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"पहले जर्जर थे आंगनवाड़ी केंद्र, अब देखने लायक हो गए हैं", CM योगी ने बताया बदलाव का सफर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों में हुए बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले अधिकांश केंद्र जर्जर और अव्यवस्थित थे, जबकि अब 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ- India TV Hindi
Image Source : PTI उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आपने 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति देखी होगी। याद करिए, तब ज्यादातर आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर हालत में थे और वहां गंदगी रहती थी। उत्तर प्रदेश के अंदर उस समय आंगनवाड़ी केंद्रों में कोई व्यवस्था नहीं थी। समय पर कोई भी रेसिपी उपलब्ध नहीं हो पाती थी। परिणाम क्या था? जब मैं 2017 में आया तो मैंने पूछा- आखिर ये क्या स्थितियां हैं? आंगनवाड़ी केंद्रों की इतनी खराब स्थिति क्यों है? इतनी शिकायतें क्यों आती हैं? तब पता चला कि आंगनवाड़ी केंद्रों में जो पोषाहार जा रहा था, उसकी सप्लाई एक शराब माफिया कर रहा था। मैं भौचक्का था। हमने इसकी गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए और उस पर सवाल खड़े हुए। मैंने पूछा कि क्या वह हर महीने पोषाहार भेजता है? बताया गया कि नहीं साहब, कभी तीन महीने में एक बार चला जाए तो चला जाए, नहीं तो सब भगवान भरोसे।

"बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों में अपना टाट लेकर जाते थे"

उन्होंने कहा, "जो बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों में जाते थे, वे अपना टाट लेकर जाते थे। वहां न पेयजल की व्यवस्था थी, न बच्चों के लिए बैठने की व्यवस्था और न ही हॉट मिल्क की व्यवस्था थी। गलती करता था कोई और गाली खाती थीं आंगनवाड़ी की बहनें। लखनऊ में बैठकर गलती तो लोग करते थे, लेकिन आपके हिस्से में गाली क्यों आती थी? गाली देने के साथ-साथ, गाली खाने के साथ-साथ अगर थोड़ा मानदेय भी बढ़ा देते तो चलता कि कुछ तो हो रहा है। लेकिन मानदेय भी नहीं मिलता था। मानदेय मात्र ₹3,000 था और सहायिकाओं को ₹1,500 मिलते थे।"

"आंगनवाड़ी केंद्र अब हमारे देखने लायक बन रहे"

सीएम योगी ने आगे कहा, "पहली बार ऐसा हुआ है, जब आंगनवाड़ी केंद्र अब हमारे देखने लायक बन रहे हैं। हमने एक मॉडल दिया है कि आंगनवाड़ी केंद्र ऐसे होने चाहिए। एक आंगनवाड़ी केंद्र के निर्माण और उसके रिनोवेशन में हम खर्च कर रहे हैं। मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र कैसा होना चाहिए, यह देखना चाहिए। आज आंगनवाड़ी बहनों के पास अपना स्मार्टफोन है। स्मार्टफोन से वे रियल टाइम डेटा अपलोड कर सकती हैं। यही नहीं, अब आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से जो पोषाहार वितरित हो रहा है, उसमें हॉट मील भी है। साथ-साथ टीएचआर के माध्यम से पैक्ड सामग्री भी वितरित होती है। टीएचआर के 204 प्लांट उत्तर प्रदेश के अंदर लग चुके हैं। महिला स्वयं सहायता समूह इन कार्यों को स्वयं संचालित करते हैं। आज यह मॉडल देखने को मिल रहा है और इस मॉडल को मैं मानता हूं कि यह आज की आवश्यकता है।"

"नए स्वरूप में 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र"

उन्होंने कहा, "हमने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को एक नया स्वरूप दिया है। हमने इसमें प्राथमिकता दी है। हर एक आंगनवाड़ी केंद्र को प्राथमिकता दी गई है। राज्य वित्त आयोग का पैसा हो, केंद्रीय वित्त आयोग का पैसा हो या राज्य के अपने बजट का पैसा हो, आंगनवाड़ी केंद्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनके निर्माण, उनकी बाउंड्री वॉल, वहां बच्चों के लिए टॉयलेट, पेयजल और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था- ये सब उनकी प्राथमिकता का हिस्सा होना चाहिए। आज यहां बाल वाटिकाएं चलती हैं। हम देखते हैं कि खेल-खेल में बच्चे कैसे अक्षर ज्ञान और अंकों का ज्ञान प्राप्त करते हैं। आज यह एक मॉडल बन चुका है।"

मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं कुछ आंगनवाड़ी केंद्रों में गया था। एक बार मैं कानपुर के एक सुदूर गांव में स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में गया। मैं बिना बताए वहां पहुंच गया। मैं देख रहा था कि वहां लगभग 20-22 बच्चे आंगनवाड़ी केंद्र में थे। आंगनवाड़ी की कार्यकर्ता बच्चों को पढ़ा रही थीं। कुछ बच्चे सुस्त थे, कुछ बच्चे तेज थे। मैं चुपचाप एक ओर खड़ा होकर देखने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। सभी बच्चे बड़े उत्साह से सीख रहे थे। कुछ बच्चे तो खेल में मस्त थे। कुछ बच्चों के सामने लड्डू आदि रखे हुए थे, तो उनकी नजर लड्डुओं पर भी लगी हुई थी, लेकिन साथ-साथ वे सीख भी रहे थे।" बता दें कि कुछ महीने पहले सीएम योगी ने 739 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और 15203 सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र सौंपा था।

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