बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने दिल्ली में आयोजित BRICS समिट में जारी 'न्यू डेल्ही डिक्लेशन' की तारीफ की है। मायवती ने इसे सूझबूझ भरी कूटनीतिक उपलब्धि बताया है। मायावती ने आज (रविवार को) कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने की इच्छा भी उम्मीद जगाने वाली है।
'न्यू डेल्ही डिक्लेशन' को बताया डिप्लोमेटिक अचीवमेंट
मायावती ने कहा, 'रूस-यूक्रेन जंग और ईरान के विरुद्ध अमेरिका के मिलिट्री एक्शन की वजह से बढ़े तनाव और टैरिफ लगाए जाने जैसी गंभीर इकोनॉमिक चुनौतियों का सामना कर रहे ब्रिक्स देशों की तरफ से अपनी 18वीं समिट में 'न्यू डेल्ही डिक्लेशन' को सर्वसम्मति से जारी किया जाना आपसी सूझबूझ और डिप्लोमेटिक अचीवमेंट से कम नहीं है।'
'ब्रिक्स करेंसी' का विकास साबित होगा अहम कदम
BSP सुप्रीमो ने आगे कहा कि ब्रिक्स के देशों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा भी उम्मीद जगाती है। इस दिशा में 'ब्रिक्स करेंसी' का डेवलपमेंट भी एक अहम कदम साबित हो सकता है।
ब्रिक्स समिट में भारत के दृष्टिकोण को मिला समर्थन
यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि इसके अलावा फिलीस्तीन के मुद्दे पर 'Two-state solution' और 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलीस्तीन राष्ट्र के सपोर्ट के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने की प्रतिबद्धता जताना भी महत्वपूर्ण है। इससे भारत के नजरिए को उचित सपोर्ट मिला है, जो तारीफ के काबिल है।
आपसी सहमति से हल होना चाहिए चीन के साथ सीमा विवाद
मायावती ने कहा, 'पड़ोसी देश चीन के साथ मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देने और दोनों देशों को एक-दूसरे के डेवलपमेंट में पार्टनर के रूप में देखने के दृष्टिकोण के क्या सकारात्मक रिजल्ट सामने आएंगे, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच बॉर्डर विवाद का जितनी जल्दी आपसी सहमति से हल हो जाए, उतना ही बेहतर होगा।
चीन और भारत के बीच कई मुद्दों पर बनी सहमति
गौरतलब है कि BRICS समिट 2026 में भारत और चीन के 'दिल' मिलते नजर आए। भारत-चीन के बीच 7 अहम मुद्दों पर सहमति बन गई है। इनमें संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से देखने, मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देने और सीमा विवाद के निष्पक्ष और स्वीकार्य समाधान तलाशे की बात भी शामिल है।
(इनपुट- भाषा)
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