रामपुर की जनता ने आजम खान को 10 बार चुना विधायक, BJP सिर्फ 1 बार जीत पाई, समझिए यूपी चुनाव 2027 में क्या हो सकता है?
रामपुर विधानसभा ऐसी सीट है, जहां की जनता ने आजम खान को विधायक चुनकर 10 बार विधानसभा भेजा है, जबकि 2022 के उपचुनाव में BJP पहली बार इसे जीतने में कामयाब रही। रामपुर के सियासी इतिहास से समझिए UP Election 2027 में क्या समीकरण बन रहा है।

यूपी की रामपुर विधानसभा सीट, वेस्टर्न यूपी की हॉट राजनीतिक सीटों में से एक है। रामपुर सीट का चुनावी इतिहास काफी पुराना है और यहां 1980 से 2022 तक हुए 11 चुनावों में आजम खान 10 बार चुनाव जीते हैं। सिर्फ एक बार 1996 में आजम खान को कांग्रेस के अफरोज अली खान के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। रामपुर का मिजाज आप इस बात से समझ सकते हैं कि आजम खान, रामपुर विधानसभा से 10 बार विधायक रह चुके हैं। लेकिन 2022 के उपचुनाव में BJP ने पहली बार रामपुर सीट हथिया ली और जीत का सेहरा पार्टी प्रत्याशी आकाश सक्सेना के सिर पर बंधा। इस खबर में रामपुर का चुनावी इतिहास विस्तार से पढ़िए और जानिए कि यूपी चुनाव 2027 में रामपुर में क्या समीकरण बनने वाला है।
1980 से 1991 तक लगातार 4 बार रामपुर में जीते आजम खान
मोहम्मद आजम खान के पहली बार विधायक बनने की बात करें तो आजम खान को 1980 में पहली बार रामपुर की जनता ने विधानसभा सदस्य चुनकर लखनऊ भेजा था। इसके बाद, अगले चार इलेक्शन भी यानी 1985, 1989, 1991 और 1993 में आजम खान ने जीते। अगर 1991 से बात करें तो तब आजम खान जनता पार्टी के उम्मीदवार थे। उन्होंने 27 हजार 318 वोट हासिल कर BJP के प्रत्याशी जोगेश चंद्र अरोड़ा को 2 हजार 634 से वोटों से मात दी थी। जोगेश चंद्र अरोड़ा को 24 हजार 684 वोटों के साथ संतोष करना पड़ा था।
इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अफरोज अली खान भी उतरे थे, जो पहले कांग्रेस से चुनाव लड़ा करते थे। इस चुनाव में अफरोज को 24 हजार 118 वोट हासिल हुए थे। वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार मुकर्रम हुसैन सिद्दीकी 13 हजार 295 वोटों पर सिमट गए थे। कुल जमा बात ये है कि 1991 का चुनाव त्रिकोणीय मुकाबला था, जिसमें आजम खान ने 2 हजार 634 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर ली थी। दिलचस्प ये भी है कि ये चुनाव 1990 में अयोध्या में हुए गोलीकांड के बाद हुआ था।
जब पहली बार सपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे आजम खान
वहीं, 1993 का चुनाव आजम खान ने समाजवादी पार्टी के झंडे के तले लड़ा। एक साल पहले ही 1992 में मुलायम सिंह यादव ने सपा का गठन किया था और आजम खान भी उसके संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। इस चुनाव में सपा के आजम खान ने 40 हजार 324 वोट हासिल किए, जबकि जनता दल के प्रत्याशी अफरोज अली खान, 39 हजार 724 वोटों पर ही थम गए। यह चुनाव 1991 से भी कड़ा त्रिकोणीय मुकाबला था, जिसमें महज 600 वोटों से आजम खान की जीत हुई थी।
इस चुनाव में बीजेपी के जोगेश चंद्र अरोड़ा तीसरे नंबर पर रहे थे और उन्होंने 33 हजार 739 वोट पाए थे। वहीं, कांग्रेस ने रामपुर के सियासी मैदान में इशरत मियां को उतारा था जिन्हें 12 हजार 651 वोटों के साथ संतोष करना पड़ा था।
जब रामपुर में पहली बार हारे आजम खान
आजम खान को 1996 के चुनाव में पहली बार हार का मुंह देखना पड़ा और कांग्रेस के अफरोज अली खान ने 13 हजार 906 वोटों के अंतर से शिकस्त दे दी। इस चुनाव में अफरोज अली खान को 69 हजार 184 और आजम खान को 55 हजार 278 वोट मिले थे। बीजेपी के टिकट पर एक बार फिर जोगेश चंद्र अरोड़ा उम्मीदवार थे और वह 32 हजार 299 वोट ही हासिल कर पाए थे।
