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नजीबाबाद में लेफ्ट और सपा लगा चुके हैं जीत की हैट्रिक, समझिए UP चुनाव 2027 में यहां क्या होगा सियासी समीकरण

Najibabad Assembly Seat पर 2027 के चुनाव में कांटे का मुकाबला देखने को मिल सकता है, क्योंकि एक तरफ BJP-RLD साथ होंगे तो उन्हें टक्कर सपा-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार से मिल सकती है। समझिए नजीबाबाद सीट पर 2027 के चुनाव में क्या समीकरण हो सकते हैं।

Najibabad Assembly Seat- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV पढ़िए नजीबाबाद विधानसभा सीट का इतिहास।

बिजनौर जिले की Najibabad Assembly Seat यूपी की हॉट सीटों में से एक है। नजीबाबाद विधानसभा सीट, नगीना लोकसभा का हिस्सा है और इसका विधानसभा सीट नंबर 17 है। नजीबाबाद सीट पर अभी सपा के विधायक तसलीम अहमद काबिज हैं। वह लगातार तीन बार से नजीबाबाद सीट से चुनाव जीत रहे हैं। तसलीम अहमद 2012 में BSP के टिकट पर चुनाव जीते थे और उसके बाद लगातार 2 बार सपा के उम्मीदवार के रूप में विधायक बने। पिछले 3 विधानसभा चुनावों से BJP यहां रनरअप रही है। बीजेपी नजीबाबाद में आखिरी बार चुनाव 1991 में जीती थी। यह उसकी पहली और आखिरी जीत थी। आइए नजीबाबाद विधानसभा सीट के पिछले 3 दशकों के चुनावी इतिहास को समझिए और जानिए यहां विधानसभा चुनाव 2027 में क्या सियासी समीकरण हो सकते हैं।

1991 में BJP ने पहली बार जीती नजीबाबाद की सुरक्षित सीट

बात करें 1991 के विधानसभा चुनाव की तो उस समय नजीबाबाद SC वर्ग के लिए सुरक्षित सीट हुआ करती थी। इसमें बीजेपी के राजेंद्र ने 34,730 वोट पाकर लेफ्ट के तिलक राम को 15,829 वोटों के अंतर से हरा दिया था। तिलक राम को 18,901 वोट मिले थे। वहीं, BSP तीसरे नंबर पर रही थी और उसके उम्मीदवार दिनेश कुमार 15,327 वोट ही हासिल कर पाए थे।

1993 में लेफ्ट के रामस्वरूप सिंह ने मारी बाजी

1993 के विधानसभा चुनाव में CPI(M) के रामस्वरूप सिंह ने 46,401 वोट पाए और बीजेपी के राजेंद्र प्रसाद को 5,912 वोटों के अंतर से हरा दिया। मौजूदा विधायक और बीजेपी के उम्मीदवार राजेंद्र प्रसाद 40,489 वोट ही पा सके थे। BSP ने एक बार फिर दिनेश कुमार को उम्मीदवार बनाया था, वह 16 हजार 327 वोट पाए थे। कांग्रेस की आशा चौधरी चौथे नंबर पर रही थीं और उन्हें 11,518 वोट मिले थे।

1996 में रामस्वरूप सिंह ने नजीबाबाद सीट पर बरकरार रखा कब्जा

नजीबाबाद विधानसभा सीट पर 1996 के चुनाव में रामस्वरूप सिंह ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। CPI(M) के टिकट पर सियासी मैदान में उतरे रामस्वरूप सिंह ने 58,370 वोट पाए, जबकि बीजेपी के राजा राम को 46,961 वोट मिले। इस चुनाव में जीत-हार का फैसला 11,409 वोटों के अंतर से हुआ था। BSP ने इस बार शीशराम को टिकट दिया था, जो 42 हजार 588 वोटों पर सिमट गए थे।

2002 में लेफ्ट के रामस्वरूप सिंह ने लगाई जीत की हैट्रिक

ECI के आंकड़ों के मुताबिक, CPI(M) के Ram Swroop Singh की टक्कर इस बार BSP के शीशराम से थी। रामस्वरूप सिंह को 40,426 वोट मिले, जबकि शीशराम 35,584 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। दोनों में वोटों का अंतर 4,842 का था और रामस्वरूप सिंह ने लगातार तीसरी बार चुनाव जीत लिया। RLD ने इस बार अरविंद चौधरी को टिकट दिया था, जो 27,377 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में RLD का गठबंधन बीजेपी के साथ था।

2007 में BSP की लहर में नजीबाबाद सीट जीते शीशराम

2007 में बीएसपी ने शीशराम लगातार तीसरी बार भरोसा जताया और वह विजेता बनकर भी उभरे। शीशराम के सामने इस बार मुकाबले के लिए थे CPI(M) के राज कुमार। शीशराम को 49,848 वोट मिले, जबकि राजकुमार 41,860 वोटों पर सिमट गए। इस तरह BSP के राजकुमार ने 7,988 वोटों के अंतर से चुनाव जीत लिया। बीजेपी इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रही और उसकी प्रत्याशी सुशीला 18,404 वोट पा सकीं।

