शाहजहांपुर सीट पर लगातार 9 बार से जीत रहे BJP के सुरेश खन्ना, UP चुनाव 2027 में यहां क्या होगा सियासी समीकरण
शाहजहांपुर विधानसभा सीट पर पिछले 3 दशकों से बीजेपी के सुरेश कुमार खन्ना का दबदबा कायम है। बीएसी और सपा की लहर में भी यह सीट बीजेपी के पास ही रही। आइए समझते हैं कि यूपी चुनाव 2027 में शाहजहांपुर का समीकरण।

उत्तर प्रदेश की शाहजहांपुर सीट यूपी की हॉट सीटों में से एक है। यहां बीजेपी सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना लगातार 9 बार से विधायक हैं। 1989 में पहली जीत के बाद सुरेश कुमार खन्ना रुके ही नहीं और लगातार 9 चुनावों में जीत दर्ज की। यूपी में बीजेपी की हालत 2000 के दशक में पतली हुई लेकिन इसका कोई फर्क सुरेश कुमार खन्ना की शाहजहांपुर सीट पर नहीं पड़ा। सुरेश खन्ना ने 2007 में BSP की लहर और 2012 में सपा को मिले पूर्ण बहुमत के समय के चुनावों में भी अपनी सीट बचा ली। सपा-बीएसपी ने लगातार सुरेश कुमार खन्ना को टक्कर देने की कोशिश की लेकिन कभी उन्हें हराने में कामयाबी नहीं हासिल कर पाए। शाहजहांपुर विधानसभा सीट, शाहजहांपुर लोकसभा का हिस्सा है। शाहजहांपुर सीट का नंबर 135 है। आइए समझते हैं कि शाहजहांपुर सीट का पिछले 3 दशकों में क्या सियासी इतिहास रहा है और 2027 के विधानसभा चुनाव में यहां क्या समीकरण बनने वाले हैं।
1991 में सुरेश कुमार खन्ना ने लगातार दूसरी बार शाहजहांपुर में दर्ज की जीत
बात 1991 के चुनाव की करने से पहले ये जान लीजिए कि सुरेश कुमार खन्ना शाहजहांपुर सीट से 1980 से चुनाव लड़ रहे हैं। सुरेश कुमार खन्ना ने 1980 में जनता पार्टी (सेक्युलर) और 1985 में बीजेपी के टिकट पर शाहजहांपुर से विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन पहले दो प्रयासों में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। इसके बाद, सुरेश कुमार खन्ना को पहली जीत 1989 के विधानसभा चुनाव में मिली जब उन्होंने मौजूदा विधायक नवाब सिकंदर अली खान को पटखनी दे दी थी। 1991 में BJP के टिकट पर सुरेश कुमार खन्ना फिर सियासी मैदान में उतरे और 50 हजार 579 वोट हासिल करके जनता दल के मोहम्मद इकबाल को 28 हजार 237 वोटों के अंतर से हरा दिया था। मोहम्मद इकबाल 22 हजार 342 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे थे। यह शाहजहांपुर सीट पर 1991 से 2022 के बीच हुए सभी चुनावों में उनकी सबसे बड़े अंतर की जीत थी। इस चुनाव में कांग्रेस के अशफाक उल्ला खान को 18 हजार 648 और जनता पार्टी के नवाब सिकंदर अली खान को 6 हजार 71 वोट मिले थे।
सपा-बीएसपी की संयुक्त चुनौती को मात देकर लगाई जीत की हैट्रिक
1993 में सुरेश कुमार खन्ना ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। सुरेश कुमार खन्ना को 60 हजार 224 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के अशोक कुमार 43 हजार 356 वोटों पर ही सिमट गए थे। इस बार सुरेश कुमार खन्ना की जीत का अंतर 16 हजार 868 वोट रहा था। कांग्रेस के मोहम्मद इकबाल इस चुनाव को त्रिकोणीय नहीं बना पाए थे और महज 13 हजार 220 वोटों पर सिमट गए थे। सपा-बीएसपी 1993 का चुनाव मिलकर लड़े थे इसलिए बीएसपी ने यहां कैंडिडेट नहीं उतारा था।