2002 से आजम खान ने की जोरदार वापसी
1996 में हार के बाद 2002 के विधानसभा चुनाव में आजम खान ने जबरदस्त वापसी की और रामपुर के विधायक बन गए। ये चुनाव एकतरफा था और आजम खान ने 37 हजार 991 वोटों के भारी अंतर से कांग्रेस के अफरोज अली खान को हरा दिया। आजम खान ने 73 हजार 920 वोट पाए, तो अफरोज अली खान 35 हजार 929 मत ही अपने नाम कर पाए।
2002 के चुनाव में RLD और BJP का गठबंधन था और रामपुर सीट पर संयुक्त रूप से RLD के उम्मीदवार के रूप में कपिल आर्य को उतारा गया था, जिनका प्रदर्शन काफी खराब रहा था। कपिल आर्य महज 7 हजार 854 वोटों पर ही सिमट गए थे। वहीं, BSP प्रत्याशी रमेश चंद चौथे नंबर पर रहे थे, जो 5 हजार 595 वोट ही हासिल कर पाए।
| वर्ष | विजेता | पार्टी | वोट | रनर-अप | पार्टी | वोट | अंतर |
| 1991 | मोहम्मद आजम खान | JP | 27,318 | जोगेश चंद्र अरोड़ा | BJP | 24,684 | 2,634 |
| 1993 | मोहम्मद आजम खान | SP | 40,324 | अफरोज अली खान | JD | 39,724 | 600 |
| 1996 | अफरोज अली खान | INC | 69,184 | मोहम्मद आजम खान | SP | 55,278 | 13,906 |
| 2002 | मोहम्मद आजम खान | SP | 73,920 | अफरोज अली खान | INC | 35,929 | 37,991 |
| 2007 | मोहम्मद आजम खान | SP | 53,091 | अफरोज अली खान | INC | 19,719 | 33,372 |
| 2012 | मोहम्मद आजम खान | SP | 95,772 | डॉ. तनवीर अहमद खान | INC | 32,503 | 63,269 |
| 2017 | मोहम्मद आजम खान | SP | 1,02,100 | शिव बहादुर सक्सेना | BJP | 55,258 | 46,842 |
| 2019 (उपचुनाव) | डॉ. तजीन फातमा | SP | 79,043 | भरत भूषण | BJP | 71,327 | 7,716 |
| 2022 | मोहम्मद आजम खान | SP | 1,31,225 | आकाश सक्सेना | BJP | 76,084 | 55,141 |
| 2022 (उपचुनाव) | आकाश सक्सेना | BJP | 81,432 | आसिम राजा | SP | 47,296 | 34,136 |
(सोर्स- Election Commission Of India)
2007 में BSP की हवा के बावजूद एकतरफा मुकाबले में जीते आजम खान
रामपुर में विधानसभा चुनाव का नतीजा 2007 में भी नहीं बदला। 2007 में यूपी की जनता ने मायावती की पार्टी BSP को बहुमत दिया था, लेकिन रामपुर में आजम खान ही जीते थे। सपा प्रत्याशी के रूप में आजम खान ने 53 हजार 91 वोट हासिल कर एकतरफा मुकाबले में कांग्रेस के अफरोज अली खान को 33 हजार 372 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया था। इस चुनाव में अफरोज अली खान 19 हजार 719 वोट ही हासिल कर पाए थे।
रामपुर के 2007 के चुनाव में बीजेपी तीसरे नंबर पर रही थी, जिसके उम्मीदवार अनिल कुमार वशिष्ठ 15 हजार 260 वोटों पर ही सिमट गए थे। BSP का प्रदर्शन भी खराब रहा था। बीएसपी के मुसर्रत खान सिर्फ 4 हजार 502 वोट ही पा सके थे।
2012 में सपा की लहर में करीब दोगुना हो गया जीत का अंतर
2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी आजम खान ने 95 हजार 772 वोट पाए थे। इस चुनाव में कांग्रेस ने डॉ. तनवीर अहमद खान को उतारा था। उन्हें 32 हजार 503 वोट मिले थे और आजम खान ने पिछले चुनाव के 33 हजार 372 वोटों के मुकाबले 63 हजार 269 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर ली थी। रामपुर के इस चुनाव में BSP तीसरे और बीजेपी चौथे नंबर पर रही थी। BSP कैंडिडेट भरत भूषण ने 16 हजार 570 और जगेश्वर दयाल दीक्षित को 9 हजार 949 मत मिले थे।
BJP की आंधी में भी रामपुर सीट बचा ले गए आजम खान