वर्ष

विजेता

पार्टी

विजेता वोट

रनर-अप

पार्टी

रनर-अप वोट

अंतर

1991

राजेंद्र

BJP

34,730

तिलक राम

CPI

18,901

15,829

1993

रामस्वरूप सिंह

CPI(M)

46,401

राजेंद्र प्रसाद

BJP

40,489

5,912

1996

रामस्वरूप सिंह

CPI(M)

58,370

राजा राम

BJP

46,961

11,409

2002

रामस्वरूप सिंह

CPI(M)

40,426

शीशराम

BSP

35,584

4,842

2007

शीशराम

BSP

49,848

राज कुमार

CPI(M)

41,860

7,988

2012

तसलीम अहमद

BSP

62,713

राजीव कुमार अग्रवाल

BJP

51,130

11,583

2017

तसलीम अहमद

SP

81,082

राजीव कुमार अग्रवाल

BJP

79,080

2,002

2022

तसलीम अहमद

SP

1,02,675

राजा भरतेंद्र सिंह

BJP

78,905

23,770

(सोर्स- Election Commission Of India)

विधानसभा चुनाव 2012 में BSP ने बचा ली सीट

2008 के परिसीमन के बाद नजीबाबाद, सुरक्षित सीट से सामान्य सीट बन गई।  BSP ने इस बार तसलीम अहमद को टिकट दिया और उनका मुकाबला बीजेपी के राजीव कुमार अग्रवाल से हुआ। तसलीम ने 62,713 वोट पाकर राजीव कुमार अग्रवाल को 11,583 वोटों के अंतर से हरा दिया। राजीव कुमार अग्रवाल को 51,130 वोट मिले। RLD का इस चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन था और उसके प्रत्याशी अबरार आलम को 30 हजार 885 वोट मिले थे। वहीं, सपा के शाहिद अली खान 28,597 वोट ही हासिल कर पाए थे।

पार्टी बदलने के बावजूद तसलीम ने फिर जीत लिया नजीबाबाद

2017 में तसलीम अहमद ने पार्टी बदल ली और इस बार BSP छोड़कर सपा के टिकट पर सियासी मैदान में उतरे। ECI के मुताबिक, तसलीम ने 81,082 वोट पाए, जबकि बीजेपी के राजीव कुमार अग्रवाल 79,080 वोट ही हासिल कर सके। यह चुनाव पिछले 3 दशकों में सबसे करीबी था और तसलीम की जीत महज 2,002 वोटों के अंतर से हुई थी। बीएसपी के जलील अहमद इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे और उन्हें 45 हजार 70 वोट मिले थे।

2022 में तसलीम ने हासिल की लगातार तीसरी जीत

2022 में SP के तसलीम अहमद ने जीत की हैट्रिक लगा दी। तसलीम ने बीजेपी के राजा भरतेंद्र सिंह को 23,770 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया था। तसलीम को 1,02,675 वोट मिले थे, जबकि राजा भरतेंद्र सिंह 78,905 वोट ही हासिल कर पाए थे। ये पिछले तीन दशकों की सबसे बड़ी जीत थी। बीएसपी इस बार फिर तीसरे नंबर पर रही और उसके उम्मीदवार शहनवाज आलम 44,727 वोट ही हासिल कर सके। कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद सलीम अंसारी चौथे स्थान पर रहे और वह 1,958 वोट ही पा सके।

विधानसभा चुनाव 2027 का सियासी समीकरण क्या?

1991 से 2022 तक हुए 8 आम विधानसभा चुनावों की बात करें तो इसमें CPI(M) ने 3, BSP ने 2, SP ने 2 और BJP ने 1 इलेक्शन जीता है। इस दौरान, कांग्रेस को एक बार भी नजीबाबाद में जीत नसीब नहीं हुई है। लेफ्ट के रामस्वरूप सिंह 1993, 1996 और 2002 में लगातार 3 बार जीते। तसलीम अहमद भी 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन बार जीते, जिसमें उन्हें पहली जीत BSP के टिकट पर मिली, जबकि दो बार उन्हें विजय SP के उम्मीदवार के रूप में मिली। बीजेपी को यहां जीत अयोध्या में गोलीकांड के बाद हुए चुनाव में सिर्फ एक बार मिली थी। यह वह चुनाव था जब बीजेपी को पहली बार उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत मिला था।

नजीबाबाद विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरण की बात करें तो यहां मुस्लिम, SC वर्ग और OBC वर्ग की तमाम जातियों के लोग निर्णायक संख्या में हैं। 2027 के चुनाव में यहां एक पाले में BJP और RLD, जबकि दूसरी तरफ सपा-कांग्रेस एक साथ नजर आ सकते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव में जहां सपा लगातार तीसरी बार नजीबाबाद जीतने की कोशिश में है, तो बीजेपी उसका विजय रथ रोकने का प्रयास करेगी। कैंडिडेट का चयन और जातियों की गोलबंदी बहुत हद तक 2027 का परिणाम तय कर सकती है।

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