सीतापुर: समाजवादी पार्टी के जिन पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल के आवंटन के बाद सीतापुर में 20 साल तक अवैध तरीके से सपा दफ्तर चला, उनकी तरफ से किए गए आवंटन के कई अन्य मामले भी हैं, जिनको लेकर उनपर गड़बड़झाले के आरोप लग चुके हैं। जान लें कि सीतापुर की राजनीति इन दिनों गर्म है क्योंकि नगर पालिका ने सपा दफ्तर की बिल्डिंग को 15 के अंदर खाली करने का आदेश दे दिया है। यहां 20 साल से नजूल की जमीन पर कब्जा करके अवैध तरीके से सपा कार्यालय चल रहा था। इस आर्टिकल में ऐसे अन्य कौन से मामले में जिनको लेकर राधेश्याम जायसवाल पर सवाल उठ चुके हैं।
विधायक निधि का दुरुपयोग
आरोप है कि साल 2007-08 में तत्कालीन सदर विधायक राधेश्याम जायसवाल ने अपनी पत्नी के नाम संचालित दुलारी देवी कॉन्वेंट पब्लिक स्कूल को 38 लाख रुपये अपनी विधायक निधि से दिए थे, जबकि वहां डिग्री कॉलेज बनवाया गया था। बाद में इसके संबंध में राधेश्याम जायसवाल को वसूली का नोटिस भी जारी हुआ था।
प्रोसिडिंग बुक जलवाने रा आरोप
राधेश्याम जायसवाल पर आरोप है कि उन्होंने साल 1995 से 2005 तक की प्रोसिडिंग बुक जलवाई थी, जिसमें घोटालों के सबूत हो सकते थे। इसके बाद, उनपर 1995 से 2005 तक लगभग 17 करोड़ का घोटाला करने का आरोप लगा था और इसकी जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई थी।
दुकानों के आवंटन में घोटाला
इसके अलावा, पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल पर दुकानों के आवंटन में अपने चहेतों के नाम फर्जी अलॉटमेंट करके भ्रष्टाचार करने का आरोप भी है।
गली में प्राइवेट गेट लगाने का आरोप
2017 में राधेश्याम जायसवाल पर अपने घर वाली सार्वजनिक गली पर प्राइवेट गेट लगवाने का आरोप लगा था। प्रशासन की टीम जब इस हटाने पहुंची थी तो मौके पर काफी हंगामा हुआ था।
धनीपुर गोलीकांड
राधेश्याम जायसवाल का नाम धनीपुर गोलीकांड से भी जुड़ा था। 2013 में जमीन पर कब्जेदारी को लेकर राधेश्याम के बेटे और धनीपुर के किसान के बीच कथित गोलीबारी हुई थी। इसमें किसान के पक्ष का एक शख्स जख्मी हो गया था।
(इनपुट- मोहित मिश्रा)
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