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सरधना में यूपी चुनाव 2027 में BJP के सामने सीट वापस लेने की चुनौती, समझिए पिछले 3 दशक में कैसे बदली राजनीति

UP Assembly Election 2027 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सरधना विधानसभा क्षेत्र चर्चा में है। समझिए कैसे पिछले 3 दशक से सरधना में BJP की जमीन मजबूत तो है लेकिन ये सीट कभी उसका अभेद्य किला नहीं बन पाई।

Sardhana Assembly Seat- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV समझिए सरधना विधानसभा सीट का चुनावी समीकरण।

पश्चिमी यूपी के चर्चित विधानसभा क्षेत्रों में शुमार सरधना, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले फिर से राजनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है। मेरठ जिले की इस विधानसभा सीट पर पिछले 3 दशकों में जनता दल, BJP, BSP और सपा यानी सभी प्रमुख पार्टियों को जीत मिल चुकी है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि 1991 के बाद सबसे ज्यादा बार कामयाबी सरधना में BJP को ही मिली है। लेकिन 2012 और 2017 में लगातार दो बार चुनाव जीतने वाले संगीत सोम को 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के अतुल प्रधान ने हराकर सीट का राजनीतिक समीकरण बदल दिया था। आइए चुनावी इतिहास से समझते हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सरधना में क्या सियासी समीकरण हो सकते हैं।

सबसे ज्यादा टक्कर का था सरधना का 1996 का चुनाव

1991 के विधानसभा चुनाव से बात शुरू करें तो तब जनता दल के विजय पाल सिंह तोमर ने 36 हजार 418 वोट लेकर इलेक्शन जीत लिया था। तोमर ने अपने प्रतिद्वंदी सुरेंद्र सिंह को 9 हजार 186 वोटों के अंतर से हरा दिया था। उस चुनाव में BJP के रविंद्र पुंडीर तीसरे नंबर पर रहे थे, लेकिन 2 साल बाद ही सरधना की तस्वीर पूरी बदल गई। 1993 में रविंद्र पुंडीर ने BJP के टिकट पर 48 हजार 280 वोट हासिल कर विजय पाल सिंह तोमर को 9 हजार 121 वोट के अंतर से हरा दिया। 1996 में रविंद्र पुंडीर फिर जीते, हालांकि BSP के प्रत्याशी हरपाल सैनी से उनकी जीत का अंतर सिर्फ 1 हजार 21 वोट रहा था। यह 1991 से लेकर 2022 तक सरधना का सबसे टक्कर का इलेक्शन था।

2002 में लगातार दूसरी बार जीती BJP

फिर 2002 के विधानसभा चुनाव में BJP ने रविंद्र पुंडीर पर फिर से विश्वास जताया। ECI के ऑफिशियल आंकड़ों में रविंद्र पुंडीर के नाम 51 हजार 282 वोट और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार हरपाल सैनी के 41 हजार 737 वोट दर्ज हैं। तब रविंद्र पुंडीर की जीत का अंतर 9 हजार 545 वोट रहा था।

2007 में BSP ने सरधना में रोका BJP का विजय रथ

इसके बाद, 2007 के चुनाव में सरधना का राजनीतिक समीकरण फिर से बदल गया। तब बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी चंद्रवीर सिंह ने 37 हजार 469 वोट हासिल किए, जबकि RLD की उम्मीदवार तबस्सुम बेगम को 28 हजार 134 वोट मिले थे। इस चुनाव में BJP का प्रत्याशी तीसरे नंबर पर चला गया था। BJP के विजय पाल सिंह तोमर सिर्फ 28 हजार 26 वोटों पर सिमट गए थे। वहीं, इस बार रविंद्र पुंडीर ने सपा के टिकट पर किस्मत आजमाई थी और वह चौथे नंबर पर रहे थे। रविंद्र पुंडीर को 22 हजार 756 वोट मिले थे। ECI रिकॉर्ड के अनुसार, BSP के चंद्रवीर सिंह की जीत का अंतर 9 हजार 335 वोट था।

साल विजेता का नाम पार्टी वोट रनर-अप का नाम पार्टी वोट जीत का अंतर
1991 विजय पाल सिंह तोमर जनता दल 36,418 सुरेंद्र सिंह जनता पार्टी 27,232 9,186
1993 प्रो. रविंद्र पुंडीर BJP 48,280 विजय पाल सिंह तोमर जनता दल 39,159 9,121
1996 प्रो. रविंद्र पुंडीर BJP 37,552 हरपाल सैनी BSP 36,531 1,021
2002 प्रो. रविंद्र पुंडीर BJP 51,282 हरपाल सैनी BSP 41,737 9,545
2007 चंद्रवीर सिंह BSP 37,469 तबस्सुम बेगम RLD 28,134 9,335
2012 संगीत सिंह सोम BJP 62,438 हाजी मोहम्मद याकूब RLD 50,164 12,274
2017 संगीत सिंह सोम BJP 97,921 अतुल प्रधान SP 76,296 21,625
2022 अतुल प्रधान SP 1,18,573 संगीत सिंह सोम BJP 1,00,373 18,200