2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए ने कुल 403 में से 325 सीटें हासिल की थीं और सपा महज 47 सीटों पर सिमट गई थी। सपा की इन सीटों में आजम खान की रामपुर सीट भी शामिल थी। आजम खान ने 1 लाख 2 हजार 100 वोट पाकर बीजेपी के शिव बहादुर सक्सेना को 46 हजार 842 वोटों के अंतर से हरा दिया था। शिव बहादुर सक्सेना को इस चुनाव में 55 हजार 258 वोट मिले थे।
2019 के उपचुनाव में जीतीं आजम खान की बेगम
फिर, 2019 में आजम खान को रामपुर की जनता ने लोकसभा सांसद चुन लिया और सीट पर विधायक बनाने के लिए उपचुनाव कराना पड़ा। इस बार, सपा ने आजम खान की पत्नी डॉ. तजीन फातमा को चुनावी मैदान में उतारा और उन्होंने भी 79 हजार 43 वोट हासिल करके बीजेपी के भरत भूषण को 7 हजार 716 वोटों के अंतर से मात दे दी। बीजेपी प्रत्याशी 71 हजार 327 वोट ही हासिल कर पाए थे। इस उपचुनाव में कांग्रेस और बीएसपी ने भी अपना-अपना उम्मीदवार उतारा था। कांग्रेस के अरशद अली खान 4 हजार 178 और बीएसपी के जुबैर मसूद खान 3 हजार 441 वोट पाए थे।
2022 में आजम खान ने लगातार 5वीं बार जीता चुनाव
2022 के रामपुर विधानसभा चुनाव में आजम खान फिर से सपा के टिकट पर सियासी मैदान में उतरे और उन्होंने 1 लाख 31 हजार 225 वोट हासिल किए। वहीं, बीजेपी के आकाश सक्सेना के वोटों की संख्या 76 हजार 84 पर थम गई। ये चुनाव आजम खान ने 55 हजार 141 वोटों के अंतर से जीत लिया।रामपुर विधानसभा चुनाव 2022 में बीएसपी और कांग्रेस के उम्मीदवार 5 हजार वोटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए। बीएसपी के सदाकत हुसैन 4 हजार 940 और कांग्रेस के नवाब काजिम अली खान 4 हजार वोट ही हासिल कर पाए।
2022 के उपचुनाव में BJP ने पहली बार जीती रामपुर विधानसभा सीट
साल 2022 में आजम खान विधायक बन जरूर गए लेकिन एक आपराधिक मामले में सजा होने के बाद आजम खान की विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई और रामपुर में उपचुनाव कराना पड़ा। इसमें बीजेपी ने प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर आकाश सक्सेना पर भरोसा जताया तो सपा ने मोहम्मद आसिम राजा को प्रत्याशी बनाया। ये चुनाव बीजेपी ने 34 हजार 136 वोटों के बड़े अंतर से जीत लिया। आकाश सक्सेना ने 81 हजार 432 और आसिम राजा ने 47 हजार 296 वोट पाए।
रामपुर विधानसभा चुनाव 2027 का सियासी समीकरण
इस लिहाज से देखें तो 1980 के बाद से रामपुर विधानसभा का सियासी इतिहास मुख्य रूप से आजम खान के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा है। समाजवादी पार्टी का यहां दबदबा है। 1980 से 2022 तक के 11 आम विधानसभा चुनावों में आजम खान ने अलग-अलग पार्टियों के उम्मीदवार के रूप में 10 बार चुनाव जीता, जबकि 1996 में सिर्फ एक बार कांग्रेस के अफरोज अली खान, आजम खान को हराने में कामयाब रहे थे। रामपुर सीट पर 2 उपचुनाव भी हुए हैं, जिनमें 2019 में आजम खान की पत्नी तजीन फातमा और 2022 में बीजेपी के आकाश सक्सेना ने जीत का स्वाद चखा।
रामपुर विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल सीट है। यहां 40 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी है। इसी वजह से 1951 से लेकर अभी तक हुए विधानसभा चुनावों में सिर्फ एक बार छोड़कर हर बार मुस्लिम प्रत्याशी ने ही जीत दर्ज की है। 2027 के चुनाव में सपा के सामने चुनौती है कि वह इस बार किसको उम्मीदवार बनाती है क्योंकि आजम खान अभी जेल में हैं। वहीं, बीजेपी 2022 के उपचुनाव का अपना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी। रामपुर में इस बार सपा-कांग्रेस एक पाले में और सामने चुनौती देते हुए बीजेपी-RLD का गठबंधन नजर आ सकता है।
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