीदवार या अन्य कोई प्रत्याशी कितनी मजबूती से लड़ता है और वह किसके वोटों में सेंध लगाता है।
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