(सोर्स- Election Commission Of India)

जब संगीत सोम पहली बार बने विधायक

फिर आता है 2012 का सरधना का विधानसभा चुनाव, इसमें BJP की तरफ से चुनाव मैदान में उतरे संगीत सिंह सोम की जीत होती है। संगीत सोम 62 हजार 438 वोट हासिल करके अपने प्रतिद्वंदी को 12 हजार 274 वोटों के अंतर से हरा देते हैं। इस चुनाव में दूसरे नंबर पर RLD के उम्मीदवार हाजी मोहम्मद याकूब रहे थे और उन्हें 50 हजार 164 वोटों के साथ संतोष करना पड़ा था। 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के अतुल प्रधान ने 48 हजार 23 वोट पाकर तीसरे नंबर पर थे।

2017 में बड़े अंतर से संगीत सोम ने अतुल प्रधान को दी मात

इसके बाद, जब 2017 का विधानसभा चुनाव आता है तो मेन मुकाबला संगीत सोम और अतुल प्रधान के बीच होता है। इस चुनाव में संगीत सोम की लगातार दूसरी बार जीत होती है। ECI के आंकड़ों के मुताबिक, 2012 में BJP के प्रत्याशी संगीत सोम को 97 हजार 921 वोट और सपा कैंडिडेट अतुल प्रधान को 76 हजार 296 वोट मिले थे। दोनों के बीच जीत का अंतर 21 हजार 625 था, जो 1991 के बाद से चुनावों में सबसे बड़ी जीत थी। वहीं, BSP के कैंडिडेट हाफिज इमरान याकूब तीसरे नंबर पर रहे थे और उन्हें 57 हजार 239 वोटों को संतोष करना पड़ा था।

2022 में अपने तीसरे प्रयास में विधायक बने अतुल प्रधान

2022 में अपने तीसरे प्रयास में अतुल प्रधान ने आखिरकार संगीत सोम को हराकर विधायक बनने में कामयाबी हासिल कर ली। ECI के ऑफिशियल रिजल्ट में सपा प्रत्याशी अतुल प्रधान ने 1 लाख 18 हजार 573 वोट हासिल किए थे, जबकि BJP कैंडिडेट संगीत सोम को 1 लाख 373 वोटों के साथ संतोष करना पड़ा। अतुल प्रधान ने संगीत सोम को 18 हजार 200 वोटों के अंतर से पटखनी दे दी थी। इस चुनाव में BSP के संजीव धामा तीसरे नंबर पर रहे थे और महज 18 हजार 140 वोटों पर सिमट गए थे।

दिलचस्प ये भी जानना है कि जो RLD अभी यूपी सरकार में BJP के साथ गठबंधन में है, वह 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करके लड़ी थी। माना जाता है कि RLD समर्थित वोट बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के खाते में चले गए थे। तभी अतुल प्रधान, संगीत सोम पर भारी पड़ गए थे। सरधना की सीट पर RLD की ताकत आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि 2012 और 2007 के चुनाव में RLD का प्रत्याशी रनर-अप रहा था।

सरधना विधानसभा सीट का सियासी समीकरण

सरधना में जाट, मुस्लिम, गुर्जर, राजपूत और SC वर्ग सहित कई सामाजिक समूह सियासी तौर पर अहम माने जाते हैं। सरधना का समीकरण देखें तो 1991 से 2022 के 8 विधानसभा चुनावों में BJP ने 5 बार यानी 1993, 1996, 2002, 2012 और 2017 में जीत का स्वाद चखा। वहीं, जनता दल ने 1991, बहुजन समाज पार्टी ने 2007 और समाजवादी पार्टी ने 2022 में जीत हासिल की। तो सरधना का चुनावी इतिहास BJP की मजबूत पकड़ के बारे में तो बताता है, लेकिन 2007 और 2022 यह भी दिखाते हैं कि सरधना की सीट अभेद्य नहीं है।

खासकर अतुल प्रधान के वोटों का 2012 के 48 हजार 23 के मुकाबले बढ़कर 2022 में 1 लाख 18 हजार 573 हो जाना बड़ा सियासी बदलाव है। हालांकि, 2027 में सरधना की टक्कर किस दिशा में जाएगी, यह पार्टियों की तरफ से उम्मीदवारों के चयन, BJP-SP की स्ट्रैटेजी, तीसरी पार्टी की परफॉर्मेंस और लोकल सामाजिक समीकरणों पर काफी हद तक निर्भर करेगा। कैराना में भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में कड़ी टक्कर हो सकती है। यहां पिछले 3 दशकों से ये सीट दो सियासी परिवारों में घूम रही है।