1996 में सुरेश कुमार खन्ना ने लगातार चौथी बार जीता चुनाव
1996 के विधानसभा चुनाव में सुरेश कुमार खन्ना ने लगातार चौथी बार शाहजहांपुर सीट जीतकर अपना दबदबा कायम रखा। इस चुनाव में सुरेश कुमार खन्ना को टक्कर कांग्रेस के सिकंदर अली खान दे रहे थे। 1996 के चुनाव में सुरेश कुमार खन्ना ने 60 हजार 58 वोट और सिकंदर अली खान ने 37 हजार 793 वोट हासिल किए थे। सुरेश कुमार खन्ना ये चुनाव 22 हजार 265 वोटों के बड़े अंतर से जीत गए थे। इस चुनाव में सपा उम्मीदवार ओम प्रकाश गुप्ता तीसरे नंबर पर रहे थे और 23 हजार 339 वोट ही हासिल कर पाए थे।
2002 में सुरेश कुमार खन्ना ने लगाया जीत का पंजा
2002 के विधानसभा चुनाव में भी सुरेश कुमार खन्ना की साख दांव पर थी लेकिन उन्होंने जीत का पंजा लगाकर चौंका दिया। ECI के आंकड़ों के अनुसार, सुरेश कुमार खन्ना ने 23 हजार 37 वोटों के बड़े अंतर से सपा के प्रदीप पांडे से हरा दिया है। सुरेश कुमार खन्ना को 68 हजार 454 वोट मिले, जबकि प्रदीप पांडे 45 हजार 417 वोट लेकर रनर-अप रहे थे। इस चुनाव में कांग्रेस के अशफाक उल्ला खान 15 हजार 757 वोट ही हासिल कर पाए थे। वहीं, BSP के तकवीम खान 7 हजार 830 वोटों पर ही सिमट गए।
2007 में BSP ने सुरेश कुमार खन्ना को दी कड़ी चुनौती
2007 में BJP और BSP के बीच कड़ी टक्कर हुई। ये वह चुनाव था, जब यूपी की जनता ने मायावती की BSP को पहली बार पूर्ण बहुमत दे दिया था। ECI के अनुसार, 2007 के विधानसभा चुनाव में शाहजहांपुर में सुरेश कुमार खन्ना को 51 हजार 463 वोट मिले थे। वहीं, BSP के फैजान अली खान ने 41 हजार 273 वोट हासिल किए। तब दोनों की जीत-हार का अंतर घटकर 10 हजार 190 वोट ही रह गया था। सपा के प्रदीप पांडे तीसरे स्थान पर रहे और 21 हजार 808 वोट ही हासिल कर पाए थे।
| वर्ष | विजेता | पार्टी | वोट | रनर-अप | पार्टी | वोट | अंतर |
| 1991 | सुरेश कुमार खन्ना | BJP | 50,579 | मोहम्मद इकबाल | JD | 22,342 | 28,237 |
| 1993 | सुरेश कुमार खन्ना | BJP | 60,224 | अशोक कुमार | SP | 43,356 | 16,868 |
| 1996 | सुरेश कुमार खन्ना | BJP | 60,058 | सिकंदर अली खान | INC | 37,793 | 22,265 |
| 2002 | सुरेश कुमार खन्ना | BJP | 68,454 | प्रदीप पांडे | SP | 45,417 | 23,037 |
| 2007 | सुरेश कुमार खन्ना | BJP | 51,463 | फैजान अली खान | BSP | 41,273 | 10,190 |
| 2012 | सुरेश कुमार खन्ना | BJP | 81,581 | तनवीर खान | SP | 65,403 | 16,178 |
| 2017 | सुरेश कुमार खन्ना | BJP | 1,00,734 | तनवीर खान | SP | 81,531 | 19,203 |
| 2022 | सुरेश कुमार खन्ना | BJP | 1,09,942 | तनवीर खान | SP | 1,00,629 | 9,313 |
(सोर्स- Election Commission Of India)
2012 में सपा की लहर में भी सुरेश कुमार खन्ना ने निकाल ली सीट
2008 के परिसीमन के बाद शाहजहांपुर सीट पर 2012 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के लोगों ने सपा को पहली बार पूर्ण बहुमत दिया था। इस चुनाव में सुरेश कुमार खन्ना को 81 हजार 581 वोट मिले थे, जबकि सपा के तनवीर खान 65 हजार 403 वोटों पर ही सिमट गए थे। सुरेश कुमार खन्ना ने 16 हजार 178 वोटों के अंतर से ये चुनाव जीत लिया था। BSP के उम्मीदवार असलम खान तीसरे स्थान पर रहे थे और उन्हें 19 हजार 936 वोटों से संतोष करना पड़ा।
BJP की प्रचंड लहर में पहली बार पार किया 1 लाख वोटों का आंकड़ा
2017 के विधानसभा चुनाव में सुरेश कुमार खन्ना ने पहली बार विधानसभा चुनाव में 1 लाख से अधिक वोट पाए। बीजेपी की प्रचंड लहर में शाहजहांपुर सीट पर सुरेश कुमार खन्ना ने 1 लाख 734 वोट पाए। सपा ने 2017 में एक बार फिर तनवीर खान को सियासी मैदान में उतारा था जो 81 हजार 531 वोट ही हासिल कर सके थे और 19 हजार 203 वोटों के अंतर से हार गए थे।
2022 में कड़ी चुनौती के बावजूद सुरेश कुमार खन्ना ही जीते शाहजहांपुर सीट
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने फिर से सुरेश खन्ना को उतारा और उनके सामने सपा के टिकट पर लगातार तीसरी बार थे तनवीर खान। सुरेश कुमार खन्ना की जीत के वोटों का अंतर घटकर इस बार 9 हजार 313 ही रह गया लेकिन जीत उनकी ही हुई। सुरेश कुमार खन्ना को 1 लाख 9 हजार 942 वोट मिले, जबकि तनवीर खान 1 लाख 629 वोटों पर ही सिमट गए। 1991 से 2022 तक हुए 8 विधानसभा चुनावों में यह सुरेश कुमार खन्ना की सबसे कम अंतर वाली विजय थी।
शाहजहांपुर सीट पर 2027 का सियासी समीकरण
पिछले 3 दशकों की बात करें तो शाहजहांपुर सीट पर लगातार सुरेश कुमार खन्ना का दबदबा बना हुआ है। यहां सुरेश कुमार खन्ना पिछले 9 बार से विधायक हैं और उनको 2027 के चुनाव में भी चुनौती देना प्रतिद्वंद्वियों के लिए आसान नहीं होगा। हालांकि, 2027 के चुनाव में सपा और कांग्रेस साथ मिलकर लड़ सकते हैं और 2022 के विधानसभा चुनाव की तरह सुरेश खन्ना के साथ सपा के प्रत्याशी का सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। 2022 का चुनाव सुरेश कुमार खन्ना पिछले 3 दशकों में सबसे कम अंतर से जीते थे।
2 साल पहले ही हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी के प्रत्याशी अरुण कुमार सागर की बढ़त शाहजहांपुर लोकसभा की शाहजहांपुर विधानसभा सीट पर मामूली 3 हजार 183 वोटों की ही थी। बीजेपी प्रत्याशी अरुण कुमार सागर ने 96 हजार 786 वोट और सपा की ज्योत्सना गोंड ने 93 हजार 603 वोट पाए थे। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में अगर 2024 के लोकसभा चुनाव की तरह सपा और कांग्रेस साथ में होंगे तो शाहजहांपुर सीट पर बीजेपी से उनकी कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।
ये भी पढ़ें- अमरोहा में 5 बार के विधायक महबूब अली के किले को कैसे भेदेगी BJP? समझिए UP चुनाव 2027 का सियासी समीकरण